कारगिल युद्ध के वीर योद्धा नायक अर्जुन प्रसाद को नम आंखों से अंतिम विदाई, सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

गोरखपुर। बेलघाट थाना क्षेत्र के ग्राम बिशनपुरा निवासी पूर्व सैनिक एवं कारगिल युद्ध के वीर योद्धा नायक अर्जुन प्रसाद का रविवार को सरयू नदी के तट स्थित कम्हरिया घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। भारतीय सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर देश के इस वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे अपने वीर योद्धा की अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने भावुक माहौल के बीच उन्हें अंतिम विदाई दी।

नायक अर्जुन प्रसाद ने भारतीय सेना में रहते हुए देश की सेवा पूरी निष्ठा, साहस और समर्पण के साथ की थी। कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्होंने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन की खबर से बेलघाट क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में भी शोक की लहर दौड़ गई।

लंबे समय से चल रहे थे बीमार

परिजनों के अनुसार पूर्व सैनिक नायक अर्जुन प्रसाद लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनका इलाज लखनऊ स्थित ग्लोब कैंसर केयर में चल रहा था। इलाज के दौरान 29 अगस्त की शाम उनका निधन हो गया।

जैसे ही उनके निधन की खबर बिशनपुरा गांव और आसपास के क्षेत्र में पहुंची, बड़ी संख्या में लोग शोकाकुल परिवार के घर पहुंचने लगे। शनिवार की रात करीब नौ बजे जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने बीच से एक ऐसे व्यक्ति के चले जाने से ग्रामीण भी बेहद दुखी नजर आए, जिसने अपना जीवन देश की सेवा में समर्पित किया था।

तिरंगे में लिपटकर निकली अंतिम यात्रा

रविवार सुबह करीब 10 बजे ग्राम बिशनपुरा से नायक अर्जुन प्रसाद की अंतिम यात्रा निकाली गई। पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर अंतिम यात्रा निकाली गई तो गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने के लिए पहुंच गए।

अंतिम यात्रा में क्षेत्र के हजारों लोगों के साथ पूर्व सैनिक, उनके सैन्य साथी, जनप्रतिनिधि, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में शुभचिंतक शामिल हुए।

जैसे-जैसे अंतिम यात्रा आगे बढ़ी, लोगों की भीड़ बढ़ती गई। पूरे रास्ते लोगों ने भारत माता की जय और वीर सपूत अमर रहें जैसे नारों के साथ अपने वीर योद्धा को श्रद्धांजलि दी।

कई लोगों की आंखों में अपने वीर सपूत को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।

कम्हरिया घाट पर सैन्य सम्मान के साथ सलामी

अंतिम यात्रा सरयू नदी के तट स्थित कम्हरिया घाट पहुंची। यहां भारतीय सेना के जवानों ने पूर्व सैनिक नायक अर्जुन प्रसाद को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी।

सेना के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। मौके पर मौजूद लोग इस सम्मानजनक विदाई के दौरान भावुक हो गए।

देश की रक्षा के लिए सेना में सेवा देने वाले अर्जुन प्रसाद को उनके अंतिम सफर में भी वही सम्मान मिला, जिसके वह हकदार थे।

छोटे बेटे अनूप ने दी मुखाग्नि

कम्हरिया घाट पर विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। नायक अर्जुन प्रसाद के छोटे बेटे अनूप ने उन्हें मुखाग्नि दी।

मुखाग्नि के समय माहौल बेहद गमगीन हो गया। परिजन और अंतिम संस्कार में शामिल लोग भावुक हो उठे। लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने की शक्ति देने की कामना की।

देश सेवा को हमेशा याद रखेगा क्षेत्र

नायक अर्जुन प्रसाद के निधन से क्षेत्रवासियों में गहरा शोक है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है, जिसने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा देश की रक्षा और सेवा में लगाया।

लोगों ने कहा कि अर्जुन प्रसाद की वीरता, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा।

क्षेत्रवासियों के अनुसार सेना में सेवा करना और कारगिल जैसे युद्ध में देश की रक्षा के लिए डटे रहना सामान्य बात नहीं है। ऐसे वीर सैनिकों का योगदान समाज और देश हमेशा याद रखता है।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

नायक अर्जुन प्रसाद की अंतिम यात्रा में जिस तरह बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, उससे उनके प्रति क्षेत्रवासियों के सम्मान और लगाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक अंतिम यात्रा में शामिल हुए। पूर्व सैनिक और

उनके सैन्य साथी भी अपने साथी को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के साथ चल रहे लोगों के चेहरे पर जहां अपने वीर

सपूत को खोने का दुख था, वहीं इस बात का गर्व भी था कि उनके क्षेत्र का

एक बेटा भारतीय सेना में सेवा देकर देश की रक्षा में अपना योगदान दे चुका है।

कारगिल योद्धा को दी भावुक विदाई

कारगिल युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था।

नायक अर्जुन प्रसाद भी कारगिल युद्ध के वीर योद्धाओं में शामिल रहे।

रविवार को जब उन्हें अंतिम विदाई दी गई तो उनके सैन्य जीवन और

देश सेवा को याद करते हुए लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

क्षेत्रवासियों ने कहा कि किसी सैनिक का जीवन केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं होता।

वह पूरे देश की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर सेवा करता है।

इसलिए एक सैनिक की विदाई पूरे समाज के लिए भावुक क्षण होती है।

परिवार को लोगों ने बंधाया ढांढस

अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने

शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया

लोगों ने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस दुख की घड़ी में पूरा क्षेत्र उनके साथ खड़ा है।

परिजनों के लिए यह बेहद कठिन समय है। लंबे समय से बीमारी से जूझने के बाद

अर्जुन प्रसाद के निधन से परिवार ने अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य खो दिया।

लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए परिवार को

इस अपार दुख को सहने की शक्ति देने की कामना की।

निष्कर्ष

कारगिल युद्ध के वीर योद्धा एवं पूर्व सैनिक नायक अर्जुन प्रसाद को

रविवार को उनके पैतृक गांव बिशनपुरा से

निकली अंतिम यात्रा के बाद कम्हरिया घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

तिरंगे में लिपटे वीर सपूत की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।

भारतीय सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी,

जबकि उनके छोटे बेटे अनूप ने मुखाग्नि दी। भारत माता की जय और वीर सपूत

अमर रहें के नारों के बीच क्षेत्रवासियों ने अपने वीर योद्धा को श्रद्धांजलि दी।

नायक अर्जुन प्रसाद भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन देश सेवा, कारगिल

युद्ध में उनकी भूमिका और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण क्षेत्रवासियों की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा।

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FAQ

1. नायक अर्जुन प्रसाद कौन थे?

नायक अर्जुन प्रसाद गोरखपुर के बेलघाट थाना क्षेत्र के बिशनपुरा गांव के निवासी और

भारतीय सेना के पूर्व सैनिक थे। वह कारगिल युद्ध में भी शामिल रहे थे।

2. नायक अर्जुन प्रसाद का निधन कब हुआ?

परिजनों के अनुसार उनका निधन 29 अगस्त की शाम लखनऊ में इलाज के दौरान हुआ।

3. नायक अर्जुन प्रसाद का अंतिम संस्कार कहां हुआ?

उनका अंतिम संस्कार सरयू नदी के तट स्थित कम्हरिया घाट पर सैन्य सम्मान के साथ किया गया।

4. उन्हें अंतिम विदाई कैसे दी गई?

भारतीय सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी।

पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर अंतिम यात्रा निकाली गई।

5. अंतिम संस्कार में कौन-कौन शामिल हुए?

अंतिम यात्रा में हजारों क्षेत्रवासी, पूर्व सैनिक, सैन्य साथी, जनप्रतिनिधि, रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल हुए।

6. नायक अर्जुन प्रसाद को मुखाग्नि किसने दी?

उनके छोटे बेटे अनूप ने मुखाग्नि दी।

7. नायक अर्जुन प्रसाद के निधन से क्षेत्र में क्या माहौल है?

उनके निधन से बिशनपुरा गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है।

क्षेत्रवासियों ने उनकी देश सेवा और वीरता को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

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