दक्षिण कोरिया। सेना के जवानों की ट्रेनिंग में आमतौर पर हथियार चलाना, शारीरिक अभ्यास, युद्ध कौशल और मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की तैयारी शामिल होती है। लेकिन दक्षिण कोरिया की सेना की एक विशेष इकाई में जवानों को फैशन मॉडल की तरह रैंप वॉक करना और कैमरे के सामने पोज देना सिखाया गया। इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने पर सेना ने भी स्वीकार किया कि कार्यक्रम की विषयवस्तु संबंधित यूनिट की जरूरतों के अनुरूप नहीं थी और इसकी पहले से उचित समीक्षा नहीं की गई थी।
29 अक्टूबर को आयोजित हुआ था विशेष कार्यक्रम
यह मामला दक्षिण कोरिया की सेना की स्पेशल वारफेयर कमांड के अंतर्गत आने वाली पहली स्पेशल फोर्सेज ब्रिगेड से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, 29 अक्टूबर को सैन्य परिसर के अंदर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसे ‘के-वॉकिंग परफॉर्मेंस मिलिट्री फेस्टिवल’ नाम दिया गया।
इस कार्यक्रम में महिला मॉडल को बुलाया गया था। उन्होंने सैनिकों को फैशन शो में मॉडल की तरह चलने, मुड़ने और अलग-अलग अंदाज में पोज देने के तरीके बताए। मॉडल सैन्य शैली के कपड़े और ऊंची हील वाली सैंडल पहने हुए थीं।
सैनिकों ने सीखी रैंप वॉक और पोज देने की तकनीक
कार्यक्रम के दौरान मॉडल ने सैनिकों को एक पैर दूसरे पैर के सामने रखकर चलने, चलते समय शरीर को मोड़ने और हाथों की अलग-अलग मुद्राओं में पोज देने का तरीका समझाया।
इसके बाद सैनिकों ने भी इन गतिविधियों का अभ्यास किया। जवान बारी-बारी से आगे आए और फैशन शो के मॉडल की तरह चलकर पोज देने लगे। इस दौरान महिला मॉडल उनकी चाल और पोज को देखकर मार्गदर्शन करती नजर आईं।
कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि विशेष सैन्य अभियानों के लिए प्रशिक्षित सैनिकों को इस तरह की ट्रेनिंग देने का उद्देश्य क्या था।
सोशल मीडिया पर उठे सेना की ट्रेनिंग को लेकर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर सवाल उठाए। आलोचकों का कहना था कि विशेष बलों के जवानों की जिम्मेदारी देश की सुरक्षा, कठिन सैन्य अभियानों और जोखिम भरे मिशनों को अंजाम देना है। ऐसे में फैशन मॉडल की तरह चलने और पोज देने का अभ्यास उनकी सैन्य जरूरतों से कितना जुड़ा है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
दक्षिण कोरिया की पीपुल पावर पार्टी के सांसद पार्क चूंग-क्वोन ने भी कार्यक्रम की आलोचना की।
उन्होंने उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि
ऐसे समय में विशेष बलों के जवानों को मॉडल वॉक सिखाने की जरूरत क्यों पड़ी।
सेना ने पहले बताई थी व्यक्तित्व विकास की वजह
विवाद सामने आने के बाद संबंधित सैन्य इकाई ने कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट किया।
सेना की ओर से बताया गया कि यह सैनिकों के व्यक्तित्व विकास और बेहतर शारीरिक मुद्रा से जुड़ा कार्यक्रम था।
सेना के अनुसार, इस तरह के व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम साल में दो बार आयोजित किए जाते हैं।
इनका उद्देश्य जवानों को सही तरीके से खड़े होने,
चलने और अपने व्यक्तित्व में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
हालांकि, सोशल मीडिया पर उठे सवालों और आलोचनाओं के बाद सेना के एक अधिकारी ने माना कि
कार्यक्रम की योजना बनाते समय उसकी पर्याप्त समीक्षा नहीं की गई थी।
सेना ने मानी गलती, भविष्य में सैनिकों की राय भी लेगी
दक्षिण कोरिया की सेना के अधिकारी ने स्वीकार किया कि कार्यक्रम की विषयवस्तु विशेष बलों की
यूनिट की प्रकृति और वहां तैनात जवानों की जरूरतों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा कि भविष्य में
इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने से पहले सैनिकों की राय ली जाएगी और
प्रशिक्षण की उपयोगिता तथा उपयुक्तता की समीक्षा की जाएगी।
इस घटना के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि सेना में व्यक्तित्व विकास और अन्य
गतिविधियों को किस तरह सैन्य अनुशासन तथा संबंधित यूनिट की जिम्मेदारियों के अनुरूप रखा जाना चाहिए।
फिलहाल इस मामले में सेना की ओर से कार्यक्रम की योजना और भविष्य में सुधार का
आश्वासन दिया गया है। वायरल वीडियो ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि
सैनिकों के व्यक्तित्व विकास के नाम पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की
रूपरेखा तय करते समय उनकी वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
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