देश में केवट समाज के लिए रेजीमेंट की मांग को लेकर फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने आवाज उठाई है। उन्होंने सेतु निगम, सिंचाई विभाग, NDRF और नेवी सहित नदी व जल सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में केवट समाज की सहभागिता और रोजगार के अवसर देने की मांग रखी।
गोरखपुर। देश में केवट समाज के लिए अलग रेजीमेंट और विभिन्न सुरक्षा एवं नदी से जुड़े विभागों में प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि केवट समाज का पारंपरिक जीवन नदी और जल संसाधनों से जुड़ा रहा है। ऐसे में नदी से संबंधित कार्यों और सुरक्षा सेवाओं में इस समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।
चंद्रभान निषाद के अनुसार, जब नदियों पर पुल और सेतु का निर्माण होता है तो पारंपरिक रूप से नाव चलाकर आजीविका कमाने वाले परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है। ऐसे परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के लिए सेतु निगम में परिवार के सदस्यों को नौकरी देने की व्यवस्था किए जाने की मांग उन्होंने रखी।
नदी आधारित परिवारों को रोजगार और सहभागिता की मांग
फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने कहा कि केवट समाज का जीवन लंबे समय से नदियों के आसपास केंद्रित रहा है। नाव चलाना, तैरना और नदी से जुड़े कार्य इस समुदाय की पारंपरिक गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं। उनका कहना है कि इस अनुभव को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने सिंचाई विभाग में भी केवट समाज की सहभागिता की मांग रखी। उनके मुताबिक नदी, जलधाराओं और जल संसाधनों से जुड़े कामों में स्थानीय स्तर पर नदी की जानकारी रखने वाले समुदायों की भागीदारी उपयोगी हो सकती है।
NDRF और नेवी में प्रतिनिधित्व की मांग
चंद्रभान निषाद ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और नेवी जैसी सेवाओं में भी केवट समाज के युवाओं को अवसर दिए जाने की मांग उठाई। उनका तर्क है कि नदी और जल क्षेत्र से परिचित समुदाय के युवाओं को तैराकी तथा जल परिस्थितियों का पारंपरिक अनुभव बचपन से प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि कई केवट परिवारों के बच्चे नदी के आसपास ही बड़े होते हैं और नदी उनके लिए केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन और पारंपरिक गतिविधियों का हिस्सा भी है। इसी आधार पर उन्होंने जल सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में
समुदाय के युवाओं को प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही।
पारंपरिक कौशल को रोजगार से जोड़ने पर जोर
फिशरमैन चंद्रभान निषाद का कहना है कि जिन कार्यों के लिए अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है,
उन कार्यों से संबंधित पारंपरिक अनुभव केवट समाज में पहले से मौजूद है।
उन्होंने इस पारंपरिक कौशल को औपचारिक प्रशिक्षण,
प्रमाणन और सरकारी रोजगार के अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
उनकी मांग में सेतु निगम, सिंचाई विभाग, NDRF और नेवी सहित नदी एवं
जल सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में केवट समाज की सहभागिता प्रमुख रूप से शामिल है।
उनका कहना है कि इससे नदी आधारित परिवारों के सामने आने वाली रोजगार
संबंधी चुनौतियों को कम करने और युवाओं को नए अवसर देने में मदद मिल सकती है।
केवट रेजीमेंट की मांग क्यों उठाई गई?
केवट रेजीमेंट की मांग को समुदाय के पारंपरिक नदी ज्ञान, तैराकी और जल क्षेत्र से जुड़े
अनुभव से जोड़कर रखा गया है। चंद्रभान निषाद ने कहा कि केवट समाज के युवाओं को उनकी
पारंपरिक दक्षताओं के आधार पर सुरक्षा सेवाओं में अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय की भागीदारी केवल एक क्षेत्र तक सीमित न होकर उन सभी
सरकारी विभागों और सेवाओं में होनी चाहिए, जहां नदी, जल, नाव, बचाव और जल सुरक्षा से संबंधित कार्य होते हैं।
रोजगार और प्रतिनिधित्व का मुद्दा सामने
फिशरमैन चंद्रभान निषाद की यह मांग केवट समाज के रोजगार, प्रतिनिधित्व और
पारंपरिक कौशल को संस्थागत अवसरों से जोड़ने के मुद्दे को सामने रखती है। केवट रेजीमेंट के गठन और
विभिन्न सरकारी सेवाओं में विशेष सहभागिता की मांग पर आगे क्या पहल होती है,
यह संबंधित सरकारों और विभागों के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
read this post:यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: ATS सेंटर, तीन बस अड्डे और अग्निवीरों को आरक्षण