नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर पहुंचने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स 1,124 अंक टूटकर 72,771.72 पर और निफ्टी 50 करीब 1.6% गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारतीय बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है। 28 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बनी दबाव की वजहअमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी से वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम वाली परिसंपत्तियों को लेकर सतर्कता बढ़ी है। 29 सितंबर को अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 5.27% के 19 साल के उच्च स्तर तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
ऊंची यील्ड से उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक बाजारों का कमजोर संकेत
अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा है।
वैश्विक निवेशक इस समय तेल की कीमतों,
महंगाई, ब्याज दरों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से जुड़े जोखिमों पर नजर बनाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमत पर है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी।
28 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब ₹5,353 करोड़ की बिकवाली की,
जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी करीब ₹5,189 करोड़ रही।
निष्कर्ष
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के पीछे किसी एक घरेलू कारण के बजाय वैश्विक बाजारों की कमजोरी, महंगा कच्चा तेल और बढ़ती बॉन्ड यील्ड जैसे कई कारक काम कर रहे हैं।माहौल में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया से जुड़ी घटनाओं पर काफी हद तक निर्भर रह सकती है।