बैंक ऑफ बड़ौदा ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और इसके पूर्व निदेशक अनिल अंबानी के ऋण खातों को ‘धोखाधड़ी’ घोषित किया है. यह कदम भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) द्वारा इसी तरह की घोषणाओं के बाद आया है.
मुख्य बिंदु:
- धोखाधड़ी की घोषणा: बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने दिवालिया हो चुकी आरकॉम और अनिल अंबानी के ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया है.
- ऋणों के दुरुपयोग का आरोप: बीओबी ने यह कार्रवाई एक दशक से भी पहले दिए गए ऋणों के कथित दुरुपयोग के आधार पर की है.
- अन्य बैंकों द्वारा भी कार्रवाई: एसबीआई और बैंक ऑफ इंडिया भी पहले ही अनिल अंबानी और आरकॉम के खातों को ‘धोखाधड़ी’ घोषित कर चुके हैं.
- आरकॉम का स्पष्टीकरण: आरकॉम ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि उसे 2 सितंबर को बीओबी से एक पत्र मिला है, जिसमें कंपनी और उसके प्रवर्तक अनिल अंबानी के ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने की जानकारी दी गई है.
- बकाया राशि और एनपीए: आरकॉम के अनुसार, 28 अगस्त तक 2,462.50 करोड़ रुपये की स्वीकृत ऋण सुविधा में से 1,656.07 करोड़ रुपये बकाया थे. इस खाते को 5 जून, 2017 से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया था.
- कानूनी निहितार्थ: बैंकिंग कानूनों के तहत, एक बार किसी खाते को धोखाधड़ी घोषित कर दिए जाने पर उसे आपराधिक कार्रवाई के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा जाता है, और उधारकर्ता को पांच साल तक नई फंडिंग लेने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है.
- अनिल अंबानी का खंडन: अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे कानूनी सलाह के अनुसार उपलब्ध उपायों का पालन करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अनिल अंबानी कंपनी के दैनिक संचालन या निर्णय लेने में कभी कार्यकारी निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक नहीं रहे.
- चल रही जांचें: यह घटनाक्रम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई द्वारा अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के समूह के खिलाफ चल रही अलग-अलग जांचों के बीच आया है.