फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट अमेरिका की संघीय अपीलीय अदालत के एक अहम फैसले से जुड़ी है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि अदालत ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध करार दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति के पास इस तरह का असीमित अधिकार नहीं है और केवल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को ही यह शक्ति है।
पूरी खबर का विस्तृत विवरण :
1. अदालत का फैसला
अमेरिका की संघीय अपीलीय कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि ट्रंप ने टैरिफ लागू करने के लिए जिस कानून का सहारा लिया था, यानी “अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम” (IEEPA), वह उन्हें असीमित शक्तियां प्रदान नहीं करता। इस कानून का प्रयोग करके ट्रंप ने कई वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। अदालत ने इसे गलत माना और स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास इतना अधिकार नहीं है कि वे बिना संसद की अनुमति के इस प्रकार का आर्थिक कदम उठाएं।
2. भारत को राहत की संभावना
ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए इन टैरिफों के चलते भारत सहित कई देशों पर आर्थिक असर पड़ा था। खासकर भारत से अमेरिका को होने वाले स्टील और एल्युमिनियम के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ और रूसी तेल आयात की वजह से भी असर पड़ा। अदालत के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि भारत को इस कानूनी चुनौती से राहत मिल सकती है।
3. अदालत ने क्या कहा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि IEEPA लागू करते समय कांग्रेस का उद्देश्य राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की असीमित शक्तियां देना नहीं था। अदालत ने 7-4 के बहुमत से यह फैसला सुनाया और माना कि ट्रंप प्रशासन ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। अदालत ने यह भी कहा कि केवल अमेरिकी संसद को ही यह शक्ति है कि वह वस्तुओं पर शुल्क लगाने का निर्णय करे।
4. आगे की प्रक्रिया
फिलहाल, यह टैरिफ लागू रहेंगे क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने सर्वोच्च अदालत में अपील करने के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने 14 अक्टूबर तक का समय दिया है। यानी तब तक यह शुल्क यथावत जारी रहेंगे। इसके बाद सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
5. भारत पर असर
अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत पर अमेरिका के टैरिफ 50% तक बढ़ गए हैं। 7 अगस्त से लागू 25% पारस्परिक टैरिफ और 27 अगस्त से लागू अतिरिक्त 25% टैरिफ भारत के निर्यात को प्रभावित कर रहे थे। अदालत का फैसला भारत जैसे देशों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है।
निष्कर्ष :
अमेरिकी अपीलीय अदालत का यह फैसला केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी अहम है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रपति को असीमित शक्तियां नहीं दी जा सकतीं। टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद को है। भारत को इससे भविष्य में आर्थिक राहत मिल सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी सर्वोच्च अदालत पर निर्भर करेग
