भारत-रूस रिश्तों की अहमियत
समाचार के अनुसार, भारत और रूस के संबंध वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए बेहद अहम बताए गए हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर ज़ोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने आपसी हितों और वैश्विक चुनौतियों पर लंबी बातचीत की।
बातचीत के मुख्य बिंदु
- वैश्विक शांति और स्थिरता – मोदी और पुतिन ने माना कि भारत और रूस कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं और उनकी दोस्ती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
- यूक्रेन संकट – प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मानवता की खातिर युद्ध और संघर्ष खत्म होना चाहिए। यह संदेश पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।
- आपसी सहयोग – रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वे भारतीय प्रधानमंत्री के रूस दौरे का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।
मुलाकात की खास तस्वीरें
समाचार में छपी तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनीं –
- एक तस्वीर में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन कार में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं।
- दूसरी तस्वीर में दोनों नेता आपसी बातचीत करते नजर आए।
- तीसरी तस्वीर में पीएम मोदी, पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी नज़र आ रहे हैं।
रूस-भारत की रणनीतिक साझेदारी
- दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में गहरा सहयोग है।
- भारत, रूस से कच्चे तेल और ऊर्जा का बड़ा आयातक है।
- रक्षा क्षेत्र में भी रूस भारत का प्रमुख साझेदार है।
- दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहते हैं।
यूक्रेन संकट और भारत की भूमिका
समाचार में इस बात का भी ज़िक्र है कि यूक्रेन संकट की वजह से पूरी दुनिया महंगाई और अस्थिरता से जूझ रही है। भारत ने हमेशा यह संदेश दिया है कि बातचीत और कूटनीति ही किसी भी युद्ध का समाधान है।
पुतिन के बयान
पुतिन ने कहा कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की पूरी दुनिया में अहमियत है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और रूस मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकाल सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की वापसी
समाचार के अंत में बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी बैठक पूरी करने के बाद भारत लौट आए हैं। उनकी इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के लिहाज़ से ऐतिहासिक बताया गया है।
👉 संक्षेप में, यह खबर भारत और रूस की दोस्ती, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों पर केंद्रित है। इसमें यह संदेश भी दिया गया है कि भारत युद्ध नहीं बल्कि संवाद और सहयोग का पक्षधर है