राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। तहसील गोला में राजस्व मामलों के निस्तारण में कथित देरी और न्यायालयों से पारित आदेशों के समय से अमलदरामद नहीं होने को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध सामने आया है। बुधवार को गोला बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए तहसील परिसर में प्रदर्शन किया और राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण समेत विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
19 सूत्रीय मांगपत्र में उठाए कई गंभीर मुद्दे
बार एसोसिएशन गोला के अध्यक्ष रन्तिदेव मिश्र एडवोकेट और महामंत्री आमोद गौड़ एडवोकेट के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी गोला को 19 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। अधिवक्ताओं ने मांगपत्र के माध्यम से तहसील में राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण, आदेशों के प्रभावी अनुपालन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने की मांग की।
अधिवक्ताओं का कहना है कि कई राजस्व मामलों में आदेश पारित होने के बावजूद उनका समय से अमलदरामद नहीं हो पा रहा है। इससे संबंधित पक्षकारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और मुकदमों के निस्तारण की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
लेखपालों की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
मांगपत्र में लेखपालों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में समुचित जानकारी के बिना रिपोर्ट लगाए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। कुछ मामलों में धन की मांग किए जाने का आरोप भी मांगपत्र में दर्ज किया गया है।
बार एसोसिएशन ने ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है, ताकि राजस्व प्रक्रिया में आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
नामांतरण और धारा 34 व 38(6) के मामलों में देरी का मुद्दा
अधिवक्ताओं ने नामांतरण आदेशों के अनुपालन में देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा धारा 34 और धारा 38(6) से जुड़े मामलों के निस्तारण में कथित विलंब तथा रियल टाइम खतौनी में न्यायालय के आदेशों का समय से अमलदरामद नहीं होने की शिकायत की गई।
अधिवक्ताओं ने मांग की कि राजस्व न्यायालयों से पारित आदेशों को संबंधित अभिलेखों में निर्धारित समय के भीतर दर्ज कराया जाए, जिससे पक्षकारों को बार-बार तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।
तीन वर्ष से एक ही पटल पर कार्यरत लेखपालों के स्थानांतरण की मांग
बार एसोसिएशन ने तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही पटल पर कार्यरत लेखपालों के स्थानांतरण की मांग भी की है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के पटल परिवर्तन से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार आ सकता है।
67 पत्रावलियों के मामले में जांच की मांग
मांगपत्र में 67 पत्रावलियों का मामला भी उठाया गया है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन पत्रावलियों को कथित रूप से अधिवक्ताओं को सुने बिना निर्मित किया गया। इसके साथ ही कुछ मुकदमों का वास्तविक निस्तारण किए बिना उन्हें ऑनलाइन अभिलेखों में खारिज दिखाए जाने का आरोप भी लगाया गया।
अधिवक्ताओं ने इन मामलों की जांच कराने और दोष पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पत्रावलियों के रखरखाव में कथित लापरवाही की जांच कराने की मांग भी शामिल है।
तहसीलदार और संविदा कर्मी को लेकर भी मांग
गोला बार एसोसिएशन ने वर्तमान तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग भी रखी है। इसके अलावा संविदा कर्मी उदयभान मौर्य को हटाए जाने की मांग की गई है।
वहीं, खतौनी उपलब्ध कराने के निर्धारित शुल्क को लेकर भी अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि निर्धारित 15 रुपये के बजाय कुछ मामलों में 20 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। इस संबंध में भी जांच और निर्धारित शुल्क व्यवस्था लागू कराने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व परिषद तक भेजा जाएगा पत्रक
बार एसोसिएशन ने बताया कि 19 सूत्रीय मांगपत्र की प्रतियां संबंधित उच्चाधिकारियों को भी भेजी जाएंगी। इनमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष राजस्व परिषद, जिलाधिकारी गोरखपुर, मंडलायुक्त तथा जल शक्ति मंत्री एवं गोरखपुर के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पत्रक भेजे जाने की बात कही गई है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य तहसील में राजस्व मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। उन्होंने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
कार्य बहिष्कार से प्रशासन पर समाधान का दबाव
अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के चलते तहसील परिसर में विरोध का माहौल रहा। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने और व्यवस्था में सुधार किए जाने की आवश्यकता है।
अब अधिवक्ताओं द्वारा सौंपे गए 19 सूत्रीय मांगपत्र पर तहसील प्रशासन और उच्चाधिकारी क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर है।
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19 सूत्रीय मांगपत्र में उठाए कई गंभीर मुद्दे
बार एसोसिएशन गोला के अध्यक्ष रन्तिदेव मिश्र एडवोकेट और महामंत्री आमोद गौड़ एडवोकेट के नेतृत्व में
अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी गोला को 19 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। अधिवक्ताओं ने मांगपत्र के
माध्यम से तहसील में राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण, आदेशों के प्रभावी अनुपालन और
प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने की मांग की।
अधिवक्ताओं का कहना है कि कई राजस्व मामलों में आदेश पारित होने के बावजूद उनका समय से
अमलदरामद नहीं हो पा रहा है। इससे संबंधित पक्षकारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और
मुकदमों के निस्तारण की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
लेखपालों की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
मांगपत्र में लेखपालों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ताओं ने
आरोप लगाया कि कुछ मामलों में समुचित जानकारी के बिना रिपोर्ट लगाए जाने की
शिकायतें सामने आती हैं। कुछ मामलों में धन की मांग किए जाने का आरोप भी मांगपत्र में दर्ज किया गया है।
बार एसोसिएशन ने ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है,
ताकि राजस्व प्रक्रिया में आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
नामांतरण और धारा 34 व 38(6) के मामलों में देरी का मुद्दा
अधिवक्ताओं ने नामांतरण आदेशों के अनुपालन में देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
इसके अलावा धारा 34 और धारा 38(6) से जुड़े मामलों के निस्तारण में कथित विलंब तथा
रियल टाइम खतौनी में न्यायालय के आदेशों का समय से अमलदरामद नहीं होने की शिकायत की गई।
अधिवक्ताओं ने मांग की कि राजस्व न्यायालयों से पारित आदेशों को संबंधित अभिलेखों में निर्धारित समय के
भीतर दर्ज कराया जाए, जिससे पक्षकारों को बार-बार तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें।
तीन वर्ष से एक ही पटल पर कार्यरत लेखपालों के स्थानांतरण की मांग
बार एसोसिएशन ने तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही पटल पर
कार्यरत लेखपालों के स्थानांतरण की मांग भी की है।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के पटल परिवर्तन से
प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार आ सकता है।
67 पत्रावलियों के मामले में जांच की मांग
मांगपत्र में 67 पत्रावलियों का मामला भी उठाया गया है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि
इन पत्रावलियों को कथित रूप से अधिवक्ताओं को सुने बिना निर्मित किया गया।
इसके साथ ही कुछ मुकदमों का वास्तविक निस्तारण किए बिना
उन्हें ऑनलाइन अभिलेखों में खारिज दिखाए जाने का आरोप भी लगाया गया।
अधिवक्ताओं ने इन मामलों की जांच कराने और दोष पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ
कार्रवाई की मांग की है। पत्रावलियों के रखरखाव में कथित लापरवाही की जांच कराने की मांग भी शामिल है।
तहसीलदार और संविदा कर्मी को लेकर भी मांग
गोला बार एसोसिएशन ने वर्तमान तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग भी रखी है।
इसके अलावा संविदा कर्मी उदयभान मौर्य को हटाए जाने की मांग की गई है।
वहीं, खतौनी उपलब्ध कराने के निर्धारित शुल्क को लेकर भी अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया है।
उनका आरोप है कि निर्धारित 15 रुपये के बजाय कुछ मामलों में 20 रुपये शुल्क लिया जा रहा है।
इस संबंध में भी जांच और निर्धारित शुल्क व्यवस्था लागू कराने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व परिषद तक भेजा जाएगा पत्रक
बार एसोसिएशन ने बताया कि 19 सूत्रीय मांगपत्र की प्रतियां संबंधित उच्चाधिकारियों को भी भेजी जाएंगी।
इनमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष राजस्व परिषद, जिलाधिकारी गोरखपुर, मंडलायुक्त तथा जल शक्ति मंत्री एवं
गोरखपुर के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को पत्रक भेजे जाने की बात कही गई है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य तहसील में राजस्व मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को सुचारु,
पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। उन्होंने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
कार्य बहिष्कार से प्रशासन पर समाधान का दबाव
अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के चलते तहसील परिसर में विरोध का माहौल रहा।
बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों से जुड़ी समस्याओं का
समाधान होने और व्यवस्था में सुधार किए जाने की आवश्यकता है।
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