संयुक्त राष्ट्र महासभा में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दिए गए बयान को विस्तार से बताया गया है, जिसमें उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टिप्पणी करते हुए भारत और चीन को यूक्रेन युद्ध के प्राथमिक वित्तपोषक बताया है।
ट्रंप ने नाटो देशों को भी रूस से तेल खरीदने पर फटकार लगाई और बताया कि इसके कारण रूस को युद्ध के लिए धन मिल रहा है। उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का नाम लेते हुए कहा कि ये देश हजारों टन तेल रूस से खरीद रहे हैं, जिससे युद्ध में रूस को आर्थिक सहायता मिलती है।संयुक्त राष्ट्र सभा का प्रमुख विषयट्रंप के सम्बोधन में उन्होंने स्पष्ट रूप से रूस पर प्रतिबंधों की बात की, लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि कई बड़े देशों ने इन प्रतिबंधों का पालन नहीं किया।
नाटो देशों की आलोचना करते हुए ट्रंप बोले कि यूरोपीय देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं, जिससे प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो जाता है। भारत और चीन को उन्होंने विशेष तौर पर मुख्य वित्तपोषक बताया क्योंकि ये दोनों देश बड़े पैमाने पर तेल रूस से खरीद रहे हैं, जो यूक्रेन युद्ध को आर्थिक मजबूती देता है।
ट्रंप ने वैश्विक मंच पर इस विषय को जोरदार ढंग से उठाया और सभी देशों को जागरूक होने की सलाह दी।भारत-चीन की भूमिका और आरोपखबर में आगे ट्रंप के वक्तव्य का उल्लेख है कि भारत, चीन समेत कई देश सस्ते दर पर रूस से तेल खरीद रहे हैं