India Power Crisis: देश में बिजली की मांग बढ़ने के बीच थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक चिंता का कारण बन गया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के मुताबिक 2 सितंबर 2026 तक देश के 50 थर्मल पावर प्लांट में कोयले का भंडार गंभीर रूप से कम पाया गया। इन संयंत्रों में उपलब्ध स्टॉक सामान्य जरूरत के मुकाबले आधे से भी कम स्तर पर पहुंच गया है।
मानसून के दौरान कोयला उत्पादन और उसकी ढुलाई प्रभावित होने के साथ बिजली की मांग में बढ़ोतरी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि सरकार और कोयला कंपनियां आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठा रही हैं।
50 थर्मल पावर प्लांट में कोयला स्टॉक गंभीर
देश की बिजली व्यवस्था में थर्मल पावर प्लांट की भूमिका अभी भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन संयंत्रों में ईंधन का पर्याप्त भंडार होना जरूरी है।
CEA के आंकड़ों के अनुसार 50 बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक ‘क्रिटिकल’ श्रेणी तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन संयंत्रों के पास निर्धारित जरूरत के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम कोयला उपलब्ध है।
इस स्थिति ने आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है, खासकर ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है।
बिजली की मांग बढ़ना भी बड़ी वजह
कोयले के स्टॉक पर दबाव बढ़ने की एक प्रमुख वजह बिजली की बढ़ती मांग है। गर्म मौसम और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के कारण बिजली की खपत में इजाफा हुआ है।
जब बिजली की मांग बढ़ती है तो थर्मल प्लांटों को अपनी उत्पादन क्षमता के अनुसार अधिक समय तक चलाना पड़ता है। इसका सीधा असर कोयले की खपत पर पड़ता है और यदि उसी गति से नई आपूर्ति नहीं पहुंचती तो प्लांटों का स्टॉक तेजी से घट सकता है।
मानसून ने कोयला सप्लाई को किया प्रभावित
इस समय देश के कई कोयला उत्पादक राज्यों में बारिश का दौर जारी है। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होने की रिपोर्ट पहले भी सामने आई है।
बारिश के कारण खदानों से कोयला निकालने, उसे रेल या अन्य माध्यमों से बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने और लोडिंग- अनलोडिंग की प्रक्रिया में दिक्कत आती है। यही वजह है कि मानसून के दौरान थर्मल पावर प्लांटों के लिए पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
अगस्त में कोयला सप्लाई बढ़ी, फिर भी दबाव
दिलचस्प बात यह है कि कोयले की सप्लाई में कमी को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। Coal India ने अगस्त 2026 में कुल कोयला आपूर्ति में 5.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की। इस दौरान कुल सप्लाई 60.60 मिलियन टन रही।
बिजली क्षेत्र को अगस्त में करीब 48.46 मिलियन टन कोयला दिया गया, जो पिछले वर्ष के समान महीने के 46.39 मिलियन टन से अधिक है। अप्रैल से अगस्त के बीच Coal India की कुल आपूर्ति भी 6.7 प्रतिशत बढ़कर 322.90 मिलियन टन पहुंची।
इसके बावजूद बिजली संयंत्रों पर दबाव इसलिए बना हुआ है क्योंकि बिजली की मांग और खपत में बढ़ोतरी के बीच मानसूनी व्यवधानों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।
कोयला कंपनियों के पास भी बड़ा भंडार
बिजली संयंत्रों में कम स्टॉक की स्थिति के बावजूद खदानों के स्तर पर कोयले का भंडार मौजूद है।
Coal India के पास करीब 76 मिलियन टन कोयला पिटहेड स्टॉक में उपलब्ध बताया गया है।
इसका मतलब यह है कि चुनौती केवल कोयले की उपलब्धता की नहीं,
बल्कि उसे सही समय पर बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने की भी है। मानसून के कारण परिवहन और
लॉजिस्टिक्स पर दबाव बढ़ने से यह अंतर महत्वपूर्ण हो जाता है।
सरकार ने बढ़ाई कोयला सप्लाई की कोशिश
थर्मल पावर प्लांटों में कम होते स्टॉक को देखते हुए सरकार ने
आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास तेज किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टिव कोयला खदानों से उत्पादन बढ़ाने और
Coal India की कुछ सहायक कंपनियों के जरिए लोडिंग तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य बिजली संयंत्रों तक नियमित कोयला पहुंचाना और किसी भी संभावित उत्पादन संकट को रोकना है।
क्या देश में बिजली कटौती का खतरा है?
50 थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंचना निश्चित रूप से चिंता का विषय है,
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में
तत्काल बिजली संकट या बड़े पैमाने पर बिजली कटौती शुरू हो जाएगी।
भारत में बिजली उत्पादन के कई स्रोत हैं और सरकार के पास मांग एवं आपूर्ति को
संतुलित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके अलावा, कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं।
हालांकि, यदि लंबे समय तक बिजली की मांग ऊंची रहती है और मानसून के कारण
कोयले की ढुलाई बाधित होती रहती है, तो कुछ बिजली संयंत्रों पर उत्पादन संबंधी दबाव बढ़ सकता है।
पहले भी सामने आ चुकी है कम कोयला स्टॉक की स्थिति
अगस्त के अंत में भी CEA के आंकड़ों के आधार पर दर्जनों बिजली संयंत्रों में
कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंचने की खबर सामने आई थी। 25 अगस्त तक 45 पावर प्लांट
क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में थे, जबकि जुलाई के अंत में यह संख्या 31 थी।
इसके बाद सितंबर की शुरुआत में गंभीर स्टॉक वाले
संयंत्रों की संख्या बढ़कर 50 होने की रिपोर्ट सामने आई है।
इससे साफ है कि बिजली क्षेत्र के लिए कोयला सप्लाई फिलहाल एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
आने वाले दिनों में मानसून पर रहेगी नजर
अब सबसे अहम बात यह होगी कि मानसून की स्थिति कैसी रहती है और
कोयला उत्पादक क्षेत्रों से बिजली संयंत्रों तक सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है।
बारिश कम होने के साथ खनन और परिवहन गतिविधियों में सुधार आने की उम्मीद है।
Coal India ने भी मानसून कमजोर पड़ने के बाद उत्पादन और सप्लाई बढ़ाने की तैयारी की है।
निष्कर्ष
भारत में फिलहाल कोयला स्टॉक को लेकर थर्मल पावर सेक्टर पर दबाव जरूर बढ़ा है।
50 बिजली संयंत्रों में गंभीर रूप से कम स्टॉक, बढ़ती बिजली मांग और
मानसून से प्रभावित सप्लाई चेन ने सरकार तथा बिजली कंपनियों की चुनौती बढ़ा दी है।
हालांकि, खदान स्तर पर पर्याप्त कोयला उपलब्ध होने और सरकार द्वारा सप्लाई बढ़ाने के प्रयासों के
चलते तत्काल देशव्यापी बिजली संकट मान लेना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में कोयले की ढुलाई और
बिजली की मांग इस स्थिति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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