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जांच न निगरानी…सरकारी अस्पतालों के पास मेडिकल स्टोर पर गैरकानूनी धंधा
क्राइम रिपोर्ट | गोरखपुर
गोरखपुर ज़िले में अस्पतालों के पास मेडिकल स्टोरों की बाढ़ आ चुकी है, लेकिन इनका संचालन कागज़ी कार्रवाई और लाइसेंस की धज्जियां उड़ाकर हो रहा है। यहाँ तक कि कई दुकानें सालों से बगैर लाइसेंस दवाओं का धंधा कर रही हैं।
लाइसेंस फर्जीवाड़ा और अवैध कारोबार
31 अगस्त को खुलासा हुआ कि जिला अस्पताल के ठीक सामने अंकित मेडिकल स्टोर पिछले एक साल से बिना लाइसेंस धंधा चला रहा था। दवा विभाग की टीम ने छापा मारकर दुकान को सील कर दिया। यह धंधा खुलेआम चल रहा था और प्रशासन की आंखों के सामने मरीज़ों की जान से खेला जा रहा था।
सूत्र बताते हैं कि केवल जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर के आसपास भी बड़ी तादाद में मेडिकल स्टोर फर्जी लाइसेंस या बिना लाइसेंस के चालू हैं।
गरीब मरीज़ों की मजबूरी पर वार
यह मेडिकल माफिया न सिर्फ कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं, बल्कि मजबूर मरीज़ों से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। महंगी दवाइयाँ, घटिया क्वालिटी और नकली दवाओं का धंधा चलाकर यह गिरोह रोज़ लाखों रुपये कमा रहा है। जिले में लगभग एक हज़ार मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें बड़ी संख्या अवैध संचालन कर रहे हैं।
चार दुकानों पर ताला, नोटिस जारी
ड्रग विभाग की कार्रवाई में जिला अस्पताल के सामने चार दुकानों पर ताला जड़ दिया गया है। इनमें अंकित मेडिकल स्टोर का लाइसेंस एक साल पहले ही खत्म हो चुका था।
इसके अलावा न्यू किसान मेडिकल स्टोर, विवेक मेडिकल स्टोर और रवि मेडिकल स्टोर को भी नोटिस जारी किया गया है। इन दुकानों का संचालन मानक के अनुसार नहीं पाया गया। सभी को जवाब देने के लिए सोमवार तक का समय दिया गया है।
अधिकारियों का बयान
गोरखपुर मंडल के सहायक आयुक्त (औषधि) का कहना है:
“जिला अस्पताल के पास चार दुकानों को बंद कराया गया है। सभी को नोटिस जारी किया गया है। सोमवार तक पक्ष रखने का मौका दिया गया है। यदि किसी दूसरी जगह से भी शिकायत आती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”
निचोड़
यह मामला साफ बताता है कि मेडिकल माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से बगैर लाइसेंस दवाओं का काला धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। सवाल यह है कि एक साल तक अवैध दुकान बिना रोक-टोक कैसे चलती रही? और गरीब मरीजों की ज़िंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई कब होगी?