Ghaziabad Swiggy Fraud: दो रेस्टोरेंट संचालकों पर 22.68 लाख की संदिग्ध धोखाधड़ी का केस, ऐसे सामने आया मामला

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े कथित फर्जी लेनदेन का मामला सामने आने के बाद गाजियाबाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो रेस्टोरेंट संचालकों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। शिकायत में करीब 22.68 लाख रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है।

मामला प्लेटफॉर्म की आंतरिक जांच के बाद सामने आया। शिकायत के मुताबिक कुछ रेस्टोरेंट से ऐसे ऑर्डर किए गए जिनका पैटर्न सामान्य ग्राहकों के ऑर्डर से काफी अलग था। पुलिस अब ऑर्डर, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

कैसे सामने आया कथित फर्जी ऑर्डर का मामला?

शिकायत के अनुसार, जांच के दौरान दो रेस्टोरेंट से जुड़े लेनदेन में असामान्य गतिविधियां दिखाई दीं। इनमें बड़ी रकम वाले ऑर्डर, बेहद कम समय में ऑर्डर पूरा होना और कुछ ग्राहक खातों के बीच समान डिजिटल पहचान जैसे संकेत शामिल थे।

पुलिस के पास दर्ज शिकायत के मुताबिक एक रेस्टोरेंट से सितंबर 2025 से 26 मार्च 2026 के बीच करीब 19.38 लाख रुपये के 85 ऑर्डर सामने आए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ऑर्डरों की थी जिनकी रकम सामान्य फूड ऑर्डर की तुलना में काफी अधिक थी।

76 मिनट की डिलीवरी कुछ मिनटों में पूरी होने का दावा

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक डिलीवरी टाइम को लेकर सामने आया है। शिकायत में कहा गया है कि जिन ऑर्डरों के लिए लगभग 76 मिनट का डिलीवरी समय निर्धारित था, उनमें से कई को केवल पांच से छह मिनट में पूरा दिखाया गया।

इसके अलावा इन ऑर्डरों में अंतिम डिलीवरी दूरी भी कई मामलों में 500 मीटर से कम बताई गई। पुलिस इन गतिविधियों के पीछे वास्तविक प्रक्रिया क्या थी, इसकी जांच कर रही है।

52 क्रेडिट कार्ड के दोबारा इस्तेमाल का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कम से कम 52 अलग-अलग क्रेडिट कार्ड का दोबारा इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले। इसके अलावा कई ग्राहक खातों में समान डिवाइस आइडेंटिफायर मिलने की बात भी जांच में सामने आई है।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित लेनदेन किस तरह संचालित किए जा रहे थे और अलग-अलग ग्राहक खातों का आपस में क्या संबंध था।

रेस्टोरेंट के पते को लेकर भी सामने आई जानकारी

शिकायत के मुताबिक एक रेस्टोरेंट के लिए दर्ज पता वैषाली सेक्टर-3 की एक दुकान का था। जांच के दौरान वहां अलग कारोबार संचालित मिला।

पुलिस अब रेस्टोरेंट संचालकों, संबंधित पते, ग्राहक खातों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसी पते का संबंध पहले दूसरे रेस्टोरेंट से भी होने की बात शिकायत में कही गई है।

पहले भी एक रेस्टोरेंट पर हुई थी कार्रवाई

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि संबंधित गतिविधियों के संदेह में

दूसरे रेस्टोरेंट को पहले ही प्लेटफॉर्म से निष्क्रिय किया जा चुका था।

इसके बाद सामने आए नए लेनदेन और पैटर्न की जांच की गई। आंतरिक जांच के आधार पर

साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की गई और 18 सितंबर को मामला दर्ज कराया गया।

खुद के रेस्टोरेंट पर ऑर्डर करने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रेस्टोरेंट से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर

कई ग्राहक खाते बनाए या उन्हें नियंत्रित किया और उन्हीं खातों से अपने रेस्टोरेंट के लिए ऑर्डर किए।

इन ऑर्डरों में संदिग्ध या चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड की जानकारी इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप है।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

साइबर क्राइम पुलिस खंगाल रही डिजिटल रिकॉर्ड

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने जांच के कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इनमें ग्राहक खातों की जानकारी,

ऑर्डर हिस्ट्री, डिवाइस आइडेंटिफायर, क्रेडिट कार्ड लेनदेन और डिलीवरी रिकॉर्ड शामिल हैं।

जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित गतिविधियों में

कौन-कौन लोग शामिल थे और लेनदेन के पीछे वास्तविक तरीका क्या था।

22.68 लाख रुपये का मामला, जांच के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर

मामले में करीब 22.68 लाख रुपये की संदिग्ध धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है। हालांकि शिकायत में बताए गए

अलग-अलग लेनदेन और रकम की अंतिम कानूनी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

फिलहाल आरोपों को जांच के निष्कर्ष से पहले अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

निष्कर्ष

गाजियाबाद में ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़े कथित फर्जी ऑर्डर और

संदिग्ध क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल का मामला साइबर क्राइम पुलिस तक पहुंचा है।

दो रेस्टोरेंट संचालकों और अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

शिकायत में लाखों रुपये के असामान्य लेनदेन, कम समय में पूरी

दिखाई गई डिलीवरी और कई क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल का उल्लेख है।

अब पुलिस डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के जरिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में जुटी है।

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