मेरठ में 10 साल के बच्चे की सर्पदंश से मौत, अस्पताल पहुंचने से पहले झाड़-फूंक में बीता समय

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सर्पदंश की एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। गंगानगर क्षेत्र के अम्हेड़ा गांव में 10 वर्षीय बच्चे की जहरीले सांप के काटने के बाद मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा रात में अपने माता-पिता के साथ बरामदे में सो रहा था। सुबह करीब चार बजे अचानक उसकी चीख सुनकर परिजन जागे तो बिस्तर पर सांप दिखाई दिया। बच्चे ने गर्दन में तेज चुभन होने की बात बताई।

घटना के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। इसके बावजूद उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन पहले अलग-अलग स्थानों पर झाड़-फूंक कराने के लिए लेकर गए। जब बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सकीय उपचार की जरूरत और अंधविश्वास के कारण होने वाली देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात में माता-पिता के पास सो रहा था बच्चा

अम्हेड़ा गांव निवासी परिवार का सबसे छोटा बेटा 10 वर्षीय युग था। वह रात में घर के बरामदे में माता-पिता के साथ बेड पर सो रहा था। सुबह करीब चार बजे अचानक वह चीखते हुए उठा। उसने अपने पिता को बताया कि उसकी गर्दन में तेज चुभन हो रही है।

परिजनों ने लाइट जलाकर देखा तो बिस्तर पर सांप दिखाई दिया। परिवार के मुताबिक सांप ने बच्चे की गर्दन पर डसा था। इसके बाद बच्चे की हालत तेजी से खराब होने लगी।

अस्पताल ले जाने के बजाय कराई गई झाड़-फूंक

बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद परिजन उसे कार से पहले मवाना, फिर खेड़की और उसके बाद शोभापुर ले गए। यहां वे झाड़-फूंक करने वाले लोगों के पास पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक वहां से भी परिवार को वापस कर दिया गया।

इसके बाद बच्चे को मेडिकल अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन करीब सुबह आठ बजे बच्चे का शव लेकर घर लौट आए।

यह घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करता है कि जहरीले सांप के काटने के बाद उपचार में थोड़ी भी देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। सर्पदंश को किसी घरेलू या धार्मिक उपाय से ठीक करने की कोशिश करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

24 घंटे तक इलाज की बात सुनकर फिर अस्पताल पहुंचे

परिजनों के अनुसार, बाद में किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि सांप के काटने के बाद 24 घंटे तक उपचार की संभावना रहती है। इस जानकारी के बाद परिवार बच्चे और सांप को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा।

हालांकि वहां भी उपचार नहीं हो सका। इसके बाद परिजन बच्चे को लेकर फिर देसी दवा देने वालों के पास गए। कई जगह घूमने के बाद अंत में बच्चे को घर ले आया गया। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय बीत चुका था।

दूसरी कक्षा में पढ़ता था युग

10 वर्षीय युग स्थानीय स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र था। वह अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसके पिता चालक हैं, जबकि मां गृहणी हैं। बच्चे की मौत की खबर सामने आने के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद दर्दनाक है क्योंकि बच्चा रात में सामान्य रूप से सोया था और कुछ ही घंटों के भीतर सर्पदंश की वजह से उसकी जान चली गई। ग्रामीणों में भी घटना के बाद भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

डिब्बे में बंद किया गया सांप

घटना के बाद परिजनों ने सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया। उसकी लंबाई करीब डेढ़ फीट बताई गई है। शरीर पर पतली सफेद धारियों, छोटे मुंह और बनावट के आधार पर उसकी पहचान इंडियन कॉमन करैत के रूप में की गई।

कॉमन करैत एक विषैला सांप है और इसके काटने के मामलों में चिकित्सकीय आपातकाल की स्थिति बन सकती है। एक मेडिकल केस रिपोर्ट में भी भारतीय करैत के विष को गंभीर न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव वाला बताया गया है, जिसमें मांसपेशियों के पक्षाघात जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

सर्पदंश के बाद सबसे जरूरी है समय पर इलाज

सांप के काटने के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना है जहां सर्पदंश का इलाज उपलब्ध हो। जहरीले सांप के काटने की स्थिति में देरी जानलेवा हो सकती है।

ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या देसी उपचार का सहारा लेते हैं। इससे अस्पताल पहुंचने में महत्वपूर्ण समय निकल सकता है। हाल में उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में भी सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के कारण इलाज में देरी से मौत के मामले सामने आए हैं। वहीं सीधे अस्पताल पहुंचने वाले कुछ मरीजों को एंटी-स्नेक वेनम सहित जरूरी चिकित्सा मिलने पर बचाया गया है।

बरसात में बढ़ जाता है सांपों का खतरा

मानसून के दौरान सांपों के घरों और आबादी वाले इलाकों में आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बारिश के कारण सांप अपने सामान्य ठिकानों से बाहर निकलते हैं और कई बार घरों, खेतों, लकड़ी या सामान के आसपास छिप जाते हैं।

ऐसे मौसम में घर के आसपास साफ-सफाई रखना, बिस्तर और कपड़ों की जांच करना तथा रात में पर्याप्त रोशनी का इस्तेमाल करना जरूरी है। जमीन पर सोने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

अंधविश्वास से बचना जरूरी

इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि बच्चे को अस्पताल पहुंचाने से पहले

झाड़-फूंक कराने में समय बीता। किसी भी सर्पदंश के मामले में परिवार को

यह समझना चाहिए कि यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है।

सांप काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार को चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना ही

सबसे सुरक्षित कदम है। सांप को पकड़ने या उसके पास जाने की

कोशिश भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे दोबारा काटे जाने का खतरा हो सकता है।

गांव में पसरा मातम

बच्चे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीण भी घटना से स्तब्ध हैं।

महज 10 वर्ष की उम्र में बच्चे की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि

ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश को लेकर जागरूकता कितनी जरूरी है।

अगर जहरीले सांप के काटने के बाद मरीज को बिना देरी अस्पताल पहुंचाया जाए और

आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध हो, तो कई मामलों में जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

मेरठ के अम्हेड़ा गांव में 10 वर्षीय बच्चे की सर्पदंश से मौत बेहद दुखद घटना है। बच्चे को समय पर

अस्पताल पहुंचाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में समय बीतने की बात सामने आई है।

घटना से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि

सांप के काटने को सामान्य घटना समझकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

ग्रामीण इलाकों में इस संबंध में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को

वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार के प्रति जागरूक करना बेहद आवश्यक है।

FAQ

1. मेरठ में बच्चे के साथ क्या हुआ?

मेरठ के अम्हेड़ा गांव में 10 वर्षीय बच्चे को सुबह करीब चार बजे

जहरीले सांप ने काट लिया। बाद में उसकी मौत हो गई।

2. बच्चे को सांप ने कहां काटा था?

परिजनों के अनुसार बच्चे को गर्दन पर सांप ने काटा था।

3. बच्चे की उम्र कितनी थी?

बच्चे की उम्र 10 वर्ष थी और वह दूसरी कक्षा में पढ़ता था।

4. बच्चे को अस्पताल कब ले जाया गया?

बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद परिजन पहले कई स्थानों पर झाड़-फूंक कराने गए और

उसके बाद अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

5. सांप की पहचान किस रूप में हुई?

परिजनों द्वारा पकड़े गए सांप की बनावट और धारियों के आधार पर

उसकी पहचान इंडियन कॉमन करैत के रूप में की गई।

6. सर्पदंश के बाद क्या करना चाहिए?

सर्पदंश की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए।

झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवाना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

7. बरसात में सांपों से कैसे बचें?

घर के आसपास सफाई रखें, रात में रोशनी का इस्तेमाल करें, बिस्तर और

कपड़ों की जांच करें तथा सांप दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें।

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