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संतकबीरनगर में युवक की आत्महत्या पर बवाल, भाजपा के जिला महामंत्री समेत चार पर केस दर्ज
संतकबीरनगर ज़िले के बौर्यास गाँव में सोमवार देर रात हुई 22 वर्षीय युवक की आत्महत्या के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव और हंगामा फैल गया। मृतक युवक धर्मराज निषाद ने अपने ही घर में साड़ी के फंदे से लटककर जान दे दी। इस घटना ने पूरे गाँव को स्तब्ध कर दिया।
आत्महत्या और मुकदमा दर्ज
मृतक की माँ की तहरीर पर पुलिस ने गाँव के ही रहने वाले भाजपा के जिला महामंत्री विनोद पांडेय समेत चार लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया है। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर धर्मराज पर लगातार दबाव और मानसिक प्रताड़ना डाली, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया।
पोस्टमार्टम के बाद बवाल
मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही धर्मराज का शव गाँव पहुँचा, ग्रामीणों में आक्रोश भड़क उठा। भीड़ ने शव को सड़क पर रखकर जाम कर दिया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग करने लगी।
सूचना मिलते ही एसडीएम और नायब तहसीलदार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे, लेकिन तब तक वहाँ पर काफी भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी। लगभग ढाई घंटे तक हालात बेहद तनावपूर्ण बने रहे। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने नायब तहसीलदार की गाड़ी का शीशा भी तोड़ डाला।
परिवार का आरोप
परिवार का कहना है कि धर्मराज पर भाजपा नेता और उनके सहयोगियों की ओर से लगातार दबाव डाला जा रहा था। मृतक के परिजनों ने यह भी कहा कि यदि केस वापस नहीं लिया गया तो गाँव के ही भाजपा नेता और कुछ अन्य लोग उन्हें और ज्यादा प्रताड़ित कर रहे थे। इस दबाव और मानसिक तनाव के चलते ही धर्मराज ने आत्महत्या कर ली।
पुलिस की कार्रवाई
एसपी ने बताया कि मृतक की माँ की तहरीर पर भाजपा जिला महामंत्री विनोद कुमार, प्रमोद, विवेक और रामपाल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने और दबाव बनाने का आरोप है। पुलिस ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हालात पर काबू
मौके पर पुलिस और प्रशासन ने बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया और जाम खत्म कराया। देर रात तक हालात सामान्य हो पाए। गाँव में अब भी तनाव का माहौल बना हुआ है और भारी पुलिस बल तैनात है।
👉 यह पूरा मामला न सिर्फ एक युवक की दर्दनाक मौत की ओर इशारा करता है, बल्कि ग्रामीण राजनीति और दबाव की काली तस्वीर भी सामने लाता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस इस प्रकरण की जाँच किस तरह से करती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाती है या नहीं।