पीलीभीत के दोनों हटाए गए एसडीएम की लखनऊ तैनाती रद्द, शासन ने किया प्रतीक्षारत

लखनऊ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव सामने आया है। पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामले में हटाए गए दोनों उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को लखनऊ में दी गई नई तैनाती निरस्त कर दी गई है। शासन ने अब दोनों अधिकारियों को प्रतीक्षारत कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामला मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद दोनों एसडीएम को पीलीभीत से हटाया गया था। इसके बाद उन्हें लखनऊ में तैनाती दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, अब शासन ने उस तैनाती के आदेश को रद्द कर दिया है और दोनों अधिकारियों को फिलहाल नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

क्या है पूरा मामला?

पीलीभीत में मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी। मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसमें नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाता है।

इसी मामले में दोनों एसडीएम को उनके पद से हटाया गया था। बाद में लखनऊ में उनकी तैनाती की गई, लेकिन अब यह आदेश भी निरस्त कर दिया गया है। शासन के नए फैसले के तहत दोनों अधिकारियों को प्रतीक्षारत रखा गया है।

प्रतीक्षारत किए जाने का क्या मतलब है?

प्रशासनिक व्यवस्था में किसी अधिकारी को प्रतीक्षारत रखने का अर्थ है कि उसे फिलहाल कोई नियमित पदस्थापना या नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। वह शासन के अगले आदेश अथवा नई तैनाती की प्रतीक्षा करता है।

ऐसा फैसला प्रशासनिक समीक्षा, विभागीय प्रक्रिया या आगे की कार्रवाई के दौरान लिया जा सकता है। हालांकि, केवल प्रतीक्षारत किए जाने से किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप सिद्ध होना नहीं माना जाता।

दोनों अधिकारियों को मिली थी अलग-अलग जिम्मेदारी

शासन की ओर से पहले जारी तबादला आदेश के तहत दोनों अधिकारियों को लखनऊ में

नई जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में इन नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया।

  • हेमंत कुमार चौधरी: उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में
  • विशेष कार्याधिकारी (OSD) बनाया गया था। अब यह तैनाती रद्द कर उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया है।
  • मयंक गोस्वामी: उन्हें चकबंदी मुख्यालय, लखनऊ में बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) की जिम्मेदारी दी गई थी।
  • उनका आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।

इससे पहले दोनों अधिकारी पीलीभीत में एसडीएम के पद पर तैनात थे और मतदाता सूची से

संबंधित कार्यों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला क्यों बना चर्चा का विषय?

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।

मामले की जांच के बाद दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था। इस प्रकरण में

कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त किए जाने और एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई थी।

मतदाता सूची में नाम, पहचान संख्या और अन्य विवरणों की शुद्धता चुनाव प्रक्रिया के लिए

बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस मामले को गंभीरता से लिया गया और

प्रशासनिक तथा चुनावी स्तर पर कार्रवाई की गई। Pilibhit News+1

तैनाती रद्द होने के बाद प्रशासनिक हलचल

दोनों अधिकारियों को पहले नई जिम्मेदारी दिए जाने और फिर उन आदेशों को निरस्त कर

प्रतीक्षारत किए जाने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल दोनों अधिकारियों को

नई तैनाती नहीं मिली है। आगे शासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी।

यह मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में

जिम्मेदारी तथा निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच और

आरोपों को अंतिम निष्कर्ष से अलग रखकर देखना जरूरी है

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