डिसेंट अस्पताल घोटाला: साल भर में 15 करोड़ का लेन-देन, खाते में सिर्फ नौ हजार बचे
गोरखपुर में स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के नाम पर किए गए बड़े घोटाले का राज धीरे-धीरे सामने आ रहा है। डिसेंट अस्पताल और उससे जुड़े चार नर्सिंग होमों के खिलाफ चल रही जांच में पुलिस को चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं। साइबर सेल की टीम ने जब डिसेंट अस्पताल के बैंक खातों की जांच की, तो पता चला कि महज एक साल के भीतर करीब 15 करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खाते में फिलहाल सिर्फ 9 हजार रुपये ही शेष मिले।
साइबर सेल की जांच में खुला राज
पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने डिसेंट अस्पताल के बैंक स्टेटमेंट खंगाले। जांच से सामने आया कि खाते में जैसे ही रकम आती थी, तुरंत उसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तरह धीरे-धीरे पूरी रकम की बंदरबांट हो जाती थी। यह पैटर्न बार-बार देखने को मिला, जिससे साफ हो गया कि अस्पताल प्रबंधन और उसके सहयोगियों ने योजनाबद्ध तरीके से धोखाधड़ी की।
अस्पताल संचालकों से पूछताछ
एसएसपी रामपुरवा नितिन तृप्ति शुक्ला और उनकी विशेष टीम ने चारों नर्सिंग होमों के संचालकों को पूछताछ के लिए बुलाया। टीम की कोशिश है कि यह पता लगाया जाए कि खातों से रकम आखिर कहां और किसके पास पहुंची। पुलिस को शक है कि इस रकम का इस्तेमाल जाली दस्तावेज बनवाने और बीमा कंपनियों को धोखा देने में किया गया है।
बीमा कंपनियों और मरीजों के नाम पर घोटाला
पुलिस को जो प्राथमिक जानकारी मिली है, उसके अनुसार डिसेंट अस्पताल ने फर्जी कागजात तैयार कर मरीजों को भर्ती दिखाया और हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम उठाए। बीमा कंपनियों को झूठी रिपोर्ट और नकली बिल भेजकर करोड़ों रुपये वसूले गए। यही नहीं, जिन मरीजों का नाम इस्तेमाल हुआ, उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी।
कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश
कमिश्नर अमित सिंह ने कहा है कि इस घोटाले की जांच सिर्फ साइबर सेल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे उच्चस्तरीय स्तर पर कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जांच में अधिकारियों की लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
डॉक्टर एके सिंह का बयान
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े डॉक्टर एके सिंह का कहना है कि उन्होंने अस्पताल का संचालन छोड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस धोखाधड़ी की जानकारी नहीं थी। हालांकि पुलिस को इस दावे पर शक है और जांच में उनके रोल की भी पड़ताल की जा रही है।
क्यों गंभीर है मामला?
साल भर में 15 करोड़ रुपये का लेन-देन
खाते में बचा केवल 9 हजार रुपये
फर्जी कागजात और बीमा क्लेम के जरिए रकम की हेराफेरी
चार नर्सिंग होमों और डिसेंट अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी
आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि घोटाले से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन की पूरी ऑडिट कराई जाएगी। इसके बाद जिन लोगों ने इस रकम को हड़पा है, उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।
निष्कर्ष:
गोरखपुर का यह हेल्थ इंश्योरेंस घोटाला अब प्रदेशभर में सुर्खियों में है। हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस, साइबर सेल और प्रशासनिक अधिकारी लगातार जांच में जुटे हैं। शुरुआती जांच में ही जब 15 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला और खाते में सिर्फ 9 हजार बचे मिले, तो यह साफ हो गया कि मामला बेहद गंभीर है। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
