भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षी व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध उत्पादक क्षेत्र बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं। अमेरिका भारत से 500 बिलियन डॉलर के व्यापार समझौते की मांग कर रहा है, जिसमें कृषि और दुग्ध उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की बात कही गई है। हालांकि, भारत सरकार ने इस मांग पर चिंता जताई है और अपने किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्य मुद्दे:
- कृषि उत्पादों पर टैरिफ: अमेरिका भारत के कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने की मांग कर रहा है, जबकि भारत अपने किसानों को बचाने के लिए आयात पर नियंत्रण रखना चाहता है।
- दुग्ध उत्पादों का आयात: अमेरिका अपने दुग्ध उत्पादों को भारत में बेचना चाहता है, लेकिन भारत की सांस्कृतिक और आहार संबंधी प्राथमिकताएं इसके आड़े आ रही हैं।
- किसानों के हित: भारत सरकार अपने किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात पर नियंत्रण रखना चाहती है।
भारत की चिंताएं:
- छोटे किसानों की सुरक्षा: भारत के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं, जो अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से प्रभावित हो सकते हैं।
- आर्थिक प्रभाव: अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों की आय और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- सांस्कृतिक और आहार संबंधी प्राथमिकताएं: भारत में दुग्ध उत्पादों के आयात पर चिंता है, क्योंकि अमेरिकी दुग्ध उत्पादों में जानवरों के बाईप्रोडक्ट का उपयोग होता है, जो भारतीय आहार और संस्कृति के विपरीत है।
अमेरिका की मांगें:
- कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलना: अमेरिका भारत से अपने कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग कर रहा है, जिसमें मक्का, सोयाबीन, गेहूं और दुग्ध उत्पाद शामिल हैं।
- टैरिफ में रियायत: अमेरिका भारत से अपने उत्पादों पर टैरिफ में रियायत की मांग कर रहा है, जिससे उसके उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकें।¹ ² ³