पीडब्ल्यूडी कार्यालय में मंगलवार को जई और ठेकेदारों के बीच तीव्र झगड़े की घटना सामने आई। इस घटना के कारण कार्यालय का माहौल कुछ घंटों तक तनावपूर्ण रहा। ठेकेदारों ने पीडब्ल्यूडी ड्यूटी में घोटाले और भुगतान में जमकर गोलमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में गाली-गलौज, मारपीट और अफरातफरी फैल गई। झगड़े में एक इंजीनियर की शर्ट फाड़ दी गई। पुलिस को जानकारी मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचना पड़ा और स्थिति को नियंत्रित किया। जब मामला नहीं सुलझ पाया तो दोनों पक्षों को थाने ले जाया गया, जहां बातचीत और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
विवाद की शुरुआत
यह घटना तब शुरू हुई जब कई ठेकेदार पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचे और भुगतान से जुड़े मामलों पर अधिकारी से अपनी शिकायतें लेकर आए। उनका आरोप था कि उनके पिछले वर्ष के भुगतान में अनुचित कटौती की गई है और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं है। ठेकेदारों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने अपने हिसाब से फाइलें रोक रखी हैं और कुछ भुगतान करा दिए, जबकि नियमों के अनुसार सभी को एक समान भुगतान होना चाहिए था। इन आरोपों का जवाब देते हुए जई ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं, किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है। इस बयान से तनाव और बढ़ गया, जिस कारण दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई।
मारपीट और हंगामा
बहस के दौरान ठेकेदारों में से कुछ ने उक्त अधिकारी से मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान प्रक्रिया में अफरातफरी मच गई और वहां उपस्थित अन्य कर्मचारी भी घबरा गए। किसी ने इंजीनियर की शर्ट फाड़ दी और सुरक्षा को लेकर आवाज़ें उठीं। पूरे कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस हस्तक्षेप और कार्यवाही
पुलिस के पहुँचते ही उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की। परंतु मामला इतना गंभीर था कि मौके पर शांति बनाना संभव नहीं था। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने लेकर गई, जहां मामले की जांच व पूछताछ हुई। पुलिस अधिकारियों ने सभी आरोपों को दर्ज किया और कहा कि जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
आरोप और तर्क
ठेकेदारों का मुख्य आरोप थाः
- बीआईपी ड्यूटी में घोटाला
- भुगतान में गड़बड़ी और कटौती
- फाइलें रोककर उल्लंघन
- गुप्त तरीके से काम कराना
वहीं, जई का तर्क था कि ये सारे आरोप निराधार हैं और ठेकेदार अपने स्वार्थ के लिए माहौल खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमों का पूरा पालन हुआ है और कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया गया।
घोटाले के आरोप और जवाब
केवर बोलने पर दो पक्षों के बीच जोरदार बहस छिड़ गई। ठेकेदारों ने खुलकर कहा कि भ्रष्टाचार की शिकायतें वे लगातार उच्च अधिकारियों को भेजते रहे हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान कई भुगतान ऐसे किए गए जिसमें कार्यों की गुणवत्ता और मानक की अनदेखी हुई है। आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ठेकेदारों से मिलकर काम करते हैं और “कमीशन” के लिए फाइलें रोकते या संपादित करते हैं।
ऑफिस की अफरातफरी के कारण नियमित कामकाज भी बाधित हुआ। अन्य कर्मचारी घबराए और कई ने काम रोक दिया। कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मामले की निगरानी में जुट गए हैं और न्यायसंगत जांच का भरोसा दिलाया है।
थाने में प्रक्रिया
पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान लिए, समझौते की कोशिश की लेकिन दोनों से संतुलित कार्रवाई का वादा किया। थाने में भी बहस देर तक चली। पुलिस अधिकारियों ने कहा, कि मामले की गंभीरता के मद्देनज़र आईटी सेक्शन और वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से जांच होगी। जिन्होंने आरोप लगाए हैं उनसे भी सबूत की मांग की गई।
समाज में प्रतिक्रिया
यह घटना समाज में चर्चा का विषय बन गई है। लोग पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहे हैं। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं कर्मचारियों ने भी अफसरों पर समय पर भुगतान व नियमों की मांग दोहराई है।
निष्कर्ष
पीडब्ल्यूडी कार्यालय में ठेकेदारों व अधिकारियों के बीच विवाद ने विभागीय कामकाज को बाधित कर दिया। मारपीट, गाली-गलौज और अफरा-तफरी के माहौल ने दिखाया कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और नियम पालन कितना जरूरी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है, जिससे उम्मीद है कि दोषियों को जल्द दोषी ठहराया जाएगा और विभाग में शांति बहाली संभव होगी