उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयुष इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन मंगलवार देर रात उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब हजरतगंज स्थित जीपीओ और गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को पुलिस ने वहां से हटाया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया।
आयुष इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें ₹7,500 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जिसे बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किया जाना चाहिए।
गांधी प्रतिमा के सामने जुटे आयुष इंटर्न
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में आयुष इंटर्न डॉक्टर हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के सामने पहुंचे। प्रदर्शन में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा से जुड़े इंटर्न डॉक्टरों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का निर्णय लेने की मांग की। इससे पहले भी लखनऊ में आयुष इंटर्न डॉक्टर अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर चुके हैं।
स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25 हजार करने की मांग
आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों का मुख्य मुद्दा मासिक स्टाइपेंड है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से ₹7,500 प्रतिमाह की राशि मिल रही है और मौजूदा महंगाई को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी जरूरी है।
इंटर्न डॉक्टरों के अनुसार एक साल की इंटर्नशिप के दौरान उन्हें स्टाइपेंड दिया जाता है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किया जाए।
देर रात प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस
मंगलवार रात प्रदर्शन स्थल पर पुलिस पहुंची और डॉक्टरों को वहां से हटाने की कार्रवाई की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया और उन्हें वाहनों में बैठाकर दूसरे स्थान पर ले जाया गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हटाने के दौरान लाठियों का इस्तेमाल किया। वहीं, पुलिस की कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए डॉक्टरों की रिहाई की मांग भी उठाई गई है।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प
प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच नोकझोंक तथा झड़प की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन देर रात पुलिस ने बल प्रयोग करके उन्हें वहां से हटा दिया।
इस कार्रवाई के बाद आयुष इंटर्न डॉक्टरों में नाराजगी की बात सामने आई है।
पहले भी हो चुका है प्रदर्शन
आयुष इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। सितंबर की शुरुआत से ही स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 19 सरकारी कॉलेजों से जुड़े करीब 400 आयुष इंटर्न डॉक्टर पहले हजरतगंज में प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उस दौरान भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी थी।
सरकार से क्या चाहते हैं इंटर्न डॉक्टर?
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है। उनका कहना है कि
वर्तमान राशि उनकी आर्थिक जरूरतों और महंगाई के अनुरूप पर्याप्त नहीं है।
डॉक्टरों की मांगों में प्रमुख रूप से—
- मासिक स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 करना,
- स्टाइपेंड बढ़ोतरी पर जल्द निर्णय,
- प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए डॉक्टरों की रिहाई,
- पुलिस कार्रवाई की समीक्षा,
- आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर शासन स्तर पर वार्ता
शामिल हैं।
आंदोलन का स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर
आयुष इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर कुछ सरकारी आयुष चिकित्सा
संस्थानों की सेवाओं पर भी पड़ा है। इससे पहले गोमतीनगर स्थित
राजकीय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के कारण
ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने और बड़ी संख्या में मरीजों के वापस लौटने की रिपोर्ट सामने आई थी।
ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर मरीजों को होने वाली परेशानी और
स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
अब आगे क्या?
लखनऊ में देर रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद आयुष इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर
आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण होगा। प्रदर्शनकारी स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के साथ
हिरासत में लिए गए साथियों की रिहाई और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठा रहे हैं।
सरकार और आयुष विभाग की ओर से मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है,
इस पर आंदोलन की दिशा निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
लखनऊ में आयुष इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है।
डॉक्टर ₹7,500 के मौजूदा मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर
₹25,000 करने की मांग कर रहे हैं। हजरतगंज के जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा के
पास प्रदर्शन के दौरान देर रात पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और कई को हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया है। मामले में आगे प्रशासन की प्रतिक्रिया और
आंदोलनकारियों की मांगों पर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी।
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