महराजगंज में डंपर की टक्कर से तीन युवकों की मौत, गुस्साए परिजनों ने हाईवे किया जाम; मुआवजे और नौकरी की मांग

महराजगंज सड़क हादसा: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में मंगलवार रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद बुधवार को परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। निचलौल-गोरखपुर हाईवे पर दमकी गांव के सामने डंपर की टक्कर से युवकों की मौत हुई थी। घटना के विरोध में मृतकों के परिजनों ने बरोहिया गांव के सामने हाईवे जाम कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक सड़क पर यातायात बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

डंपर की टक्कर से हुआ दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे निचलौल थाना क्षेत्र के पचमा गांव निवासी विवेक, सन्नी और किशन तथा सन्नी के साथी शशिव निचलौल-गोरखपुर हाईवे पर दमकी गांव के सामने हादसे का शिकार हुए। रिपोर्ट के मुताबिक डंपर की टक्कर में तीन युवकों की मौत हुई, जबकि घटना से जुड़े विवरण में सन्नी के साथी शशिव का भी उल्लेख है।

हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मृतकों के घरों में कोहराम मच गया और गांव में मातम छा गया। रात में हुए हादसे के बाद बुधवार सुबह परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने का फैसला किया।

सुबह हाईवे पर लगाया जाम

मृतकों के परिजनों ने बुधवार सुबह करीब 10:23 बजे बरोहिया गांव के सामने निचलौल-गोरखपुर हाईवे को जाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और हाईवे पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

परिजन मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और अन्य मांगों को लेकर सड़क पर बैठे थे। उनका कहना था कि हादसे में तीन परिवारों ने अपने युवा सदस्यों को खोया है, इसलिए प्रशासन को तत्काल सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रत्येक मृतक के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग प्रमुख थी। इसके अलावा प्रत्येक मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई।

परिजनों ने मृतक सन्नी की बहन की शादी के लिए आर्थिक सहायता और सभी प्रभावित परिवारों के भरण-पोषण के लिए मदद की मांग भी रखी। उनका कहना था कि अचानक हुई मौत से परिवारों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

पुलिस और परिजनों के बीच हुई तीखी नोकझोंक

हाईवे जाम की सूचना मिलने के बाद निचलौल थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार राय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों से हाईवे खाली करने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगें पूरी होने से पहले हटने को तैयार नहीं थे। इसी बात को लेकर पुलिस और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

इस दौरान हाईवे पर वाहनों की कतार लगातार बढ़ती गई। जाम के कारण यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी हुई। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।

एसडीएम और तहसीलदार ने संभाली स्थिति

करीब पौने 12 बजे एसडीएम निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता और तहसीलदार अमित कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों से बातचीत की और उनकी मांगों को सुना।

करीब 23 मिनट तक अधिकारियों और परिजनों के बीच बातचीत चली। इसके बाद परिजनों ने अपनी मांगों से संबंधित लिखित पत्र अधिकारियों को सौंपा। प्रशासन की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी हाईवे से हट गए।

दोपहर 12:09 बजे शुरू हुआ यातायात

अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन दोपहर करीब 12:09 बजे हाईवे से हट गए। इसके बाद निचलौल-गोरखपुर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी।

जाम हटने के बाद पुलिस और प्रशासन ने यातायात को सामान्य कराया।

हादसे के बाद गांव में मातम

एक ही सड़क हादसे में युवाओं की मौत से पचमा गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों के बीच भी घटना को लेकर आक्रोश है।

परिजनों की ओर से मुआवजे और नौकरी की मांग इसी गुस्से और परिवारों पर पड़े आर्थिक संकट को दर्शाती है। अब उनकी नजर प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन पर है।

सड़क सुरक्षा पर भी उठे सवाल

महराजगंज की यह घटना सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। निचलौल-गोरखपुर हाईवे पर रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय कितने प्रभावी हैं, इस पर भी चर्चा जरूरी है।

डंपर जैसे भारी वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में जान-माल का नुकसान गंभीर हो सकता है। ऐसे में वाहनों की गति, चालक की सावधानी और यातायात नियमों के पालन के साथ सड़क की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

परिवारों के सामने अब आर्थिक संकट

युवा सदस्यों की अचानक मौत से परिवारों के सामने भावनात्मक संकट के साथ आर्थिक

परेशानी भी खड़ी हो सकती है। यही कारण है कि मृतकों के परिजनों ने एक-एक करोड़ रुपये

मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की है।

मृतक सन्नी की बहन की शादी के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी परिवार की तत्काल जरूरतों से जुड़ी है।

अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि

पीड़ित परिवारों की मांगों पर नियमानुसार क्या सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

लिखित मांग पत्र सौंपा गया

अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद परिजनों ने अपनी मांगों का लिखित पत्र एसडीएम और तहसीलदार को सौंपा।

प्रशासन की ओर से मांगों को लेकर आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने आंदोलन समाप्त किया।

अब आगे की कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर होने वाली प्रक्रिया और शासन के नियमों के अनुसार तय होगी।

मुआवजे और नौकरी से संबंधित मांगों पर अंतिम निर्णय सक्षम स्तर पर लिया जाना होगा।

हादसे की जांच पर भी नजर

सड़क दुर्घटना के बाद हादसे की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण है।

डंपर और युवकों के वाहन की स्थिति, दुर्घटना का

कारण और घटना के अन्य पहलुओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

दुर्घटना में किसी की लापरवाही या यातायात नियमों के उल्लंघन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

इसलिए किसी व्यक्ति को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराने से

पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

हाईवे जाम से आम लोगों को हुई परेशानी

परिजनों के प्रदर्शन के कारण निचलौल-गोरखपुर हाईवे पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात बाधित रहा।

दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगने से यात्रियों को परेशानी हुई।

हालांकि अधिकारियों की बातचीत के बाद जाम समाप्त हो गया और दोपहर 12:09 बजे वाहनों की

आवाजाही फिर शुरू हो गई। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य कराई गई।

अब प्रशासन के आश्वासन पर टिकी उम्मीद

परिजनों ने जिन मांगों को लेकर हाईवे जाम किया था, उनमें मुआवजा, नौकरी, शादी के लिए सहायता और परिवारों के

भरण-पोषण की आर्थिक मदद शामिल है। प्रशासन ने मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारियों की ओर से इन मांगों पर क्या

कदम उठाए जाते हैं और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार कितनी सहायता मिलती है।

निष्कर्ष

महराजगंज के निचलौल क्षेत्र में मंगलवार रात हुए सड़क हादसे ने तीन परिवारों को

गहरे सदमे में डाल दिया। दमकी गांव के सामने

डंपर की टक्कर से युवकों की मौत के बाद बुधवार सुबह परिजनों ने बरोहिया गांव के

सामने निचलौल-गोरखपुर हाईवे जाम कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के

दौरान यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतार लग गई।

परिजनों ने प्रत्येक मृतक के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी,

सन्नी की बहन की शादी के लिए सहायता और भरण-पोषण के लिए आर्थिक मदद की मांग की।

पुलिस और परिजनों के बीच इस दौरान तीखी नोकझोंक भी हुई।

बाद में एसडीएम और तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की।

करीब 23 मिनट की वार्ता के बाद परिजनों ने अधिकारियों को लिखित मांग पत्र सौंपा। प्रशासन की ओर से

आश्वासन मिलने के बाद दोपहर 12:09 बजे हाईवे से जाम हटाया गया और यातायात बहाल हो गया।

अब पीड़ित परिवारों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

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