लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 25 सितंबर 2026
परिचय
लखनऊ में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की गतिविधियां तेज हैं। पार्टी ने 25 सितंबर को देशभर में चुनाव आयोग के कार्यालयों तक प्रदर्शन और मार्च का आह्वान किया है।
मुख्य खबर
मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार, 25 सितंबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है। पार्टी की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को राज्य स्तर पर चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े कांग्रेस के सवाल हैं।
लखनऊ में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के आसपास प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं के जुटने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। वहीं, राजधानी में चुनाव आयोग से जुड़े कार्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, दावों-आपत्तियों तथा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को भी अपने विरोध अभियान का हिस्सा बनाया है। इन मामलों में कांग्रेस की ओर से स्वतंत्र जांच और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है।
लखनऊ में प्रदर्शन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय के बाहर भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां सामने आई हैं। 25 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यालय के बाहर एक विवादित होर्डिंग भी चर्चा में रही, जिसमें कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखी टिप्पणी की। यह टिप्पणी संबंधित नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखी जा रही है, न कि निर्वाचन आयोग की ओर से स्थापित तथ्य के रूप में।
उत्तर प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से संबंधित चुनावी प्रक्रियाओं का संचालन करता है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उसका कार्यालय 32, स्टेशन रोड, लखनऊ में स्थित है।
मतदाता सूची और SIR को लेकर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में नामों के जुड़ने और हटने की प्रक्रिया है। पार्टी नेताओं ने SIR से संबंधित प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और शिकायतों के निपटारे की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से जवाब मांगने की बात भी सामने आई है।
वहीं, भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सितंबर 2026 में ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं तथा सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त हैं।
कांग्रेस ने 25 सितंबर के राज्य स्तरीय प्रदर्शनों के बाद 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी विरोध मार्च आयोजित करने की घोषणा की है।
इसके तहत जिला कांग्रेस कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के निर्देश दिए गए हैं।
Facts/Details
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल हैं।
कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्य स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है।
उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का कार्यालय 32, स्टेशन रोड, लखनऊ में है।
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं।
कांग्रेस ने 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन का कार्यक्रम बताया है।
विस्तार
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर पारदर्शी तरीके से जवाब मिलना चाहिए।
पार्टी ने SIR और मतदाता सूची में बदलाव से संबंधित मामलों की जांच की मांग उठाई है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं और मतदाता सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है।
FAQ
Q1. लखनऊ में कांग्रेस का प्रदर्शन किस मुद्दे पर है?
मतदाता सूची, SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
Q2. प्रदर्शन कब आयोजित किया गया है?
कांग्रेस ने 25 सितंबर 2026 को राज्य स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है।
Q3. उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का कार्यालय कहां है?
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार कार्यालय 32, स्टेशन रोड, लखनऊ में है।
Q4. SIR क्या है?
SIR का अर्थ Special Intensive Revision यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है।
Q5. क्या आगे भी प्रदर्शन होगा?
कांग्रेस ने 28 सितंबर को जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट तक मार्च का कार्यक्रम भी बताया है।
लखनऊ में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गतिविधि बन गया है।
आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस आगे बढ़ सकती है।