जीएसटी 2.0 लागू होने के इंतजार में खरीदार अपने पहले से मंजूर किए गए कार लोन को रद्द कर रहे हैं। इस वजह से बैंकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि पहले से मंजूर लोन खरीद प्रक्रिया के अंतिम चरण में जाकर भी पूरा नहीं हो पा रहे हैं।
खबर का मुख्य कारण
- नई दिल्ली ऑटोमोबाइल डीलर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 22 सितंबर से नई जीएसटी 2.0 प्रणाली लागू होने वाली है।
- ग्राहकों को उम्मीद है कि नई प्रणाली में टैक्स में राहत या कुछ फायदे मिल सकते हैं, इसलिए वे फिलहाल अपनी खरीद टाल रहे हैं।
- जिन ग्राहकों को पहले ही कार लोन मंजूर हो चुका था, वे अब लोन रद्द कर रहे हैं और नई प्रक्रिया के बाद फिर से कर्ज आवेदन की सोच रहे हैं।
बैंकों और डीलरों की चिंता
- बैंकों की चिंता यह है कि पहले से मंजूर कार लोन की परिणति बिक्री में नहीं हो पा रही है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।
- डीलरों का कहना है कि इनवॉइस जारी न होने की वजह से ग्राहकों को नई पॉलिसी के तहत टैक्स लाभ नहीं मिल पाएगा, इसलिए वे खरीद रोक रहे हैं।
कार उद्योग पर असर
- ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन का अनुमान है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कारों की मांग तेज होगी।
- इंडस्ट्री को उम्मीद है कि टैक्स सुधार के बाद कारों की मांग में 3.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो सकता है।
- सरकार को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में आर्थिक विकास के साथ 2025-26 में ऑटो सेक्टर की मांग 7.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
ऐसे आएगा 3.50 लाख करोड़ का इजाफा
- दोनों प्रमुख कार निर्माता कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि इन सुधारों के बाद उनकी बिक्री तेजी से बढ़ेगी।
- अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ऑटो इंडस्ट्री की कुल मांग 7.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।
निष्कर्ष
जीएसटी 2.0 की उम्मीद में खरीदार अस्थायी रूप से कार खरीद को स्थगित कर रहे हैं और पुराने लोन रद्द करके नई प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बैंकों व डीलरों की चिंता बढ़ गई है, लेकिन सेक्टर को वृद्धि की उम्मीद है।
