हमीरपुर, उत्तर प्रदेश। जिले में खनन सत्र शुरू होते ही अवैध खनन को लेकर शिकायतें सामने आने लगी हैं। हमीरपुर के पत्योरा और सरीला क्षेत्रों में भारी पोकलैंड मशीनों से कथित तौर पर रात-दिन खनन किए जाने की शिकायतें हैं। स्थानीय स्तर पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और सूर्यास्त के बाद भी खनन कार्य जारी रहने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायतों के अनुसार, खनन क्षेत्रों में भारी मशीनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर खुदाई की जा रही है। वहीं, निर्धारित नियमों के उल्लंघन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति और संबंधित खनन पट्टों की वैधता की पुष्टि आधिकारिक जांच से ही हो सकेगी।
पत्योरा और सरीला क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें
हमीरपुर जिले के पत्योरा और सरीला क्षेत्रों में खनन गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर भारी पोकलैंड मशीनों की मदद से लगातार खुदाई की जा रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खनन कार्य केवल दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि सूर्यास्त के बाद भी मशीनें चलने की बात कही जा रही है।
यदि निर्धारित समय, पट्टा क्षेत्र या पर्यावरण संबंधी शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
रात में खनन जारी रहने के आरोप
खनन गतिविधियों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण शिकायत यह है कि कुछ स्थानों पर रात के समय भी काम जारी रहता है। खनन की अनुमति, स्वीकृत समय और लागू नियमों के अनुसार ही कार्य किया जाना चाहिए।
रात में खनन होने के आरोपों की जांच के लिए प्रशासन खनन स्थलों का निरीक्षण, मौके की तस्वीरों और वीडियो की पड़ताल तथा संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कर सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि गतिविधियां वैध अनुमति के तहत हो रही हैं या नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण की मांग
खनन क्षेत्रों से निकलने वाले वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री लादे जाने को लेकर भी शिकायतें हैं।
ओवरलोडिंग से सड़कों को नुकसान पहुंचने, दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ने और
यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ऐसे मामलों में खनन विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है।
वाहनों के वजन की जांच, वैध परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन और नियमों का
उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई से समस्या पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
प्रशासन की निगरानी पर उठ रहे सवाल
शिकायतों के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि खनन क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और
ओवरलोडिंग की निगरानी कितनी प्रभावी है। यदि कहीं अवैध खनन या स्वीकृत शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो
संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
इसके लिए खनन पट्टों की सीमाओं, स्वीकृत मात्रा, पर्यावरणीय शर्तों और खनन के समय से
जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति, ठेकेदार या
अधिकारी को अवैध गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
पर्यावरण और स्थानीय लोगों पर पड़ सकता है असर
अनियंत्रित खनन से धूल, शोर, सड़क क्षति और स्थानीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, खनन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को
आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए खनन गतिविधियों की निगरानी केवल राजस्व के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण,
सड़क सुरक्षा और स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखकर भी की जानी चाहिए।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
हमीरपुर के पत्योरा और सरीला क्षेत्रों में अवैध खनन तथा ओवरलोडिंग से जुड़ी
शिकायतों के बाद अब संबंधित विभागों की जांच महत्वपूर्ण है। मौके का निरीक्षण और
आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि किन
स्थानों पर नियमों का पालन हो रहा है और कहां कार्रवाई की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: हमीरपुर में खनन सत्र शुरू होने के साथ पत्योरा और सरीला क्षेत्रों में कथित अवैध खनन,
रात में मशीनें चलने और ओवरलोडिंग की शिकायतें सामने आई हैं। अब प्रशासनिक जांच और
संबंधित विभागों की कार्रवाई से इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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