AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द करने तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को बंद करने की मांग उठाई है। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की जरूरत बताई और कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चयन व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए।
ओवैसी ने यह बयान लखनऊ में दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी AIMIM, INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
CEC की नियुक्ति प्रक्रिया पर ओवैसी ने उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित मौजूदा कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में कार्यपालिका की भूमिका अधिक होने से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
ओवैसी ने मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए। उनके अनुसार, चयन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे चुनाव आयोग के कामकाज और निर्णयों पर जनता का भरोसा बना रहे।
यह ओवैसी का राजनीतिक और नीतिगत मत है। नियुक्ति कानून की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा कानून?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों तथा कार्यकाल से संबंधित कानून वर्ष 2023 में बनाया गया था। इस कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया है।
इससे पहले वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति का प्रावधान किया था, जब तक संसद इस विषय पर कानून नहीं बना देती।
2023 के कानून में चयन समिति की संरचना बदलने को लेकर सवाल उठे हैं। सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजने के मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आई। इसके बाद मामले को उचित संविधान पीठ के गठन पर विचार के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
इसलिए नियुक्ति कानून को लेकर चल रही बहस में संवैधानिक प्रावधानों, संसद के अधिकार और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
SIR प्रक्रिया पर भी जताई आपत्ति
ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस प्रक्रिया को बंद करने की मांग की और दावा किया कि इसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं।
उन्होंने करीब 10 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया। हालांकि, यह आंकड़ा ओवैसी का बयान है;
इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित आधिकारिक आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष और विस्तृत पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की पात्रता,
विवरण और सूची में दर्ज नामों की जांच की जाती है। इसके दौरान नामों को जोड़ने,
हटाने या संशोधित करने की कार्रवाई लागू नियमों के अनुसार की जाती है।
ऐसी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और
अपात्र प्रविष्टियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत सुधारा जा सके। मतदाता अपने नाम की स्थिति की
जांच कर सकते हैं और किसी त्रुटि की स्थिति में संबंधित चुनाव
अधिकारियों के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
INDIA गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहा AIMIM का रुख
मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को लेकर
ओवैसी ने कहा कि विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने
यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है और
इसलिए वह उसके कार्यक्रम पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
इस प्रकार, चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और SIR को लेकर अपनी आपत्तियां जताने के बावजूद
ओवैसी ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन से अपनी राजनीतिक दूरी स्पष्ट रखी।
CJI से मुलाकात और शक्तियों के बंटवारे पर क्या बोले ओवैसी?
भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने की विपक्षी दलों की पहल के संदर्भ में ओवैसी ने
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सवाल किया कि सांसद होने के नाते विपक्षी प्रतिनिधि मुख्य न्यायाधीश से किस आधार पर मुलाकात करेंगे,
जबकि उनकी शिकायत सरकार और प्रधानमंत्री से जुड़ी है। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि
संवैधानिक संस्थाओं के बीच निर्धारित सीमाओं और जिम्मेदारियों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा और
संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिक वैधता लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख विषय हैं।
मतदाताओं के लिए SIR क्यों महत्वपूर्ण है?
मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी
पात्र नागरिक का नाम सूची से छूटने पर उसे मतदान में परेशानी हो सकती है। वहीं, गलत या दोहराई गई
प्रविष्टियों को हटाना भी मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक है।
मतदाताओं को चाहिए कि वे अपने नाम और विवरण की स्थिति आधिकारिक
चुनाव आयोग के माध्यम से जांचें। यदि नाम गायब है या विवरण में गलती है, तो
संबंधित चुनाव अधिकारी से संपर्क करके निर्धारित आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
निष्कर्ष: असदुद्दीन ओवैसी ने CEC नियुक्ति कानून को रद्द करने और SIR प्रक्रिया
बंद करने की मांग उठाकर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा मतदाता सूची के
पुनरीक्षण पर बहस को फिर सामने ला दिया है। नियुक्ति कानून की संवैधानिक
वैधता पर न्यायिक प्रक्रिया और SIR से जुड़े दावों पर आधिकारिक आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे।
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