गोरखपुर। राजघाट स्थित बैकुंठ धाम में रविवार सुबह उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे लोगों के बैठने के लिए बनाए गए चबूतरे की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय छत के नीचे बैठे दो लोग मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों को बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरे घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
करीब 11:45 बजे अचानक गिरी छत
जानकारी के अनुसार घटना रविवार सुबह करीब 11:45 बजे की है। राजघाट बैकुंठ धाम में बने गुंबद के चबूतरे की छत अचानक क्षतिग्रस्त होकर नीचे आ गिरी। उस समय चबूतरे के नीचे दो लोग बैठे हुए थे। अचानक छत गिरने से दोनों मलबे में दब गए।
घटना की सूचना मिलते ही राजघाट थाना प्रभारी गौरव वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद दोनों घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया और तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया।
उपचार के दौरान अधिवक्ता की मौत
हादसे में घायल दोनों लोगों की पहचान आलोक अस्थाना (40) निवासी राप्तीनगर, थाना शाहपुर और संजय सिंह (42) निवासी शक्तिनगर कॉलोनी, थाना शाहपुर के रूप में बताई गई है।
दोनों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान आलोक अस्थाना की मौत हो गई। वहीं संजय सिंह की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
बताया जा रहा है कि मृतक आलोक अस्थाना अधिवक्ता थे। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाते हुए हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
बैकुंठ धाम में छत गिरने से उठे सुरक्षा पर सवाल
बैकुंठ धाम जैसे सार्वजनिक स्थल पर बने बैठने के स्थान की छत अचानक गिरने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर चबूतरे की छत किस वजह से गिरी और क्या उसके निर्माण या रखरखाव में कोई कमी थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रशासन की ओर से भी निर्माण की स्थिति और हादसे के संभावित कारणों की जांच की जा सकती है।
उद्घाटन कार्यक्रम में सांसद रविकिशन के बयान की भी हुई थी चर्चा
गोरखपुर के गुरु गोरक्षनाघाट से जुड़े उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान सांसद रविकिशन शुक्ल का एक बयान भी चर्चा में आया था। कार्यक्रम में उन्होंने पुराने राप्ती घाट की स्थिति का जिक्र करते हुए नए घाट की व्यवस्थाओं और अंतिम संस्कार की आधुनिक सुविधाओं की बात कही थी।
अपने संबोधन में सांसद ने कहा था कि यहां अंतिम संस्कार की व्यवस्था अत्याधुनिक है और इलेक्ट्रिक सिस्टम के कारण अंतिम संस्कार में कम समय लगता है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा था कि यहां अंतिम संस्कार के बाद लोग ‘डायरेक्ट स्वर्ग’ जाएंगे।
हालांकि, रविवार को बैकुंठ धाम में हुई छत गिरने की घटना और सांसद के पूर्व बयान के बीच किसी तरह का संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है। हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही सामने आएगी।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से जानकारी ली। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि छत किस स्थिति में थी और अचानक उसके गिरने की वजह क्या रही। हादसे में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
फिलहाल इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने से बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोगों के बीच भी चिंता का माहौल है।