और लगभग 347 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों की जड़ सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को माना जा रहा है। खासतौर पर नई पीढ़ी, यानी जेन-ज़ी (Gen-Z) युवाओं ने इस प्रतिबंध के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और देखते ही देखते आंदोलन ने विकराल रूप ले लिया।
संसद परिसर में घुसे प्रदर्शनकारी
काठमांडू की सड़कों पर हजारों की संख्या में जुटे युवाओं ने संसद परिसर की ओर कूच किया। कई प्रदर्शनकारी संसद भवन की दीवारों को लांघकर अंदर तक घुस गए। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प हुई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि सरकार को सेना की तैनाती करनी पड़ी।
गृह मंत्री का इस्तीफा
हिंसा और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए नेपाल के गृह मंत्री ने देर रात इस्तीफा दे दिया। सरकार ने भी अंततः सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। इसके बाद हालात कुछ हद तक काबू में आए।
युवाओं का गुस्सा – “ऑली के बदले रोजगार”
प्रदर्शनकारी युवाओं ने नारों में साफ कहा कि उन्हें नेताओं के वादे नहीं, बल्कि रोजगार और भविष्य की गारंटी चाहिए। कई युवाओं ने कहा कि सरकार इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाकर उनकी आवाज दबाना चाहती थी, लेकिन अब वे चुप नहीं बैठेंगे। उनका कहना था कि प्रतिबंध हटना ही काफी नहीं है, सरकार को शिक्षा, रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने होंगे।
छात्र-छात्राओं की बड़ी भागीदारी
इस आंदोलन में सबसे ज्यादा संख्या छात्रों और युवा वर्ग की रही। बड़ी संख्या में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी सड़कों पर उतरे। सोशल मीडिया ही उनके संवाद और संगठन का प्रमुख माध्यम था, जिसके बंद होने से गुस्सा और भड़क उठा।
भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट
नेपाल में बिगड़े हालात का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी दिखा। नई दिल्ली से जारी अलर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार से लगे सीमा क्षेत्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भारत की खुफिया एजेंसियां लगातार नेपाल की स्थिति पर नजर रख रही हैं, ताकि हिंसा की चपेट में सीमा क्षेत्र न आए। नेपाल से भारत आने-जाने वाले मार्गों पर सख्त जांच की जा रही है।
नतीजा और वर्तमान स्थिति
लगातार 48 घंटे चले उग्र प्रदर्शनों, पुलिस-प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत और भारी नुकसान के बाद सरकार आखिरकार झुक गई। देर रात सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया गया और गृह मंत्री ने इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि उनका संघर्ष केवल इंटरनेट बहाल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और असमानता के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
👉 कुल मिलाकर, नेपाल में हुए इस बड़े जनआंदोलन ने यह संदेश दिया है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी आज़ादी और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है। सरकार को भी यह समझना होगा कि प्रतिबंध और दमन से युवाओं की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
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