लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी को NDA के कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। रालोद नेताओं के अनुसार जयंत चौधरी के विदेश से लौटने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अभी 2028 तक है राज्यसभा का कार्यकाल
जयंत चौधरी वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 2028 तक है। वह जून 2022 में समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय सपा और रालोद के बीच गठबंधन था और रालोद के विधायकों की संख्या के बावजूद सपा के कोटे से जयंत चौधरी को उच्च सदन भेजा गया था।
अब रालोद के NDA के साथ राजनीतिक गठबंधन में होने के बीच उन्हें NDA कोटे से फिर राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा चल रही है। इसे लेकर पार्टी के भीतर विचार-विमर्श की बात सामने आई है, लेकिन इसे अभी अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा तेज
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। रालोद नेताओं के बीच यह चर्चा है कि जयंत चौधरी को पहले सपा के कोटे से राज्यसभा भेजे जाने के मुद्दे को चुनाव के दौरान सियासी बहस का हिस्सा बनाया जा सकता है।
इसी पृष्ठभूमि में NDA के कोटे से जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने की संभावना पर चर्चा हो रही है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी संभावित राजनीतिक रणनीति के अंतिम स्वरूप के लिए संबंधित दलों की आधिकारिक घोषणा जरूरी होगी।
NDA में 2024 से रालोद की साझेदारी
रालोद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA में शामिल हुआ था। इसके बाद केंद्र की सरकार में जयंत चौधरी को मंत्री की जिम्मेदारी मिली। ऐसे में राज्यसभा की सदस्यता को लेकर होने वाली किसी भी राजनीतिक पहल का संबंध मौजूदा गठबंधन व्यवस्था से भी जोड़ा जा रहा है।
रालोद नेताओं का कहना है कि भाजपा के साथ गठबंधन के दौरान राज्यसभा की सीट को लेकर चर्चा हुई थी।
हालांकि, सीट को लेकर किसी अंतिम फैसले की पुष्टि पार्टी की औपचारिक घोषणा के बाद ही होगी।
16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों पर चुनाव प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी होगी। राज्यसभा चुनाव को
लेकर अलग-अलग दल अपने उम्मीदवारों और रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।
इस चुनाव के कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
रालोद के पास विधानसभा में अपने विधायक हैं और वह NDA गठबंधन का हिस्सा है।
अंतिम फैसला आने के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल जयंत चौधरी को NDA कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा राजनीतिक स्तर पर है।
रालोद के वरिष्ठ नेताओं की ओर से अंतिम निर्णय को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।
जयंत चौधरी के लौटने के बाद इस मुद्दे पर फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
यदि ऐसा निर्णय लिया जाता है तो इससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले NDA और
रालोद के बीच राजनीतिक समन्वय से जुड़े समीकरणों पर भी चर्चा बढ़ सकती है।
फिलहाल महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि जयंत चौधरी को NDA कोटे से राज्यसभा
भेजने की संभावना पर चर्चा चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।
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