गोरखपुर प्रेस क्लब विवाद के बाद सपा नेतृत्व ने जिला-महानगर समेत सभी संबंधित संगठनात्मक पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से मुक्त किया
गोरखपुर, 4 अक्टूबर 2026।
समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कुर्सी विवाद और उसके बाद सामने आए आरोप-प्रत्यारोप के बीच बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से गोरखपुर की जिला एवं महानगर इकाइयों समेत संबंधित कार्यकारिणियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। पार्टी कार्यालय से जारी पत्र में जिला और महानगर अध्यक्षों सहित विभिन्न पदाधिकारियों एवं सदस्यगण को उनके दायित्व से मुक्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी को लेकर हुआ विवाद
गोरखपुर प्रेस क्लब में शनिवार को समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इस दौरान पूर्व सपा जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी और अंशुमान सिंह के साथ आए लोगों के बीच कहासुनी होने की बात सामने आई।
मामला बढ़ने पर गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गया।
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराया।
नगीना प्रसाद साहनी ने पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनके मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अंशुमान सिंह के साथ आए कुछ लोगों ने कुर्सी को लेकर विवाद किया।
आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
विवाद के बाद संगठन पर हुई कार्रवाई
घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया। पहले अंशुमान सिंह के खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई की खबर सामने आई है।
4 अक्टूबर को जारी कार्यालय-ज्ञाप में गोरखपुर की जिला तथा महानगर इकाइयों की कार्यकारिणियों को भंग करने का फैसला दर्ज किया गया है।पत्र के अनुसार जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष समेत संबंधित कार्यकारिणियों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से मुक्त किया गया है।
कार्यालय-ज्ञाप में गोरखपुर से संबंधित फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों तथा प्रदेश कार्यकारिणी से जुड़े है ।
गोरखपुर के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से मुक्त किए जाने का उल्लेख है।
इसका मतलब है कि पार्टी ने केवल जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि गोरखपुर से जुड़े संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है।
नगीना साहनी ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार विवाद केवल बैठने की जगह तक सीमित नहीं रहा।
धमकी और हथियार दिखाए जाने का भी आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, विवाद से जुड़े दूसरे पक्ष की ओर से घटना को लेकर अलग दावे सामने आए हैं।
ऐसे में पूरे मामले में लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
घटना के बाद प्रेस क्लब में हुए विवाद का वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है।
पुलिस स्तर पर भी मामले को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक फैसला
गोरखपुर में जिला और महानगर संगठन को भंग करने का निर्णय पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जा रहा है। कार्यालय-ज्ञाप में राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति का उल्लेख करते हुए सभी संबंधित पदाधिकारियों और सदस्यों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया है।
अब पार्टी की ओर से गोरखपुर में नई संगठनात्मक व्यवस्था तैयार किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद जिला, महानगर और फ्रंटल संगठनों के कामकाज को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा सकता है।

पार्टी नेतृत्व की कार्रवाई क्या बताती है?
गोरखपुर की जिला और महानगर इकाइयों के साथ संबंधित फ्रंटल संगठनों को भंग करने का निर्णय व्यापक संगठनात्मक कार्रवाई है। हालांकि इस फैसले के कारणों के बारे में कार्यालय-ज्ञाप में विस्तृत घटनाक्रम नहीं दिया गया है। यह कार्रवाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए विवाद के तुरंत बाद सामने आई है, इसलिए दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर चर्चा हो रही है।
FAQ
1. समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में क्या कार्रवाई की? ..जिला और महानगर कार्यकारिणी सहित संबंधित संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग किया गया है।
2. यह फैसला किसकी अनुमति से लिया गया? . जारी कार्यालय-ज्ञाप के अनुसार यह कार्रवाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से की गई है।
3. विवाद किस बात को लेकर हुआ था? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बैठने की व्यवस्था और कुर्सी को लेकर विवाद शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
4. नगीना प्रसाद साहनी ने क्या आरोप लगाए? उन्होंने गाली-गलौज, धमकी और हथियार दिखाए जाने का आरोप लगाया है। ये उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
5. अब आगे क्या होगा? गोरखपुर में पार्टी की नई जिला, महानगर और संबंधित संगठनात्मक व्यवस्थाओं के गठन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
गोरखपुर प्रेस क्लब में हुए विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लिया है।
जिला और महानगर समेत संबंधित कार्यकारिणियों को भंग किए जाने से पार्टी के स्थानीय संगठन में व्यापक बदलाव की स्थिति बन गई है।
अब नई संगठनात्मक व्यवस्था और पार्टी नेतृत्व के अगले निर्णय पर नजर रहेगी।