पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के वरिष्ठ कर्मचारी नेता और पूर्व महामंत्री केएल गुप्ता का शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने गोरखपुर के पुर्दिलपुर स्थित अपने आवास पर दोपहर करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले करीब एक साल से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर से पूर्वोत्तर रेलवे सहित रेलवे कर्मचारी संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई है।
केएल गुप्ता ने अपना पूरा जीवन रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए समर्पित किया था। वह लंबे समय तक एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री रहे और लगातार कई दशकों तक संगठन का नेतृत्व किया। वर्ष 2025 में उन्होंने महामंत्री का पद छोड़कर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी।
60 से अधिक बार संभाली महामंत्री की जिम्मेदारी
केएल गुप्ता की पहचान देश के लंबे समय तक कर्मचारी संगठनों का नेतृत्व करने वाले नेताओं में होती थी। उन्होंने कई दशकों तक एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री के रूप में काम किया। अलग-अलग प्रकाशित विवरणों में उनके महामंत्री चुने जाने की संख्या 60 से 65 से अधिक बार तक बताई गई है।
उनके नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों, पेंशन और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे लगातार उठाए जाते रहे। संगठन के भीतर उनकी मजबूत पकड़ और कर्मचारियों के बीच लोकप्रियता के कारण उन्हें बार-बार नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलती रही।
1952 से रेलवे कर्मचारी आंदोलन से जुड़े रहे
केएल गुप्ता का रेलवे कर्मचारी आंदोलन से जुड़ाव पूर्वोत्तर रेलवे के गठन के समय से रहा। 14 अप्रैल 1952 को पूर्वोत्तर रेलवे के गठन के बाद से उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के हितों के लिए संगठनात्मक भूमिका निभाई।
उन्होंने कर्मचारी संगठनों के माध्यम से कर्मचारियों की समस्याओं को रेलवे प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने का काम किया। उनका मानना था कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना जरूरी है।
जयप्रकाश नारायण और जॉर्ज फर्नांडीज के साथ भी किया काम
केएल गुप्ता का सार्वजनिक और सामाजिक जीवन भी काफी लंबा रहा। वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण,
पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि और पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज जैसे प्रमुख नेताओं के संपर्क में रहे थे।
1974 के रेलवे आंदोलन के दौरान भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
आंदोलन के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा और नौकरी से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के हितों के लिए अपना संघर्ष जारी रखा।
कर्मचारियों की समस्याओं को मानते थे अपनी जिम्मेदारी
केएल गुप्ता का कहना था कि रेलवे कर्मचारी ही संगठन की असली ताकत हैं।
वह कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानते थे।
लंबे समय तक संगठन का नेतृत्व करने के बावजूद उनका जुड़ाव रेलकर्मियों से बना रहा।
उनके नेतृत्व में संगठन ने कर्मचारियों की मांगों, पुरानी पेंशन, सेवा संबंधी समस्याओं और
रेलवे के निजीकरण जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई।
रेलवे कर्मचारी संगठनों में शोक की लहर
केएल गुप्ता के निधन पर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन, एनई रेलवे
मजदूर यूनियन और अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने शोक संवेदना व्यक्त की है।
रेलवे कर्मचारियों के बीच उनकी पहचान एक लंबे समय तक संघर्ष करने वाले नेता के रूप में रही।
उनके निधन को रेलवे कर्मचारी आंदोलन के लिए बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
केएल गुप्ता का जीवन रेलवे कर्मचारियों के अधिकारों और संगठनात्मक संघर्ष की लंबी कहानी रहा।
उनके निधन से रेलवे कर्मचारी संगठनों ने अपना एक अनुभवी और वरिष्ठ मार्गदर्शक खो दिया है।
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