पेपर लीक रोकने के लिए MMMUT की नई तैयारी, AI बनाएगा प्रश्नपत्र; 5000 सेट के बैंक से होगा परीक्षा का पेपर तैयार

परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर रोक लगाने के लिए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) एक नई तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय अब प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उनकी प्रिंटिंग और पैकिंग तक की प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और प्रश्नपत्र की गोपनीयता को अधिक मजबूत बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम और निर्धारित कठिनाई स्तर के अनुरूप प्रश्नों का एक बड़ा डेटाबैंक तैयार किया जाएगा। इसी बैंक से AI तकनीक परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करेगी।

विश्वविद्यालय की योजना के अनुसार इस सिस्टम में अधिकतम 5,000 प्रश्नपत्र सेट का बैंक तैयार किया जा सकेगा। परीक्षा के लिए कितने प्रश्नपत्र तैयार करने हैं, इसका कमांड दिए जाने के बाद AI निर्धारित पैटर्न के आधार पर प्रश्नों का चयन कर सेट तैयार करेगा। इसके बाद प्रिंटिंग और पैकिंग की प्रक्रिया भी तकनीकी प्रणाली के माध्यम से संचालित किए जाने की तैयारी है।

पेपर लीक रोकने के लिए बदलेगी प्रश्नपत्र तैयार करने की व्यवस्था

वर्तमान व्यवस्था में शिक्षकों से प्रश्नपत्र के कई सेट तैयार करवाए जाते हैं। इसके बाद उनमें से किसी एक सेट को परीक्षा के लिए चुना जाता है। ऐसी प्रक्रिया में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर अंतिम चयन तक कई स्तरों पर मानव हस्तक्षेप होता है।

नई व्यवस्था में इसी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और गोपनीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षकों से प्रत्येक विषय और सेमेस्टर के लिए प्रश्नों का डेटा बैंक तैयार कराया जाएगा। इस डेटाबैंक में पाठ्यक्रम के अलग-अलग हिस्सों से संबंधित प्रश्नों को शामिल किया जाएगा।

AI इसी बैंक से प्रश्नों का चयन करते समय विषय के पाठ्यक्रम, प्रश्नों की कठिनाई और निर्धारित परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखेगी। इससे हर परीक्षा में एक ही प्रकार के प्रश्न दोहराए जाने की संभावना भी कम हो सकती है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रश्नपत्र का अंतिम सेट किस तरह तैयार होगा, इसकी जानकारी परीक्षा से पहले सीमित रहेगी। इससे प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

5000 सेट का बनेगा प्रश्नपत्र बैंक, AI करेगा प्रश्नों का चयन

MMMUT की प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक बड़ा प्रश्नपत्र बैंक है। इसमें अधिकतम 5,000 सेट तक तैयार रखने की योजना है।

इस बैंक में अलग-अलग विषयों, पाठ्यक्रम के हिस्सों और कठिनाई स्तर के अनुरूप प्रश्नों को व्यवस्थित किया जाएगा। परीक्षा के समय AI सिस्टम को आवश्यक प्रश्नपत्रों की संख्या और निर्धारित मानकों की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद सिस्टम उपलब्ध प्रश्नों में से उपयुक्त प्रश्नों का चयन करके प्रश्नपत्र तैयार करेगा।

इस व्यवस्था का एक संभावित लाभ यह होगा कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से किसी व्यक्ति द्वारा निर्धारित एक ही सेट पर निर्भर नहीं रहेगा। अलग-अलग प्रश्नों के विशाल डेटाबैंक से चयन होने के कारण परीक्षा के प्रश्नों का अनुमान लगाना भी कठिन हो सकता है।

इसके अलावा प्रश्नों की कठिनाई का संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की जाएगी। इससे किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र बहुत आसान या बहुत कठिन होने की शिकायतों को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, AI आधारित व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रश्न बैंक की गुणवत्ता कैसी है, उसमें प्रश्नों की पर्याप्त विविधता है या नहीं और सिस्टम की सुरक्षा कितनी मजबूत रखी जाती है।

प्रिंटिंग और पैकिंग में भी AI की भूमिका, CCTV से होगी निगरानी

प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण उसकी प्रिंटिंग और पैकिंग का होता है। इसी स्तर पर भी गोपनीयता बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल की योजना है।

प्रस्तावित सिस्टम में AI द्वारा तैयार प्रश्नपत्र को प्रिंट करने और पैक करने की प्रक्रिया भी स्वचालित तरीके से कराने की तैयारी है। विश्वविद्यालय के अनुसार पूरी प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा।

इसके साथ ही जिस स्थान पर प्रश्नपत्र तैयार, प्रिंट और पैक किए जाएंगे, वहां CCTV निगरानी की व्यवस्था भी रखी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के बीच अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच न हो।

तैयार प्रश्नपत्रों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखने की भी योजना है। परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे लंबे समय तक प्रश्नपत्रों के खुले या किसी व्यक्ति के पास रहने की संभावना कम हो सकती है।

अगले सत्र से लागू करने की तैयारी

विश्वविद्यालय प्रशासन इस AI आधारित परीक्षा व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए तकनीक विकसित करने वाली एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा के अनुसार परीक्षा प्रणाली में नए प्रयोग के जरिए प्रश्नपत्र की गोपनीयता को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्र का पैकेट खुलने तक यह जानकारी सीमित रहेगी कि AI ने प्रश्नों का कौन सा संयोजन तैयार किया है।

यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब विभिन्न प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।

विश्वविद्यालय का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जाए।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

यदि यह व्यवस्था निर्धारित योजना के अनुसार लागू होती है तो छात्रों के लिए परीक्षा का

मूल स्वरूप नहीं बदलेगा, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करने की अंदरूनी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आएगा।

छात्रों को परीक्षा की तारीख, पाठ्यक्रम और अन्य नियमों के अनुसार तैयारी करनी होगी।

अंतर यह होगा कि प्रश्नपत्र का चयन पारंपरिक तरीके के बजाय AI आधारित प्रणाली से किया जाएगा।

इससे छात्रों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि प्रश्नपत्र का पैटर्न

अधिक संतुलित और पाठ्यक्रम के अनुरूप रखने की कोशिश की जाएगी। साथ ही

प्रश्नों का बड़ा बैंक होने से परीक्षा में प्रश्नों की विविधता बढ़ सकती है।

हालांकि, AI कोई जादुई समाधान नहीं है। प्रश्न बैंक में गलत या कमजोर प्रश्न होने पर

तकनीक भी उसी सामग्री से प्रश्न तैयार करेगी। इसलिए प्रश्नों की

गुणवत्ता की विशेषज्ञों द्वारा जांच और सिस्टम की नियमित समीक्षा जरूरी होगी।

परीक्षा व्यवस्था में तकनीक बढ़ने से क्या होंगे फायदे?

AI आधारित प्रश्नपत्र प्रणाली के कई संभावित फायदे हो सकते हैं। सबसे पहला फायदा प्रश्नपत्र की

गोपनीयता से जुड़ा है। यदि प्रश्नपत्र तैयार करने और पैकिंग की प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप कम होता है तो

अनधिकृत तरीके से प्रश्नपत्र तक पहुंचने का जोखिम घटाया जा सकता है।

दूसरा फायदा प्रश्नपत्र के स्तर को संतुलित करने में मिल सकता है।

AI को पहले से तय मानकों के आधार पर प्रश्न चुनने के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।

तीसरा फायदा प्रश्नों की विविधता बढ़ाने में हो सकता है। हजारों प्रश्नों के डेटाबैंक से

अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग संयोजन तैयार किए जा सकते हैं।

चौथा फायदा रिकॉर्ड और निगरानी से जुड़ा है। डिजिटल सिस्टम में प्रश्नपत्र निर्माण की

प्रक्रिया का लॉग रखा जा सकता है, जिससे बाद में किसी गड़बड़ी की स्थिति में जांच करना आसान हो सकता है।

लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। प्रश्न बैंक और AI सिस्टम में मौजूद

डेटा को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे। किसी भी डिजिटल सिस्टम में साइबर हमले,

अनधिकृत पहुंच या डेटा चोरी की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पेपर लीक पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा प्रयोग

MMMUT का यह प्रयोग उच्च शिक्षा संस्थानों में परीक्षा प्रक्रिया को तकनीक से

जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। पेपर लीक की

समस्या केवल प्रश्नपत्र तैयार करने तक सीमित नहीं होती। इसमें प्रश्न बैंक,

प्रिंटिंग, पैकिंग, भंडारण, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने जैसे कई चरण शामिल होते हैं।

नई व्यवस्था में इनमें से महत्वपूर्ण चरणों को एक सुरक्षित डिजिटल और

निगरानी आधारित प्रणाली से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इसे लागू करने के बाद ही स्पष्ट होगी।

नियमित ऑडिट, साइबर सुरक्षा, प्रश्नों की विशेषज्ञ

समीक्षा और आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था इसके लिए जरूरी होगी।

अगर सभी सुरक्षा उपाय प्रभावी तरीके से लागू किए जाते हैं तो AI आधारित

प्रश्नपत्र प्रणाली परीक्षा की गोपनीयता बढ़ाने और पेपर लीक की आशंका कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

FAQ: MMMUT AI परीक्षा प्रणाली

Q1. MMMUT परीक्षा प्रणाली में AI का इस्तेमाल क्यों करेगा?
प्रश्नपत्रों की गोपनीयता मजबूत करने और पेपर लीक की संभावना को कम करने के लिए

AI आधारित व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

Q2. AI कितने प्रश्नपत्र सेट का बैंक तैयार करेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था में अधिकतम 5,000 प्रश्नपत्र सेट का बैंक तैयार रखने की योजना है।

Q3. क्या AI प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग भी करेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था में प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ उसकी प्रिंटिंग और

पैकिंग की प्रक्रिया को भी स्वचालित करने की योजना है।

Q4. प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे कहां रखा जाएगा?
तैयार प्रश्नपत्रों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखने और परीक्षा शुरू होने से

लगभग एक घंटे पहले उपलब्ध कराने की योजना है।

Q5. क्या पूरी प्रक्रिया में इंसानों की भूमिका खत्म हो जाएगी?
विश्वविद्यालय का लक्ष्य मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करना है। हालांकि प्रश्न बैंक तैयार करने,

उसकी गुणवत्ता जांचने और पूरी व्यवस्था की निगरानी में विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

निष्कर्ष

गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

परीक्षा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता मजबूत करने के लिए

AI आधारित नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित सिस्टम में हजारों प्रश्नों का

बैंक तैयार होगा और AI निर्धारित पाठ्यक्रम व कठिनाई स्तर के आधार पर प्रश्नपत्र तैयार करेगी।

इसके बाद प्रिंटिंग और पैकिंग की प्रक्रिया को भी अधिक स्वचालित बनाने की योजना है।

CCTV निगरानी, स्ट्रांग रूम में सुरक्षित भंडारण और परीक्षा से करीब एक घंटे पहले

प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने जैसे कदमों के साथ यह व्यवस्था पेपर लीक की आशंका को कम करने का प्रयास है। हालांकि

अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक, साइबर

सुरक्षा और मानवीय निगरानी के बीच कितना मजबूत संतुलन बनाया जाता है।

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