कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचा है। सोनिया गांधी का कहना है कि अब लोग इस नुकसान को समझने लगे हैं और उनमें बेचैनी बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बदलने के बाद भी देश की संस्थाओं और व्यवस्थाओं को दोबारा मजबूत बनाने में समय और राजनीतिक दलों के सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी। हालांकि, उन्होंने देश की जनता की समझ और लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा जताते हुए भविष्य को लेकर आशावाद भी व्यक्त किया।
भाजपा सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने अपने हालिया साक्षात्कार में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, इस स्थिति को सुधारने में लंबा समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि लोग अब इस नुकसान को पहचानने लगे हैं और देश में बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी का स्वागत करेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सरकार की नीतियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर भी जताई चिंता
सोनिया गांधी ने चुनावी व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्यधारा के मीडिया पर प्रभाव, आर्थिक संसाधनों और धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। सोनिया गांधी ने यह भी दावा किया कि हाल के महीनों में कई चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल सामने आए हैं और लोग अब इन मुद्दों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।
यह कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप और आकलन हैं। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन दावों की पुष्टि संबंधित तथ्यों, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
कांग्रेस की संभावनाओं को लेकर जताया भरोसा
कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति और भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर सोनिया गांधी ने निराशा जाहिर नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार संघर्ष कर रही है और समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर काम कर रही है।
उनके मुताबिक, पार्टी के कार्यकर्ता और नेता गांवों से लेकर जिलों तक संविधान में निहित मूल्यों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस संगठन की संघर्ष क्षमता और कार्यकर्ताओं के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
BJP और RSS से सीखने के सवाल पर दिया जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और भाजपा-आरएसएस की विचारधारा से कांग्रेस को क्या सीखना चाहिए, इस सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस को आरएसएस से बहुत कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में सफलता हासिल करने के कई रास्ते होते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि को अलग विचारधारा से जुड़ा बताया।
10 नवंबर को लॉन्च होगी सोनिया गांधी की आत्मकथा
सोनिया गांधी का यह साक्षात्कार उनकी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन से पहले सामने आया है। यह पुस्तक 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।
इस आत्मकथा में सोनिया गांधी ने अपने बचपन, परिवार, भारत आने, राजीव गांधी से विवाह,
भारतीय राजनीति में प्रवेश और कांग्रेस के राजनीतिक सफर से जुड़े अनुभवों को शामिल किया है।
पुस्तक में उनके निजी जीवन के साथ-साथ देश की राजनीति के महत्वपूर्ण दौर का भी उल्लेख है।
2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने पर भी रखी बात
साक्षात्कार में सोनिया गांधी से यह भी पूछा गया कि वर्ष 2004 में यदि
उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार किया होता तो कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील
गठबंधन (UPA) सरकार की नीतियां और राजनीतिक रणनीति किस तरह अलग हो सकती थीं।
इस पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने को लेकर उन्होंने कभी
इस तरह नहीं सोचा। उन्होंने उस समय की व्यवस्था को सकारात्मक बताते हुए कहा कि
डॉ. मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे और वह पार्टी तथा गठबंधन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
राजनीतिक बयान के बाद चर्चा में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुद्दे
सोनिया गांधी के बयान के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनाव आयोग की भूमिका,
विपक्ष को मिलने वाले अवसर और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।
कांग्रेस इन विषयों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाती रही है,
जबकि भाजपा और सरकार की नीतियों का आकलन उनके आधिकारिक जवाबों,
उपलब्ध दस्तावेजों और स्वतंत्र तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। सोनिया गांधी के
इस बयान पर भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
निष्कर्ष
सोनिया गांधी ने अपने ताजा बयान में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल, लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी व्यवस्था और
कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं को
नुकसान पहुंचा है, लेकिन साथ ही कांग्रेस के भविष्य और जनता की
भूमिका को लेकर भरोसा जताया है। अब उनकी आत्मकथा के प्रकाशन के साथ
उनके राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़े विचारों पर भी चर्चा तेज होने की संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सोनिया गांधी ने भाजपा सरकार को लेकर क्या कहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है।
2. सोनिया गांधी के अनुसार लोग क्या समझने लगे हैं?
उनका कहना है कि लोग देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को हुए नुकसान को पहचानने लगे हैं।
3. क्या सोनिया गांधी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं?
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंता
जताई तथा विपक्ष को समान अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाया।
4. सोनिया गांधी की आत्मकथा कब प्रकाशित होगी?
‘Belonging: A Journey of Love’ का भारत में प्रकाशन 10 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
5. सोनिया गांधी ने RSS से सीखने के सवाल पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आरएसएस से बहुत कुछ सीखने की जरूरत नहीं है और
राजनीति में सफलता के कई रास्ते होते हैं।
6. क्या सोनिया गांधी के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि हो गई है?
ये उनके राजनीतिक आरोप और विचार हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित संस्थागत रिकॉर्ड,
दस्तावेज और स्वतंत्र जांच को देखना आवश्यक है।
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