देश से विदा हुआ दक्षिण-पश्चिम मानसून, 12.6% कम बारिश; 2001 के बाद चौथा सबसे सूखा मानसून

भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन समाप्त हो गया है। जून से सितंबर के बीच देशभर में इस बार सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, चार महीनों में देश में कुल करीब 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 868.6 मिलीमीटर है।

इस बारिश के साथ 2026 का मानसून वर्ष 2001 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसूनी सीजन भी रहा।

2026 में मानसून ने कितना बरसाया?

IMD के अनुसार जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। सामान्य अवधि में इसी दौरान करीब 868.6 मिमी बारिश होती है। इस तरह सामान्य औसत की तुलना में बारिश में लगभग 109 मिमी की कमी रही।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के मॉनसून ऑनलाइन आंकड़ों में भी 30 सितंबर तक वास्तविक बारिश करीब 759.5 मिमी और सामान्य बारिश 868.6 मिमी दर्ज की गई है, जिसमें कमी 12.56 फीसदी बताई गई है।

जून और जुलाई में बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता

इस मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून और जुलाई के शुरुआती हिस्से में बारिश सामान्य से काफी नीचे रही। जुलाई के मध्य तक एक सप्ताह में बारिश की कमी 51 फीसदी से ज्यादा तक पहुंच गई थी।

इसके बाद जुलाई के अंतिम हिस्से और अगस्त की शुरुआत में बारिश में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन यह सुधार लंबे समय तक कायम नहीं रहा। अगस्त के बाद फिर कई क्षेत्रों में बारिश की कमी बढ़ी और मानसून सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

किन इलाकों में बारिश की कमी ज्यादा रही?

2026 के मानसून में बारिश का वितरण पूरे देश में समान नहीं रहा। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से करीब 25 फीसदी कम, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में करीब 24 फीसदी कम और उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 6 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई।

मध्य भारत में स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य रही और वहां बारिश में करीब 2 फीसदी की कमी रही। कुछ राज्यों और क्षेत्रों में लगातार चारों मानसूनी महीनों में बारिश सामान्य से कम रही।

कई राज्यों में बारिश की कमी का असर

मानसून के दौरान पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय जैसे क्षेत्रों में लगातार बारिश की कमी दर्ज की गई। बिहार, पंजाब, मराठवाड़ा, केरल और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश रही।

IMD के अनुसार देश की करीब 42 फीसदी जमीन को कवर करने वाले 17 मौसम विज्ञान उपखंडों में बारिश कम रही, जबकि 18 उपखंडों में बारिश सामान्य श्रेणी में रही।

मानसून खत्म, लेकिन मौसम का असर अभी जारी

दक्षिण-पश्चिम मानसून का मुख्य सीजन समाप्त होने के बाद भी देश के कई हिस्सों में मौसम की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। IMD ने अक्टूबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है, हालांकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना भी है।

अल नीनो का भी दिखा प्रभाव

2026 के मानसून पर अल नीनो परिस्थितियों का भी प्रभाव रहा। मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो नवंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसके बाद कमजोर होने की संभावना है।

कम बारिश और अपेक्षाकृत अधिक तापमान का असर मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है

इसका प्रभाव विशेष रूप से उन कृषि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकता है

जहां खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है।

सितंबर में भी तापमान रहा ज्यादा

मानसून के अंतिम महीने सितंबर में भी देश में तापमान सामान्य से अधिक रहा।

उपलब्ध मौसम आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 का औसत

अधिकतम तापमान 1901 के बाद इस महीने के सबसे ऊंचे स्तरों में रहा।

इससे बारिश की कमी के साथ गर्मी और मिट्टी में नमी की स्थिति

किसानों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।

अक्टूबर में कैसी रहेगी बारिश?

IMD के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में

बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय

भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

इसका मतलब यह है कि मानसून सीजन खत्म होने के बावजूद देश के

कई हिस्सों में बारिश का वितरण असमान रह सकता है।

2026 मानसून की बड़ी बातें

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 का सीजन समाप्त हो गया।
  • जून से सितंबर के बीच करीब 759.4 मिमी बारिश हुई।
  • सामान्य बारिश करीब 868.6 मिमी थी।
  • बारिश सामान्य से 12.6 फीसदी कम रही।
  • 2001 के बाद यह चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा।
  • 2015 के बाद यह सबसे कमजोर मानसून सीजन रहा।
  • कई राज्यों में चारों महीनों के दौरान बारिश सामान्य से कम रही।
  • अक्टूबर में भी देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।
  • अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में मौसम को प्रभावित कर सकती है।

FAQ

2026 में भारत में कितनी मानसूनी बारिश हुई?

जून से सितंबर 2026 के बीच देश में करीब 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

सामान्य से कितनी कम बारिश हुई?

इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 12.6 फीसदी कम रही।

2001 के बाद 2026 का मानसून कितना कमजोर रहा?

2026 का मानसून 2001 के बाद चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा।

सामान्य मानसूनी बारिश कितनी मानी जाती है?

जून-सितंबर के लिए इस साल इस्तेमाल किए गए दीर्घकालिक औसत के अनुसार सामान्य बारिश करीब 868.6 मिमी है।

क्या अक्टूबर में भी बारिश कम होगी?

IMD के मौजूदा अनुमान के मुताबिक अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है,

जबकि कुछ उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है।

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