मुख्य आरक्षी मोटर परिवहन के पद पर चयन में अब नहीं होगी लिखित परीक्षा, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति
लखनऊ। प्रदेश पुलिस में मुख्य आरक्षी मोटर परिवहन के पद पर चयन प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब इस पद पर पदोन्नति लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं होगी, बल्कि सेवा में वरिष्ठता यानी ज्येष्ठता को ही चयन का आधार बनाया जाएगा। भर्ती बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमावली-2015 के प्रावधानों के अनुसार इस पद पर केवल ज्येष्ठता को ही मान्यता दी जा सकती है।
लॉजिस्टिक मुख्यालय ने दिया था परीक्षा कराने का प्रस्ताव
डीजीपी मुख्यालय की लॉजिस्टिक शाखा ने हाल ही में प्रस्ताव भेजा था कि मुख्य आरक्षी मोटर परिवहन समेत सभी संबंधित पदों पर विभागीय परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति कराई जाए। इसका उद्देश्य यह था कि योग्य और मेधावी कर्मियों को मौका मिले और चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी दिखे। लेकिन भर्ती बोर्ड ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कहा कि वर्तमान नियमावली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
भर्ती बोर्ड का निर्णय
भर्ती बोर्ड ने अपने पत्र में लिखा है कि उप पुलिस मोटर परिवहन सेवा नियमावली-2015 के तहत मुख्य आरक्षी चालक, मुख्य आरक्षी परिचालक और मुख्य आरक्षी मोटर परिवहन – इन तीनों पदों पर केवल ज्येष्ठता के आधार पर ही पदोन्नति की जा सकती है। यदि परीक्षा को आधार बनाना है तो नियमावली में संशोधन करना अनिवार्य होगा।
क्यों जरूरी समझा गया बदलाव
लंबे समय से विभागीय परीक्षाएँ समय पर न होने की वजह से पद रिक्त पड़े रहते थे। इससे पुलिस की मोटर परिवहन शाखा का कामकाज प्रभावित हो रहा था। गाड़ियों का रखरखाव, मरम्मत और संचालन सुचारू रूप से न होने पर पुलिस की रोजमर्रा की कार्रवाई पर असर पड़ता है। ऐसे में वरिष्ठता को आधार बनाने से पदोन्नति की प्रक्रिया तेज़ और सरल हो जाएगी।
2020 से 2026 तक होंगे 176 पदोन्नति
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2020 से लेकर 2026 तक मुख्य आरक्षी मोटर परिवहन के कुल 176 पदों पर पदोन्नति होनी है। भर्ती बोर्ड ने साफ किया है कि इन सभी पदों को ज्येष्ठता के आधार पर ही भरा जाएगा। लिहाजा, लंबे समय से सेवा कर रहे आरक्षियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
नए कर्मियों में निराशा
हालांकि, इस निर्णय से नए और युवा पुलिसकर्मियों में निराशा देखी जा रही है। उनका मानना है कि अगर लिखित परीक्षा का प्रावधान होता तो मेहनती और पढ़ाई करने वाले जवानों को भी तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलता। अब केवल वरिष्ठता को आधार मानने से युवा कर्मियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा।
संशोधन की संभावना
भर्ती बोर्ड ने सरकार को संकेत दिया है कि यदि भविष्य में परीक्षा को आधार बनाना है तो इसके लिए नियमावली में संशोधन आवश्यक होगा। फिलहाल 2015 की नियमावली ही लागू है। शासन स्तर पर यदि संशोधन का निर्णय लिया जाता है, तभी आगे परीक्षा के आधार पर चयन संभव होगा।
विभागीय प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से विभाग का कामकाज तेज़ी से आगे बढ़ेगा और रिक्त पद समय पर भर जाएंगे। लेकिन साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि केवल वरिष्ठता पर आधारित प्रणाली से गुणवत्ता और दक्षता पर असर पड़ सकता है। कई बार वरिष्ठ होने के बावजूद कुछ कर्मी तकनीकी रूप से कमजोर साबित होते हैं, जिससे कार्यकुशलता प्रभावित हो सकती है।