अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जांच एजेंसी की चार्जशीट में आठ लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है, जबकि पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बल्कि गवाह के रूप में शामिल किया गया है। इसी बीच चंपत राय समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अलग से मुकदमा दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत का रुख किया गया है।
चौथी शिकायत के बाद फिर उठा मामला
अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में चढ़ावे की रकम से जुड़े मामले को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अब अधिवक्ता संघ की ओर से 19 सितंबर को अदालत में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद मामले ने फिर तूल पकड़ा है।
अदालत ने संबंधित थाना पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है। यह प्रक्रिया अभी न्यायिक विचाराधीन है, इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
चार्जशीट में आठ आरोपी
पुलिस की जांच के बाद दाखिल चार्जशीट में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और बरामद रकम जैसे साक्ष्यों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में मुख्य आरोपी को कई बार चढ़ावे की रकम हटाते या छिपाते हुए देखा गया। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और कथित तौर पर चोरी की गई रकम की भी पड़ताल की।
चंपत राय को बनाया गया गवाह
मामले की जांच से सामने आई चार्जशीट के अनुसार चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। इन लोगों को जांच में गवाह के तौर पर शामिल किया गया है।
चार्जशीट के अनुसार 4 जून को चढ़ावे की रकम से जुड़ी चोरी की जानकारी चंपत राय तक पहुंची थी। उन्हें घटना से संबंधित वीडियो भी भेजे गए थे। इसके बाद 5 जून को अयोध्या पहुंचने पर उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने की बात चार्जशीट में दर्ज है।
एफआईआर और जांच की टाइमलाइन
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार घटनाक्रम जून 2026 में सामने आया था। 3 जून को कथित चोरी पकड़े जाने और अगले दिन नकदी बरामद होने के बाद मामला आगे बढ़ा।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया। SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को दी और 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज हुई।
2.25 लाख रुपये की बरामदगी का जिक्र
चार्जशीट में 4 जून की घटना का भी उल्लेख है। पुलिस के मुताबिक उस दिन कथित तौर पर
2.25 लाख रुपये बाथरूम में छिपाए गए थे, जिन्हें तलाशी के दौरान बरामद किया गया।
जांच के अनुसार इस घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य बाद में जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।
79 लाख से ज्यादा रकम बरामद होने की जानकारी
पुलिस की चार्जशीट से संबंधित रिपोर्टों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से करीब
79.85 लाख रुपये बरामद किए गए। वहीं आठ आरोपियों के बैंक खातों में लगभग 98.30 लाख रुपये जमा होने की
जानकारी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
इन रकमों का अंतिम कानूनी निर्धारण अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
चंपत राय की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
चंपत राय का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि चार्जशीट के अनुसार उन्हें
4 जून को घटना की जानकारी मिली थी और
अगले दिन उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाए गए थे। इसके बावजूद
वह इस मामले में आरोपी नहीं बनाए गए और गवाह के रूप में दर्ज हुए।
इसी बिंदु को लेकर कुछ शिकायतकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता
जयराम रमेश ने भी जांच के दायरे और प्रमुख ट्रस्ट पदाधिकारियों को गवाह बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
अदालत में अब 5 अक्टूबर को सुनवाई
चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्णमोहन के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग से
संबंधित प्रार्थना पत्र पर अब अदालत में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस शिकायत पर
पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाता है या नहीं।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी नजर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लेकिन इससे जुड़े
अन्य शिकायतों और अदालत में चल रही कार्यवाही के कारण मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
एक तरफ पुलिस की जांच में आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है,
दूसरी तरफ कुछ पक्ष जांच के दायरे को और विस्तृत करने की मांग कर रहे हैं।
अब आगे की स्थिति अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ है।
पुलिस ने आठ लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि चंपत राय और
कुछ अन्य प्रमुख नामों को गवाह के रूप में शामिल किया गया है।
अब अलग से FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत में सुनवाई होनी है। 5 अक्टूबर 2026 की अगली सुनवाई
इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी को
अंतिम रूप से तय मानना उचित नहीं है, क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
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