गोरखपुर। स्वच्छता पखवाड़े के तहत गोला तहसील क्षेत्र स्थित पीएम श्री विद्यालय सेमरी में गुरुवार को “स्वच्छता सहभागिता दिवस” मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रचनात्मक गतिविधियों और जागरूकता आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल का संदेश दिया।
इस दौरान “कचरा नहीं, संसाधन है” विषय को केंद्र में रखकर बच्चों ने अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों में बताया कि घर और विद्यालय से निकलने वाली कई वस्तुओं को अनुपयोगी मानकर तत्काल कूड़ेदान में डालने की जरूरत नहीं होती। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यही सामग्री दोबारा उपयोग में लाई जा सकती है अथवा उसका पुनर्चक्रण किया जा सकता है।
कागज से बोतल तक, बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं की बताई उपयोगिता
विद्यार्थियों ने कागज, कार्डबोर्ड, प्लास्टिक की बोतल, डिब्बे और अन्य घरेलू सामग्रियों का उदाहरण देते हुए बताया कि थोड़ी रचनात्मकता और समझदारी से इनका उपयोग नए रूप में किया जा सकता है। बच्चों ने “कबाड़ से जुगाड़” की अवधारणा के जरिए यह समझाने का प्रयास किया कि हर फेंकी गई वस्तु वास्तव में बेकार नहीं होती।
उनका संदेश था कि किसी वस्तु को इस्तेमाल के बाद फेंकने से पहले यह देखना चाहिए कि उसका दोबारा उपयोग संभव है या नहीं। इससे एक ओर कचरे की मात्रा कम होगी, वहीं दूसरी ओर नए संसाधनों की खपत पर भी अंकुश लगाया जा सकता है।
स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में केवल साफ-सफाई का संदेश ही नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों की बचत को भी प्रमुखता दी गई। बच्चों ने बताया कि कचरे का सही प्रबंधन आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को भी कम करने में मदद करता है।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि स्वच्छता केवल सड़क, विद्यालय या घर की सफाई तक सीमित विषय नहीं है। यह रोजमर्रा की आदतों में बदलाव और जिम्मेदार व्यवहार से जुड़ा व्यापक अभियान है।
बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना जरूरी: मनोज कुमार मिश्र
विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि
विद्यार्थियों में स्वच्छता की समझ विकसित करना केवल विद्यालय परिसर को साफ रखने का उद्देश्य नहीं है।
इसके जरिए बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने और प्रकृति एवं
पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बचपन में विकसित की गई अच्छी आदतें आगे चलकर
व्यक्ति के व्यवहार का हिस्सा बनती हैं। यदि विद्यार्थी कचरे को अलग करने,
पुनः उपयोग योग्य सामग्री को सुरक्षित रखने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की
आदत अपनाते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवार और समाज तक पहुंच सकता है।
‘कबाड़ से जुगाड़’ से बच्चों ने दिखाई रचनात्मक सोच
कार्यक्रम में विद्यार्थियों का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला। उन्होंने अपनी बात को केवल
भाषण तक सीमित न रखते हुए रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के उदाहरणों के जरिए समझाया।
इससे रीयूज और रीसाइक्लिंग जैसे विषय बच्चों के लिए सहज और व्यावहारिक तरीके से सामने आए।
विद्यालय की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने में बच्चों की
भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब विद्यार्थी स्वयं किसी गतिविधि के माध्यम से सीखते हैं,
तो उसके संदेश को घर और समुदाय तक पहुंचाने की संभावना भी बढ़ जाती है।
स्वच्छता की सीख विद्यालय से समाज तक पहुंचाने की पहल
पीएम श्री विद्यालय सेमरी में आयोजित यह आयोजन विद्यार्थियों को स्वच्छता और पर्यावरण के
प्रति जागरूक करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया। बच्चों ने अपनी रचनात्मक सोच के
माध्यम से यह समझाया कि कचरे को समस्या मानने के बजाय उसके
उचित प्रबंधन और पुनः उपयोग की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
“कचरा नहीं, संसाधन है” का संदेश विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से
विद्यालय परिसर से निकलकर परिवार और समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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