कुशीनगर एयरपोर्ट से सूर्यकिरण टीम की उड़ान, नौ Hawk विमान दिखाएंगे आसमान में रोमांच

भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम एक बार फिर अपने शानदार हवाई प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है। टीम के नौ Hawk Mk-132 विमान कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को बेस बनाकर बिहार के मोतिहारी के लिए उड़ान भरने की तैयारी में हैं। निर्धारित परिस्थितियां अनुकूल रहने पर आसमान में सटीक फॉर्मेशन और रोमांचक एरोबेटिक करतब देखने को मिलेंगे।

नौ विमानों की एक साथ उड़ान बनेगी आकर्षण

सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के प्रदर्शन में नौ Hawk Mk-132 विमान हिस्सा लेते हैं। करीब 600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरते हुए ये विमान लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और अन्य जटिल एरोबेटिक मैन्युवर का प्रदर्शन कर सकते हैं।

टीम की खासियत बेहद कम दूरी पर विमानों की सटीक फॉर्मेशन उड़ान है। कई जटिल करतबों के दौरान विमानों के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम रह सकती है। ऐसे प्रदर्शन के लिए पायलटों के बीच गति, दिशा और ऊंचाई का बेहद सटीक तालमेल जरूरी होता है।

आसमान में नजर आएगा तिरंगे का रंग

एयर शो के दौरान Hawk विमानों से केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुआं-धाराएं निकलने का दृश्य भी खास आकर्षण रहेगा। रंगीन स्मोक पॉड्स की मदद से आसमान में तिरंगे का स्वरूप बनाया जाता है।

इस रंगीन स्मोक प्रणाली को भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो द्वारा विकसित किया गया है।

मौसम पर टिकी प्रदर्शन की स्थिति

एरोबेटिक प्रदर्शन में मौसम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। खराब दृश्यता, बारिश या तेज हवा जैसी परिस्थितियों में विमान संचालन सुरक्षा कारणों से प्रभावित हो सकता है।

मोतिहारी में बारिश के कारण कार्यक्रम को लेकर पहले भी मौसम संबंधी अनिश्चितता सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम की तारीख में बदलाव और वैकल्पिक व्यवस्था पर चर्चा हुई थी, लेकिन अंतिम कार्यक्रम को आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही माना जाना चाहिए।

1996 में हुई थी सूर्यकिरण टीम की स्थापना

सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी। भारतीय वायुसेना के अनुसार, टीम भारत और विदेशों में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टीम ने कई एयर शो में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व किया है।

सूर्यकिरण टीम को भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता, अनुशासन, सटीकता और टीमवर्क को प्रदर्शित करने वाली एरोबेटिक टीम के रूप में जाना जाता है। इसके प्रदर्शन युवाओं को सशस्त्र बलों में करियर के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बनते हैं।

युवाओं के लिए खास आकर्षण

कुशीनगर एयरपोर्ट से सूर्यकिरण टीम की गतिविधि पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के लिए भी खास आकर्षण का विषय है। नौ विमानों की फॉर्मेशन उड़ान और जटिल हवाई करतब लोगों को भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण और पेशेवर कार्यशैली को करीब से समझने का अवसर देते हैं।

सूर्यकिरण एयर शो से जुड़े मुख्य तथ्य

  • बेस एयरपोर्ट: कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
  • एरोबेटिक विमान: Hawk Mk-132
  • प्रदर्शन में विमान: 9
  • प्रमुख करतब: लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और अन्य मैन्युवर
  • अधिकतम बताई गई गति: करीब 600 किमी प्रति घंटा
  • खास आकर्षण: तिरंगे के रंगों वाला स्मोक ट्रेल
  • सूर्यकिरण टीम की स्थापना: 1996
  • अब तक प्रदर्शन: 800 से अधिक

FAQ

सूर्यकिरण टीम कुशीनगर एयरपोर्ट से क्यों उड़ान भर रही है?

कुशीनगर एयरपोर्ट को मोतिहारी में प्रस्तावित हवाई प्रदर्शन के लिए बेस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सूर्यकिरण टीम में कितने विमान प्रदर्शन करते हैं?

एरोबेटिक प्रदर्शन में नौ Hawk Mk-132 विमानों का इस्तेमाल किया जाता है।

सूर्यकिरण टीम की स्थापना कब हुई थी?

सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी।

क्या एयर शो मौसम से प्रभावित हो सकता है?

हां। एरोबेटिक उड़ानों के लिए दृश्यता, हवा और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।

खराब मौसम में कार्यक्रम को स्थगित या पुनर्निर्धारित किया जा सकता है।

सूर्यकिरण टीम के विमान कौन से हैं?

टीम के एरोबेटिक प्रदर्शन में Hawk Mk-132 विमान इस्तेमाल किए जाते हैं।

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