Meerut News: सलावा गंगनहर में भाकियू क्रांतिकारी का जल सत्याग्रह, UGC बिल वापस लेने और आरक्षण खत्म करने की मांग

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) ने शनिवार को शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीति से जुड़े मुद्दों को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता सलावा क्षेत्र में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के पास स्थित गंगनहर में उतर गए और कई घंटे तक पानी में खड़े रहकर जल सत्याग्रह किया। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से कथित यूजीसी बिल वापस लेने और जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठाई। 

प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से शिक्षा व्यवस्था में समानता और योग्यता आधारित अवसर की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के अध्यक्ष राजीव राणा ने कहा कि अधिकार और अवसर जाति के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर मिलने चाहिए। संगठन ने यह भी कहा कि पूरे देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

गंगनहर में उतरकर किया विरोध

सलावा स्थित गंगनहर में शनिवार को उस समय लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ, जब भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) के कार्यकर्ता हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पानी में उतर गए। कार्यकर्ताओं ने इसे अपने आंदोलन का जल सत्याग्रह बताया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जिन नियमों और फैसलों का वे विरोध कर रहे हैं, उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। संगठन ने यूजीसी बिल को तत्काल रद्द करने की मांग दोहराई।

मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के नजदीक हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की गई। 

UGC बिल को लेकर संगठन का विरोध

भाकियू क्रांतिकारी लंबे समय से यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित नियमों और कानून को लेकर विरोध दर्ज कराता रहा है। इससे पहले भी मेरठ के सलावा और सरधना क्षेत्र में संगठन की ओर से प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई थीं।

जनवरी 2026 में भी संगठन ने यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की थी। उस दौरान संगठन की ओर से भविष्य में महापंचायत आयोजित करने की चेतावनी भी दी गई थी। 

शनिवार के जल सत्याग्रह में भी इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कार्यकर्ताओं ने सरकार से यूजीसी बिल को वापस लेने की मांग की।

जातिगत आरक्षण खत्म करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान यूजीसी बिल के साथ-साथ जातिगत आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने देश में जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की मांग की।

भाकियू क्रांतिकारी के अध्यक्ष राजीव राणा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में अधिकार और अवसर जाति तथा आरक्षण के बजाय योग्यता के आधार पर दिए जाने चाहिए। संगठन का कहना है कि सामाजिक विभाजन के बजाय समान अवसर वाली व्यवस्था पर जोर दिया जाना चाहिए। 

यह मांग मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर संगठन के रुख को दर्शाती है। हालांकि आरक्षण देश की संवैधानिक व्यवस्था और सामाजिक न्याय की व्यापक बहस से जुड़ा विषय है और इस पर अलग-अलग राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के अलग-अलग मत हैं।

समान शिक्षा नीति की मांग

प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी मांग सामने रखी। संगठन की ओर से कहा गया कि देश में एक समान शिक्षा नीति होनी चाहिए और शिक्षा पर किसी एक वर्ग विशेष का प्रभुत्व नहीं होना चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और योग्यता आधारित व्यवस्था की बात कही। उनका कहना था कि शिक्षा ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें किसी भी विद्यार्थी को उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण अवसरों से वंचित न होना पड़े।

भाकियू क्रांतिकारी ने अपने प्रदर्शन के जरिए सरकार तक इन मांगों को पहुंचाने की कोशिश की।

घंटों पानी में खड़े रहे कार्यकर्ता

जल सत्याग्रह के दौरान कार्यकर्ता कई घंटे तक गंगनहर के पानी में खड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां और बैनर ले रखे थे।

संगठन की ओर से कहा गया कि यह प्रदर्शन सरकार को अपनी मांगों की गंभीरता का संदेश देने के लिए किया गया है। कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था से संबंधित कथित

अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक फैसलों को रोकने की मांग भी उठाई। 

जल सत्याग्रह के दौरान पुलिस की मौजूदगी भी रही।

पुलिस बल की तैनाती का उद्देश्य मौके पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना था।

आंदोलन बड़ा करने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से सरकार को आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दी गई।

संगठन ने कहा कि यदि उसकी मांगों के अनुरूप योग्यता आधारित और

न्यायपूर्ण व्यवस्था लागू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। 

इससे संकेत मिल रहा है कि भाकियू क्रांतिकारी आने वाले दिनों में यूजीसी बिल और

आरक्षण के मुद्दे को लेकर और कार्यक्रम आयोजित कर सकता है।

पहले भी मेरठ में हो चुका है प्रदर्शन

यूजीसी से जुड़े मुद्दे पर मेरठ में इससे पहले भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। जनवरी 2026 में सरधना क्षेत्र में

भाकियू क्रांतिकारी के नेतृत्व में यूजीसी कानून के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

उस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने सलावा में एकत्र होकर पैदल मार्च निकाला था और

तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी कानून वापस लेने की मांग की थी।

संगठन ने तब भी सरकार को बड़े आंदोलन और महापंचायत की चेतावनी दी थी। 

इसके अलावा मेरठ में अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से भी यूजीसी से संबंधित

कानून और उसके प्रभावों पर बैठकें और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाने की खबरें सामने आई हैं। 

सरकार के सामने बढ़ सकती है चुनौती

मेरठ में शनिवार का जल सत्याग्रह केवल स्थानीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं है।

इसमें यूजीसी बिल, शिक्षा नीति और आरक्षण जैसे व्यापक राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया गया है।

यदि संगठन अपने आंदोलन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक

विस्तार देता है तो यह मुद्दा राजनीतिक और

सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि आंदोलन का वास्तविक प्रभाव

इस बात पर निर्भर करेगा कि संगठन कितने लोगों और सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ पाता है।

फिलहाल सलावा में हुए प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था और

आरक्षण को लेकर चल रही बहस को जरूर फिर सामने ला दिया है।

प्रशासन की भूमिका भी अहम

ऐसे प्रदर्शनों में प्रशासन के सामने एक ओर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की

जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है।

गंगनहर में जल सत्याग्रह के दौरान पुलिस की तैनाती इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही।

प्रशासन की ओर से किसी बड़ी अप्रिय घटना की जानकारी सामने नहीं आई है।

भविष्य में यदि संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन या महापंचायत आयोजित करता है तो

प्रशासन को भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त तैयारियां करनी पड़ सकती हैं।

क्या है आगे की रणनीति?

भाकियू क्रांतिकारी ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर

आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। हालांकि अगले कार्यक्रम की विस्तृत

तारीख और स्वरूप की जानकारी इस प्रदर्शन की रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

संगठन की ओर से उठाए गए मुद्दों में यूजीसी बिल की वापसी, जातिगत

आरक्षण समाप्त करना और योग्यता आधारित अवसर जैसी मांगें शामिल हैं। आने वाले दिनों में

इन मांगों को लेकर संगठन की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।

निष्कर्ष

मेरठ के सलावा में भाकियू क्रांतिकारी के जल सत्याग्रह ने यूजीसी बिल और आरक्षण व्यवस्था से

जुड़े विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने गंगनहर में उतरकर विरोध जताया और

सरकार से यूजीसी बिल वापस लेने तथा जातिगत आरक्षण समाप्त करने की मांग की। 

संगठन के अध्यक्ष राजीव राणा ने योग्यता के आधार पर अधिकार और अवसर देने तथा

समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग रखी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन की ओर से इन मांगों पर क्या रुख सामने आता है और

भाकियू क्रांतिकारी अपने आंदोलन को आगे किस रूप में ले जाता है।

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