नेपाल में सितंबर 2025 में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए, जब जन आंदोलन और भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। युवाओं की अगुवाई वाली इन प्रदर्शनों ने सरकार के खिलाफ असंतोष का माहौल बनाया और संसद का विघटन सुनिश्चित किया। इसके बाद नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसकी कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को दी गई। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री कार्की के नेतृत्व में तीन नए मंत्रियों को नियुक्त किया, जिनका शपथ ग्रहण समारोह काठमांडू के शीतल निवास में सम्पन्न हुआ।
सरकार के गठन की पृष्ठभूमि
नेपाल में 8 सितंबर को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों में सरकारी भवनों, संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई नेताओं के घरों को निशाना बनाया गया। असंतोष चरम पर पहुँच गया और केवल दो दिनों में 72 लोगों की मौत हुई, जबकि 191 घायल हुए। जनरल अशोक राज सिग्देल की अगुवाई में सशस्त्र बलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से अंतरिम सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।
मंत्रियों का चयन और जिम्मेदारियाँ
- रमेश्वर प्रसाद खनाल – नेपाल के पूर्व वित्त सचिव, जिन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उनके पास विकास नीति, राजकोषीय सुधार और आर्थिक नीतियों का अनुभव है।
- कुलमान घिसिंग – नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रबंध निदेशक, जिन्हें ऊर्जा, भौतिक अवसंरचना, परिवहन और शहरी विकास मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई। उनकी उपलब्धि ‘लोड-शेडिंग’ समाप्त करना है, जिससे देश को स्थाई बिजली आपूर्ति मिली।
- ओमप्रकाश अर्याल – नेपाल के मानवाधिकार कार्यकर्ता और कानूनी सलाहकार, जिन्हें गृह मंत्रालय, विधि न्याय और संसदीय कार्य मंत्रालय सौंपा गया। उन्होंने तंत्र सुधार, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और मानवाधिकार संरक्षण में काम किया है।
शपथ ग्रहण समारोह
शपथ ग्रहण समारोह सोमवार, 15 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की उपस्थिति में हुआ। उपराष्ट्रपति रामसहाय प्रसाद यादव और प्रधानमंत्री कार्की के साथ, नए मंत्रियों ने अलग-अलग मंत्रालयों का कार्यभार सँभाला। समारोह बारिश के कारण तंबू में आयोजित किया गया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह बदलाव नेपाल के राजनीतिक इतिहास में ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार, Discord जैसे सोशल मीडिया मतदान प्लेटफॉर्म के जरिए प्रधानमंत्री पद का चुनाव हुआ, जिसमें सुशीला कार्की को सर्वाधिक जन समर्थन मिला। सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, और आगामी आम चुनाव कराने के लिए स्थिरता सुनिश्चित करना है। सभी नए मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में सुधारवादी छवि रखते हैं और युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सुधार व चुनौतियाँ
के.पी. शर्मा ओली सरकार के कार्यकाल के सभी प्रमुख प्रस्तावों को अंतरिम कैबिनेट द्वारा रद्द कर दिया गया। सिंघा दरबार, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण का कार्य सांसदों और मंत्रियों को सौंपा गया। मंत्रियों ने पदभार ग्रहण करते ही भ्रष्टाचार दूर करने, देश की आर्थिक स्थिति सुधारने और युवाओं को विश्वास दिलाने का संकल्प लिया।
सत्ता हस्तांतरण और आगे की योजनाएँ
अंतरिम सरकार आगामी मार्च 2026 में आम चुनाव कराएगी, ताकि स्थायी सरकार की स्थापना हो सके। युवाओं का आन्दोलन इतिहास में सबसे सशक्त जन प्रतिरोध के रूप में देखा गया है, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ नई सरकार को जन्म दिया।
निष्कर्ष
नेपाल की अंतरिम सरकार का गठन देश के जन आंदोलन और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की सफलता का प्रतीक है। सुशीला कार्की और उनके नव नियुक्त मंत्री राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंत्रियों की नियुक्ति, जन आंदोलन और देश में आयी राजनीतिक हलचल ने नेपाल को एक नए युग की ओर अग्रसर किया है