नई दिल्ली। धनतेरस के दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए तेजी का माहौल देखने को मिला। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सेंसेक्स ने 80,000 का महत्वपूर्ण स्तर पार कर लिया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 80,500 के ऊपर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,800 के पार कारोबार करता दिखाई दिया। खास बात यह रही कि भारतीय बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई, जब अमेरिका और एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
दोपहर करीब 2:36 बजे सेंसेक्स 1,230.10 अंक यानी 1.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80,540.11 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 करीब 321 अंक चढ़कर 24,857.60 के स्तर पर पहुंच गया। भारतीय बाजार में लगातार सातवें कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही।
धनतेरस पर निवेशकों को मिला तेजी का तोहफा
धनतेरस को परंपरागत रूप से खरीदारी और निवेश के लिए शुभ माना जाता है। इस बार शेयर बाजार में भी तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा। सेंसेक्स का 80,000 के ऊपर पहुंचना बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा।
पिछले कारोबारी सत्र में भी भारतीय बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी। सेंसेक्स 2,008.61 अंक चढ़कर 79,310.01 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 576 अंक की बढ़त के साथ 24,536.60 पर पहुंच गया था।
लगातार कई सत्रों से जारी तेजी के कारण निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम अभी भी बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। 5 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 14,975 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। यह कई वर्षों में उनकी सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी में शामिल रही।
विदेशी निवेशकों की इस खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला। इसके अलावा बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी और दूसरी तिमाही के बेहतर कारोबारी नतीजों ने भी निवेशकों की धारणा को मजबूती दी।
हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी यह संकेत दे रही थी कि बाजार की तेजी सभी कंपनियों में समान रूप से नहीं दिखाई दे रही है।
अमेरिका के शेयर बाजार में भारी गिरावट
जहां भारतीय बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका का नैस्डैक कंपोजिट करीब 5.52 प्रतिशत टूट गया। एसएंडपी 500 में लगभग 4.36 प्रतिशत और डाउ जोंस में करीब 3.44 प्रतिशत की गिरावट आई।
तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने अमेरिकी बाजार पर दबाव बनाया। निवेशकों के बीच बड़ी टेक कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन और AI पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंता देखने को मिली।
इस गिरावट के कारण अमेरिकी बाजार में निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी आई और
वैश्विक बाजारों में भी दबाव बढ़ गया।
जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी बिकवाली
एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली।
जापान का निक्केई सूचकांक कारोबार के दौरान 5 से 6 प्रतिशत तक गिर गया।
दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में भी 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
तेज गिरावट के कारण दक्षिण कोरिया के बाजार में कुछ समय के लिए
कारोबार रोकना पड़ा। तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के
शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया।
इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में तेजी जारी रहना निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
बैंकिंग और बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी
भारतीय बाजार की तेजी में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक
टाइटन और एचडीएफसी बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के तिमाही नतीजों ने भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
कंपनी के समेकित शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
बैंक निफ्टी और वित्तीय सेवा क्षेत्र के शेयरों में भी मजबूती रही। हालांकि मीडिया,
रियल्टी और कुछ अन्य क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी मिली राहत
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय बाजार की
धारणा को बेहतर बनाने में मदद की। भारत अपनी जरूरत का
बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से
देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल के दिनों में 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंची थी।
इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों की चिंताएं कुछ कम हुईं।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।
आगे शेयर बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
शेयर बाजार के जानकारों की नजर अब विदेशी निवेशकों की खरीदारी,
कंपनियों के तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी।
सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी के बावजूद छोटे और मझोले शेयरों में कमजोरी दिखाई दी।
इसलिए निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि
प्रमुख सूचकांकों की बढ़त का मतलब पूरे बाजार में समान तेजी होना नहीं है।
धनतेरस पर सेंसेक्स का 80,500 के पार पहुंचना भारतीय शेयर बाजार के लिए
महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। हालांकि वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और शेयरों के मूल्यांकन से
जुड़ी चिंताओं को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
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