बिहार के प्रशांत किशोर ने उठाया शहर में जमा पैसों का मुद्दा, निवेशकों के हक़ और अधिकार की माँग
पटना, संवाददाता।
(1) बिहार की राजनीति में नई धारा बनाने वाले प्रशांत किशोर ने सहारा कंपनी में फँसे आम निवेशकों के पैसे की वापसी को लेकर ज़ोरदार आवाज़ बुलंद की है।
(2) उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग जिन्होंने अपनी खून-पसीने की कमाई सहारा में जमा की थी, उन्हें उनका हक़ मिलना चाहिए।
(3) इस बयान के बाद सहारा निवेशकों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है।
(4) प्रशांत किशोर का कहना है कि सरकार और अदालत को मिलकर तत्काल समाधान निकालना चाहिए।
(5) उन्होंने इस मुद्दे को न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक न्याय का मामला बताया है।
(6) सहारा इंडिया कंपनी ने वर्षों तक गाँव-गाँव जाकर पैसे इकट्ठा किए।
(7) छोटे निवेशकों ने अपने भविष्य के सपनों को सहारा में रखा।
(8) किसी ने बेटी की शादी के लिए पैसे जमा किए।
(9) किसी ने इलाज और बुढ़ापे के सहारे के लिए।
(10) लेकिन जब लौटाने का समय आया तो रास्ता अटक गया।
(11) सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को आदेश दिया कि वह पैसा लौटाए।
(12) सेबी को इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी गई।
(13) कंपनी से हजारों करोड़ रुपये जमा कराए गए।
(14) लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी रही कि लाखों निवेशक अब भी परेशान हैं।
(15) कई ने ऑनलाइन आवेदन किया, पर पैसा नहीं आया।
(16) कई जिलों में निवेशकों ने धरना-प्रदर्शन किया।
(17) जगह-जगह ज्ञापन सौंपे गए।
(18) लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
(19) यह मामला धीरे-धीरे जनता की उम्मीद तोड़ने लगा।
(20) ऐसे समय में प्रशांत किशोर ने इसे अपनी जनसुराज यात्रा का हिस्सा बना दिया।
(21) उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता को न्याय मिलना चाहिए।
(22) उन्होंने सहारा पीड़ितों से मुलाक़ात की।
(23) उनकी व्यथा सुनी।
(24) उन्होंने कहा कि गरीब का पैसा डूबना लोकतंत्र पर कलंक है।
(25) उन्होंने इसे राजनीति और सत्ता से जोड़ते हुए कहा कि सरकारें चुप नहीं रह सकतीं।
(26) प्रशांत किशोर ने उदाहरण देते हुए कहा कि अरबपतियों का कर्ज़ सरकारें माफ करती हैं।
(27) बैंकों का हज़ारों करोड़ का घाटा माफ हो जाता है।
(28) लेकिन गरीब की 10-20 हज़ार की जमा पूँजी वर्षों से फंसी है।
(29) यह व्यवस्था की असमानता है।
(30) यही असमानता लोकतंत्र को कमजोर करती है।
(31) उन्होंने अपने भाषणों में कई बार कहा कि जनता संगठित होकर दबाव बनाए।
(32) जनता की ताक़त से ही सरकारें मजबूर होती हैं।
(33) अगर गरीब और मध्यम वर्ग संगठित होगा तो पैसा लौटाना आसान होगा।
(34) उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएँगे।
(35) उन्होंने इसे गरीबों की इज़्ज़त और सम्मान की लड़ाई कहा।
