ब्रिटिश हुकूमत में बने थे 21 बंगले… जमीनदारी गई तो शुरू हुई टकरार
गोरखपुर से रिपोर्ट – रोहित सिंह
गोरखपुर शहर में नगर निगम की जमीन पर सबसे पहला अधिकार 1864-65 के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने तत्कालीन जमींदारों को दिया था। उस समय यहां कुल 21 बंगले बनवाए गए थे। इन बंगलों को बनाने का खर्च जमींदारों ने उठाया था, लेकिन जमीन सरकार की थी। यही वजह है कि आजादी के बाद से इस जमीन और बंगलों पर लगातार विवाद बना हुआ है।
जमीनदारी हक खत्म, विवाद शुरू
आजादी के बाद जब जमींदारी प्रथा समाप्त हो गई तो जमीन पर जमींदारों का अधिकार भी खत्म हो गया। लेकिन उनकी आने वाली पीढ़ियों ने अपना दावा जारी रखा। इस वजह से यह मामला समय-समय पर अदालत और राजस्व विभाग तक पहुंचता रहा।
राजस्व विभाग के अभिलेखों के मुताबिक, 1864-65 में अंग्रेजों ने “कैसर-ए-हिंद” के तहत सरकारी जमीन पर जमींदारों से बंगले बनवाए थे। शहर में इन 21 बंगलों में से कई तो जर्जर होकर टूट चुके हैं, वहीं कुछ बंगलों पर कब्जे की लड़ाई अभी भी जारी है।
मुनगन बाबू का नाम सबसे आगे
शहर के केन्द्रीय क्षेत्र में स्थित इन बंगलों में से एक पर मुनगन बाबू का परिवार लंबे समय से काबिज है। कहा जाता है कि 1939-40 में मुनगन बाबू ने यहां दुकानें भी बनवा दी थीं। यही कारण है कि आज इस स्थान पर किराए पर दी गई दुकानें और वाणिज्यिक गतिविधियां चल रही हैं। राजस्व विभाग ने इन्हें सरकारी संपत्ति मानते हुए कई बार खाली कराने का प्रयास किया, लेकिन लंबे समय से यह विवादित बना हुआ है।
दुकानों को खाली कराने की तैयारी
राजस्व विभाग ने अब इन दुकानों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की है। जानकारी के मुताबिक, मुनगन बाबू के वारिस समेत कई लोगों ने इस संपत्ति पर दावा किया हुआ है। लेकिन अदालत और राजस्व अभिलेखों में यह भूमि सरकारी दर्ज है।
अब विभाग की ओर से दुकानों को खाली कराने की कार्यवाही तेज कर दी गई है।
99 साल का पट्टा और नए सिरे से विवाद
1973 में इस भूमि पर 99 साल का पट्टा दिया गया था। इसके आधार पर कई लोगों ने यहां व्यापारिक प्रतिष्ठान खोल लिए। लेकिन विभाग का कहना है कि यह पट्टा अवैध है क्योंकि मूल रूप से जमीन सरकारी है और सिर्फ अस्थायी रूप से जमींदारों को उपयोग के लिए दी गई थी।
बंगले बने ‘व्यापारिक अड्डे’
ब्रिटिश हुकूमत के दौर में बने ये बंगले अब बाजार और दुकानों में तब्दील हो गए हैं। कई पर शो-रूम, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। राजस्व विभाग ने साफ किया है कि जो भी लोग इस जमीन पर कब्जा किए हुए हैं, उन्हें खाली करना होगा।
👉 संक्षेप में
- 1864-65 में ब्रिटिश हुकूमत ने गोरखपुर में 21 बंगले बनवाए थे।
- जमींदारों ने इन्हें अपने खर्च से बनवाया था, लेकिन जमीन सरकार की थी।
- आजादी के बाद जमींदारी खत्म हुई तो विवाद शुरू हो गया।
- मुनगन बाबू का परिवार लंबे समय से इस पर काबिज रहा।
- 1939-40 में यहां दुकानें भी बनाई गईं।
- 1973 में 99 साल का पट्टा दिया गया, जो अब विवाद का कारण है।
- राजस्व विभाग ने अब दुकानों को खाली कराने की कार्यवाही शुरू की है
