शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में साइबर अपराधियों ने सेवानिवृत्त चीनी मिल महाप्रबंधक को निशाना बनाकर 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोप है कि ठगों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताते हुए पीड़ित को गिरफ्तारी वारंट और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले का डर दिखाया। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी लेकर अलग-अलग खातों से रकम ट्रांसफर करा ली गई। पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
व्हाट्सऐप कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक शाहजहांपुर के सदर बाजार क्षेत्र निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त जीएम को 17 सितंबर को व्हाट्सऐप कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल एक आतंकी ने बैंक खाता खोलने के लिए किया है।
कॉलर ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उस खाते में लाखों रुपये की संदिग्ध रकम भेजी गई है। जब पीड़ित ने आधार कार्ड किसी को देने से इनकार किया तो उसे गिरफ्तारी वारंट का भय दिखाया गया।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर बनाया दबाव
शिकायत के अनुसार ठगों ने पीड़ित को लगातार फोन पर संपर्क में रखा और बैंक खातों की जांच के नाम पर अलग-अलग जानकारी हासिल की। इस दौरान उन्हें ऐसा माहौल दिया गया, जिससे उन्हें लगा कि वह किसी गंभीर कानूनी कार्रवाई में फंस गए हैं।
इसी डर का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने बैंक खातों से रकम निकालने या ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया। पुलिस के मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी की शैली से जुड़ा है।
तीन बैंक खातों से निकाली गई रकम
पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार 19 सितंबर को पीड़ित के एक एसबीआई खाते से 12 लाख रुपये निकाले गए। इसके बाद 21 सितंबर को एसबीआई के दूसरे खाते से 6.50 लाख रुपये और आईसीआईसीआई बैंक के खाते से 3.50 लाख रुपये की रकम चली गई।
इस तरह कुल 22 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई। इतना ही नहीं, ठग इसके बाद भी पीड़ित से अतिरिक्त 14 लाख रुपये की मांग कर रहे थे।
साइबर पुलिस ने 10.88 लाख रुपये होल्ड कराए
मामले की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई और रकम वापस कराने की मांग की। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों और वित्तीय संस्थानों से संपर्क कर रकम को ट्रेस करने की कार्रवाई शुरू की।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान दो बैंक खातों में मौजूद कुल 10.88 लाख रुपये होल्ड करा लिए गए हैं। शेष रकम की बरामदगी और ठगी में इस्तेमाल किए गए अन्य खातों की जांच जारी है।
जिस नंबर से कॉल आई, उसकी भी जांच
पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। जांच अधिकारी ठगी में
इस्तेमाल मोबाइल नंबर, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी के
पीछे कौन लोग हैं और रकम किन खातों में पहुंची।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस,
जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर
व्यक्ति को डराते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल पर लगातार जुड़े रहने,
किसी से बात न करने और घर से बाहर न निकलने जैसे निर्देश दिए जाते हैं।
इसके बाद आरोपी कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर बैंक खाते की जानकारी,
ओटीपी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव डालते हैं।
सरकारी जांच एजेंसी की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए
किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। साइबर ठगी होने पर 1930 पर तुरंत शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
शाहजहांपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई,
ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें।
अगर कोई व्यक्ति गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या पैसे मांगता है तो
बातचीत जारी रखने के बजाय कॉल काटकर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।
निष्कर्ष
शाहजहांपुर में सेवानिवृत्त चीनी मिल जीएम से 22 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है।
आरोप है कि ठगों ने आतंकवादी गतिविधियों और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ित को डिजिटल
अरेस्ट जैसा दबाव बनाया और अलग-अलग बैंक खातों से
रकम निकलवा ली। साइबर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और
10.88 लाख रुपये होल्ड कराने में सफलता मिली है।
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