उरुवा में खादी-माटीकला से आत्मनिर्भरता की पहल, जागरूकता कार्यक्रम में रोजगार योजनाओं की दी गई जानकारी

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

खादी और माटीकला को मिलेगा बढ़ावा, स्वरोजगार से जुड़ेंगे पारंपरिक कारीगर

गोरखपुर। खादी एवं ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने और पारंपरिक कारीगरों तथा माटीकला से जुड़े शिल्पकारों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकास खंड उरुवा परिसर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, गोरखपुर की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के विपणन विकास सहायता कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में खादी, ग्रामोद्योग और माटीकला से जुड़े लोगों को सरकार की विभिन्न रोजगारपरक एवं स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने लोगों को योजनाओं की पात्रता, उनके उद्देश्य और उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय हुनर को रोजगार का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया।

खादी और ग्रामोद्योग को बताया आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कृपा शंकर दूबे ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार पारंपरिक कारीगरों, माटीकला से जुड़े कामगारों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि खादी और ग्रामोद्योग केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक कला, संस्कृति और स्थानीय हुनर की पहचान भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद हुनर को सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो कारीगर अपने उत्पादों के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि ने लोगों से खादी एवं ग्रामोद्योगी उत्पादों को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की। साथ ही माटीकला जैसी पारंपरिक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और स्थानीय कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किया प्रेरित

कार्यक्रम में मौजूद अन्य अतिथियों ने भी खादी एवं ग्रामोद्योगी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पारंपरिक कारीगरों को अपने हुनर के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

अतिथियों ने लोगों से स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने और सरकार की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल के आधार पर छोटे स्तर पर भी रोजगार शुरू किया जा सकता है।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने दी योजनाओं की विस्तृत जानकारी

इस अवसर पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी आर.के. श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से संचालित विभिन्न रोजगारपरक योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित लोगों को योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया और पात्र लोगों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में अनेक लोगों के पास पारंपरिक कौशल और हुनर मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ा जाए। इससे कारीगर अपने हुनर को स्थायी आय के साधन में बदल सकते हैं।

उन्होंने लोगों से खादी, ग्रामोद्योग और माटीकला से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य उरुवा गौरी शंकर मिश्र, प्रधान संघ अध्यक्ष सर्वेश कुमार मिश्र, खण्ड विकास अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। इसके अलावा के.एम. पाण्डेय, प्रशासनिक अधिकारी, रामनिवास गुप्ता, वैयक्तिक सहायक सहित कार्यालय के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने, माटीकला के संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अंत में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी आर.के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि की अनुमति से कार्यक्रम के समापन की घोषणा की