मलीर जेल में सजा पूरी करने के बाद 22 भारतीय मछुआरों की स्वदेश वापसी हुई

परिचय

पाकिस्तान की कराची स्थित मलीर जेल से सजा पूरी करने के बाद 22 भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्हें लाहौर के रास्ते वाघा सीमा तक लाया गया, जहां पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया। इनमें 18 मछुआरे गुजरात और तीन दीव से जुड़े थे।

मुख्य खबर

पाकिस्तान की कराची स्थित मलीर जेल से 22 भारतीय मछुआरों की रिहाई के बाद उनकी स्वदेश वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इन मछुआरों ने पाकिस्तान में अपनी सजा पूरी कर ली थी। इसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया और भारत लौटने के लिए वाघा सीमा तक पहुंचाया गया। 22 फरवरी 2025 को वाघा सीमा पर उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।

रिहा किए गए मछुआरों में 18 गुजरात और तीन केंद्रशासित प्रदेश दीव से थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुजरात के 18 मछुआरों में 15 गिर सोमनाथ और तीन देवभूमि द्वारका जिले से जुड़े थे। इन मछुआरों को पाकिस्तान की समुद्री सीमा में प्रवेश करने के मामलों में हिरासत में लिया गया था।

मलीर जेल से वाघा सीमा तक पहुंचाया गया

मलीर जेल से रिहाई के बाद मछुआरों को लाहौर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद उन्हें वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत भेजा गया। भारत पहुंचने पर आवश्यक आधिकारिक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों में भेजने की प्रक्रिया की गई।

मछुआरों की यात्रा के लिए पाकिस्तान की ईधी फाउंडेशन ने परिवहन की व्यवस्था की थी। संगठन की ओर से उन्हें यात्रा के दौरान भोजन, नकद राशि और जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया। इससे जेल से निकलने के बाद उनके भारत पहुंचने की प्रक्रिया आसान हुई।

समुद्री सीमा पार करने पर हुई थी गिरफ्तारी

भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा पर मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा लंबे समय से सामने आता रहा है। समुद्र में स्पष्ट भौतिक सीमा नहीं होने और छोटे मछली पकड़ने वाले जहाजों में आधुनिक नेविगेशन उपकरणों की कमी के कारण मछुआरे कभी-कभी दूसरे देश के समुद्री क्षेत्र में चले जाते हैं।

ऐसे मामलों में संबंधित देश की समुद्री सुरक्षा एजेंसियां मछुआरों को हिरासत में लेती हैं और कानूनी प्रक्रिया के बाद जेल भेजा जा सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रिहा किए गए 22 मछुआरों ने पाकिस्तान में अपनी सजा पूरी कर ली थी।

परिवारों को मिली राहत

मछुआरों की रिहाई और भारत वापसी की खबर से उनके परिवारों को राहत मिली। लंबे समय तक अपने परिजनों के जेल में रहने के कारण परिवार स्वदेश वापसी का इंतजार कर रहे थे। गुजरात के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह वापसी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।

भारत और पाकिस्तान के बीच कैदियों की सूची का नियमित आदान-प्रदान भी होता है। 1 जनवरी 2025 को साझा की गई सूची के अनुसार पाकिस्तान में 217 भारतीय मछुआरे और कुल 266 भारतीय कैदी थे। भारत की ओर से साझा सूची में 462 पाकिस्तानी कैदियों का उल्लेख था, जिनमें 81 मछुआरे शामिल थे।

मलीर जेल से वाघा सीमा तक पहुंचाया गया

समुद्री सीमा पार करने पर हुई थी गिरफ्तारी

परिवारों को मिली राहत

Facts/Details

पाकिस्तान की कराची स्थित मलीर जेल से 22 भारतीय मछुआरे रिहा किए गए।

सभी ने पाकिस्तान में अपनी सजा पूरी कर ली थी।

इनमें 18 गुजरात और तीन दीव से जुड़े मछुआरे थे।

गुजरात के 18 मछुआरों में 15 गिर सोमनाथ और तीन देवभूमि द्वारका से थे।

रिहाई के बाद मछुआरों को कराची से लाहौर और फिर वाघा सीमा तक लाया गया।

22 फरवरी 2025 को उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया।

समुद्री सीमा पार करने के मामलों में उन्हें पाकिस्तान में हिरासत में लिया गया था।

ईधी फाउंडेशन ने उनके लाहौर तक परिवहन की व्यवस्था की थी।

Statement

मलीर जेल के अधिकारियों के अनुसार, 22 भारतीय मछुआरों को सजा पूरी होने के बाद रिहा किया गया।

इसके बाद उनकी भारत वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई। वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों ने उन्हें प्राप्त किया। इस प्रक्रिया में ईधी फाउंडेशन ने परिवहन और अन्य सहायता उपलब्ध कराई।

समुद्री सीमा से जुड़े मामलों में दोनों देशों के मछुआरों की गिरफ्तारी होती रही है।

FAQ

सवाल 1: पाकिस्तान से कितने भारतीय मछुआरे रिहा हुए?

जवाब: पाकिस्तान की मलीर जेल से 22 भारतीय मछुआरों को सजा पूरी होने के बाद रिहा किया गया।

सवाल 2: रिहा हुए मछुआरे किन क्षेत्रों से थे?

जवाब: इनमें 18 गुजरात और तीन केंद्रशासित प्रदेश दीव से जुड़े थे।

सवाल 3: भारतीय मछुआरों को कहां सौंपा गया?

जवाब: उन्हें वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया।

सवाल 4: मछुआरों को पाकिस्तान में क्यों पकड़ा गया था?

जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करने के मामलों में हिरासत में लिया गया था।

सवाल 5: मछुआरों की भारत वापसी में किसने मदद की?

जवाब: ईधी फाउंडेशन ने मछुआरों को लाहौर तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की थी।

पाकिस्तान की मलीर जेल से 22 भारतीय मछुआरों की रिहाई के बाद उन्हें वाघा सीमा के जरिए भारत सौंपा गया।

गुजरात और दीव से जुड़े मछुआरों की वापसी से उनके परिवारों को राहत मिली।

यह मामला समुद्री सीमा से जुड़े मानवीय मुद्दे को भी सामने लाता है।