परिचय
गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र में चार्जर का ऑर्डर रद्द कराने के नाम पर साइबर ठग ने एक व्यक्ति से ओटीपी हासिल कर उसके बैंक खाते से 87,057 रुपये निकाल लिए। शिकायत मिलने के बाद साइबर हेल्प डेस्क ने तेजी दिखाते हुए रकम होल्ड कराई और न्यायालय के आदेश के बाद पूरी राशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।
मुख्य खबर
गोरखपुर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें चार्जर का ऑर्डर रद्द कराने के नाम पर एक व्यक्ति को झांसे में लेकर उसके बैंक खाते से 87,057 रुपये निकाल लिए गए। घटना के बाद पीड़ित ने तत्काल साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई। खोराबार थाना पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम को संबंधित खाते में होल्ड कराया। इसके बाद न्यायालय के आदेश के तहत आवश्यक बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराकर पूरी रकम पीड़ित को वापस करा दी गई।
चार्जर ऑर्डर रद्द कराने का बनाया बहाना
पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने एक एप के माध्यम से चार्जर का ऑर्डर किया था। ऑर्डर के बाद उसके पास एक अज्ञात व्यक्ति ने वाट्सऐप के माध्यम से कॉल किया। कॉल करने वाले ने खुद को ऑर्डर से संबंधित व्यक्ति बताते हुए कहा कि पीड़ित का गलत ऑर्डर पैक हो गया है और उसे रद्द कराने के लिए ओटीपी की आवश्यकता होगी।
चार्जर ऑर्डर रद्द कराने के नाम पर साइबर ठगी,
पीड़ित ने कॉल करने वाले की बात पर विश्वास कर लिया और उसके द्वारा मांगा गया ओटीपी साझा कर दिया। ओटीपी मिलते ही साइबर ठग ने पीड़ित के बैंक खाते से 87,057 रुपये निकाल लिए। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित को साइबर ठगी का पता चला।
शिकायत के बाद पुलिस ने रकम कराई होल्ड
ठगी की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या 33101260006568 के आधार पर खोराबार थाने की साइबर हेल्प डेस्क ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने संबंधित बैंकिंग चैनल से संपर्क कर ठगी की रकम को होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू की।
खोराबार पुलिस ने साइबर ठगी के 87,057 रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराए
पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने में मदद मिली। इसके बाद संबंधित बैंक से आवश्यक पत्राचार किया गया। न्यायालय के आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रकम वापसी की कार्रवाई पूरी की गई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 87,057 रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दी गई।
ओटीपी साझा करना पड़ सकता है भारी
साइबर ठगी के इस मामले से एक बार फिर स्पष्ट होता है कि ऑनलाइन खरीदारी, ऑर्डर रद्द कराने, रिफंड दिलाने या बैंकिंग प्रक्रिया के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति से प्राप्त फोन कॉल पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। ऑनलाइन खरीदारी या डिजिटल भुगतान से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में ओटीपी जैसी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं बतानी चाहिए।
साइबर ठग अक्सर लोगों को अलग-अलग बहाने बनाकर बातचीत में उलझाते हैं।
कभी ऑर्डर रद्द कराने, कभी रिफंड दिलाने तो कभी खाते को सुरक्षित करने के नाम पर ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर सावधानी बरतना जरूरी है।
पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
खोराबार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते, एटीएम, कार्ड, यूपीआई या ओटीपी से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ऑर्डर रद्द कराने या पैसे वापस करने के नाम पर ओटीपी मांगता है।
पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
पुलिस ने यह भी कहा कि साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने और वापस कराने की संभावना बढ़ सकती है।
इस मामले में भी शिकायत के बाद त्वरित कार्रवाई से पूरी रकम पीड़ित को वापस मिल सकी।
हेडलाइन
चार्जर ऑर्डर रद्द कराने के नाम पर ठगी
साइबर हेल्प डेस्क की कार्रवाई से वापस मिली रकम
ओटीपी शेयर करने से बचें, पुलिस ने किया सतर्क
Facts/Details

खोराबार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी न दें।
ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल शिकायत करें।
समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को होल्ड कराने और वापस कराने में मदद मिल सकती है।
FAQ
Q1. पीड़ित के खाते से कितने रुपये निकाले गए थे?
पीड़ित के खाते से 87,057 रुपये निकाले गए थे।
Q2. ठगी किस बहाने से की गई?
चार्जर का ऑर्डर रद्द कराने के नाम पर ओटीपी मांगा गया था।
Q3. पुलिस ने रकम कैसे वापस कराई?
साइबर हेल्प डेस्क ने रकम होल्ड कराई और न्यायालय के आदेश के बाद बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए पूरी रकम वापस कराई।
Q4. साइबर ठगी होने पर क्या करना चाहिए?
तुरंत साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए और संबंधित बैंक को भी सूचना देनी चाहिए।
गोरखपुर के खोराबार में साइबर ठगी की रकम वापस कराने में पुलिस की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण रही।
यह मामला लोगों को भी चेतावनी देता है।
ओटीपी और बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।