लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हथकरघा और वस्त्रोद्योग को नई ऊंचाई देने की दिशा में मंगलवार को UP TEX-2026 की शुरुआत हुई। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय टेक्सटाइल कॉन्क्लेव का उद्घाटन मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने किया। यह आयोजन 8 और 9 सितंबर को हो रहा है, जिसमें टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े कारोबारी, निवेशक, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।
इस सम्मेलन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और परिधान निर्माण केंद्रों में शामिल करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाना है। कार्यक्रम में निवेश, आधुनिक तकनीक, तकनीकी वस्त्र, उत्पादन, निर्यात, कौशल विकास और रोजगार जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।
टेक्सटाइल सेक्टर में यूपी की बड़ी क्षमता: सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास टेक्सटाइल उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए विरासत, हुनर, मानव संसाधन और बड़ा घरेलू बाजार मौजूद है। उन्होंने प्रदेश के बनारसी रेशम, कानपुर के औद्योगिक इतिहास और अन्य क्षेत्रों की वस्त्र परंपरा को राज्य की ताकत बताया।
सीएम के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 5 लाख बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं और देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने टेक्सटाइल उद्योग को कृषि के बाद बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था को बड़े लक्ष्य तक पहुंचाने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इसके लिए प्रदेश में फाइबर से लेकर तैयार उत्पाद और फिर वैश्विक बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
17 टेक्सटाइल उत्पादों को मिला GI टैग
UP TEX-2026 में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक वस्त्र विरासत को भी प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इन उत्पादों से बड़ी संख्या में महिलाएं और कारीगर जुड़े हुए हैं।
इसका उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। इसके लिए डिजाइन, तकनीक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
निवेश और नई टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर
UP TEX-2026 को केवल प्रदर्शनी या सम्मेलन के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके जरिए सरकार और उद्योग जगत के बीच निवेश तथा साझेदारी के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस के एजेंडे में मैन्युफैक्चरिंग, तकनीकी वस्त्र, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, टिकाऊ उत्पादन, स्किलिंग और निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। CITI के अनुसार आयोजन का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने के लिए निवेश और कारोबारी साझेदारियों को बढ़ावा देना है।
5,354 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पास
कार्यक्रम में प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे गए। वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान के अनुसार करीब 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के तहत कई पार्क विकसित करने की योजना है। अमरोहा और बरेली समेत पांच स्थानों पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई। सरकार टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग पार्क विकसित करने के साथ-साथ ऐसी मशीनरी के निर्माण को भी बढ़ावा देना चाहती है, जिसके लिए अभी बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भरता है।
157 इकाइयों को 416.75 करोड़ रुपये की मदद
टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की नीतियों के तहत वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2017-18 से अब तक 214 इकाइयों के पक्ष में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए हैं, जबकि 157 इकाइयों को कुल 416.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के
माध्यम से भी बुनकरों को सहायता दी जा रही है। वर्ष 2023-24 से अब तक
4,122 बुनकरों को 73.18 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मिलने की जानकारी दी गई है।
इस सहायता में करघे खरीदने, कार्यशाला बनाने और प्रशिक्षण जैसी जरूरतें शामिल हैं।
10 टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना
उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए
पार्कों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का
लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों में टेक्सटाइल पार्क विकसित कर उत्पादन,
रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को एक साथ बढ़ाना है।
इससे बुनकरों और छोटे कारोबारियों को बड़े उद्योगों से जोड़ने, सप्लाई चेन मजबूत करने और
स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए बेहतर माहौल का दावा
UP TEX-2026 में राज्य में निवेश के माहौल को लेकर भी चर्चा हुई।
सरकार की ओर से कहा गया कि निवेशकों को बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि, नीतिगत प्रोत्साहन और
ऑनलाइन इंसेंटिव वितरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
CITI के मुताबिक सम्मेलन में निवेशकों और उद्योग जगत को उत्तर प्रदेश में
टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र में संभावित अवसरों की जानकारी देने के साथ
नीतिगत प्राथमिकताओं और कारोबारी साझेदारी पर भी चर्चा की जा रही है।
UP TEX-2026 से क्या बदल सकता है?
अगर सम्मेलन में सामने आए निवेश और औद्योगिक प्रस्ताव जमीन पर तेजी से लागू होते हैं, तो
उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इनमें नए कारखानों की स्थापना,
बुनकरों के लिए बाजार का विस्तार, आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल, युवाओं के लिए
कौशल आधारित रोजगार और तैयार कपड़ों के निर्यात में वृद्धि शामिल हो सकती है।
विशेष रूप से पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को आधुनिक डिजाइन और
डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने पर छोटे कारीगरों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
भारत के बड़े टेक्सटाइल लक्ष्य में यूपी की भूमिका
UP TEX-2026 का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत टेक्सटाइल और अपैरल क्षेत्र को
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। CITI ने भारत की टेक्सटाइल और
अपैरल अर्थव्यवस्था के लिए 2030 तक बड़े वैश्विक लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा है कि
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े उत्पादन आधार वाले राज्य की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
कुल मिलाकर, UP TEX-2026 उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र और आधुनिक टेक्सटाइल
मैन्युफैक्चरिंग के बीच एक मजबूत कड़ी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में
इस आयोजन से जुड़े निवेश प्रस्ताव कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं, यही इसकी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना होगा।
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