उत्तर प्रदेश में नकली नोटों के नेटवर्क के खिलाफ यूपी एटीएस को बड़ी कामयाबी मिली है। एटीएस ने भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते जाली नोट लाकर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में खपाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 500 रुपये के 201 जाली नोट बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत 1,00,500 रुपये बताई गई है। एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली नोटों की सप्लाई के स्रोत की जांच कर रही है।
भारत-बांग्लादेश सीमा से यूपी तक पहुंच रहे थे नकली नोट, ATS ने पकड़ा नेटवर्क
एटीएस के अनुसार, उसे सूचना मिली थी कि कासगंज के कुछ लोग पश्चिम बंगाल के मालदा से नकली नोट लेकर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उन्हें चलाने का काम कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद जांच एजेंसी ने मामले की पड़ताल शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों पर नजर रखी गई। जांच के दौरान सामने आए सुरागों के आधार पर एटीएस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
नकली नोटों के इस नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि सीमा पार से जाली मुद्रा की आपूर्ति देश की आर्थिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला माना जाता है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
लखनऊ में दो आरोपियों की गिरफ्तारी, सामने आए नाम
यूपी एटीएस ने सात अगस्त को कासगंज जिले के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव निवासी अजीम खान और राजा उर्फ समीरुल को लखनऊ से गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान दोनों के पास से 500 रुपये के 201 जाली नोट बरामद होने की बात सामने आई है। बरामद नोटों की कुल कीमत 1,00,500 रुपये बताई गई है।
एटीएस के मुताबिक, बरामद नोटों की जांच भारतीय रिजर्व बैंक के मानकों के अनुसार कराई गई। जांच में इन नोटों के जाली होने की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ एटीएस लखनऊ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
500 रुपये के 201 नकली नोट बरामद, कीमत 1 लाख से ज्यादा
इस मामले में बरामदगी का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। एटीएस के मुताबिक दोनों आरोपियों के पास से 500 रुपये के कुल 201 नकली नोट मिले। प्रत्येक नोट का अंकित मूल्य 500 रुपये है और इस तरह बरामद जाली करेंसी की कुल अंकित कीमत 1,00,500 रुपये है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये नोट किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंचे और इनके जरिए उत्तर प्रदेश में कहां-कहां नकली करेंसी चलाने की कोशिश की गई।
मालदा से यूपी तक कैसे पहुंच रहा था जाली नोटों का नेटवर्क?
एटीएस की प्रारंभिक जांच में पश्चिम बंगाल के मालदा से जाली नोट लाए जाने की जानकारी सामने आई है। मालदा क्षेत्र का नाम पहले भी सीमा पार से नकली मुद्रा की तस्करी के मामलों में सामने आता रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में नकली नोटों की पूरी सप्लाई चेन और सीमा पार नेटवर्क के बारे में अभी जांच जारी है।
जांच एजेंसी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों को नकली नोट किसने उपलब्ध कराए, उन्हें उत्तर प्रदेश तक किस माध्यम से पहुंचाया गया और किन जिलों में इन नोटों को खपाने की योजना थी।
पूछताछ में खुल सकते हैं नेटवर्क से जुड़े कई राज
गिरफ्तारी के बाद एटीएस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य केवल बरामद नकली नोटों के बारे में जानकारी हासिल करना नहीं है, बल्कि इनके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी है। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों से जाली नोटों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पूछताछ के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जाली नोट कहां से प्राप्त किए जाते थे और उत्तर प्रदेश के किन-किन जिलों में उनकी सप्लाई या खपत की जाती थी। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
कासगंज से जुड़े आरोपियों पर ATS की कार्रवाई
इस मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपी कासगंज जिले के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव के रहने वाले बताए गए हैं। एटीएस ने उन्हें लखनऊ से गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद दोनों के खिलाफ एटीएस लखनऊ थाने में मामला दर्ज किया गया है।
कासगंज से जुड़े आरोपियों के कथित नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों तक था या नहीं, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल एटीएस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
नकली नोटों के नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
नकली करेंसी का इस्तेमाल आर्थिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। जाली नोटों के जरिए वास्तविक मुद्रा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। यही वजह है कि सीमा पार से नकली नोटों की कथित सप्लाई और उनके देश के भीतर प्रसार को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेती हैं।
यूपी एटीएस की मौजूदा कार्रवाई भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी और 201 जाली नोटों की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।
यूपी के किन जिलों में खपाए जा रहे थे नकली नोट?
फिलहाल एटीएस ने उन सभी जिलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जहां कथित तौर पर नकली नोट खपाए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के किन इलाकों तक फैला हुआ था।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद जाली नोटों के अलावा इससे जुड़े और
कितने नोट बाजार में पहुंच चुके हैं और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
आगे और गिरफ्तारियां संभव
एटीएस की पूछताछ और जांच में यदि अन्य आरोपियों या सप्लायरों के नाम सामने आते हैं तो
आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसी नकली नोटों के स्रोत से
लेकर उनकी सप्लाई और संभावित खपत तक पूरी कड़ी की पड़ताल कर रही है।
फिलहाल इस कार्रवाई से नकली करेंसी के कथित नेटवर्क को लेकर एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि एटीएस की जांच
इस नेटवर्क को कितनी दूर तक पहुंचती है और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
नकली नोट मामले में क्या-क्या हुआ?
यूपी एटीएस को सूचना मिली कि कासगंज के कुछ लोग पश्चिम बंगाल के मालदा से जाली नोट लाकर
उत्तर प्रदेश में चला रहे हैं। इसके बाद जांच शुरू हुई।
सात अगस्त को एटीएस ने लखनऊ से अजीम खान और राजा
उर्फ समीरुल को गिरफ्तार किया। दोनों के पास से 500 रुपये के 201 जाली नोट बरामद किए गए।
इनकी कुल कीमत 1,00,500 रुपये बताई गई। जांच में नोट जाली पाए जाने के
बाद दोनों के खिलाफ एटीएस लखनऊ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
अब एजेंसी कथित सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
भारत-बांग्लादेश सीमा से कथित तौर पर नकली नोटों की सप्लाई और फिर
उत्तर प्रदेश में उनके इस्तेमाल का यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर है। हालांकि
अभी जांच शुरुआती चरण में है और पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आना बाकी है।
एटीएस की कार्रवाई में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और
1,00,500 रुपये के जाली नोटों की बरामदगी हुई है।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों का स्रोत क्या था, उन्हें उत्तर प्रदेश तक
कैसे पहुंचाया गया और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में
मामला: जाली नोटों की कथित सप्लाई और खपत
जांच एजेंसी: यूपी एटीएस
गिरफ्तार आरोपी: अजीम खान और राजा उर्फ समीरुल
निवास: गणेशपुर, गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र, कासगंज
गिरफ्तारी: 7 अगस्त 2026
गिरफ्तारी स्थान: लखनऊ
बरामदगी: 500 रुपये के 201 जाली नोट
कुल अंकित कीमत: 1,00,500 रुपये
कथित स्रोत: पश्चिम बंगाल का मालदा क्षेत्र
केस: एटीएस लखनऊ थाने में दर्ज
जांच: कथित सप्लाई नेटवर्क और अन्य जुड़े लोगों की तलाश जारी।
FAQ: नकली नोट मामले से जुड़े सवाल
सवाल 1: यूपी में नकली नोटों के मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
यूपी एटीएस ने इस मामले में दो आरोपियों अजीम खान और राजा उर्फ समीरुल को गिरफ्तार किया है।
सवाल 2: आरोपियों के पास से कितने नकली नोट मिले?
एटीएस के मुताबिक 500 रुपये के 201 जाली नोट बरामद किए गए हैं।
सवाल 3: बरामद नकली नोटों की कुल कीमत कितनी है?
बरामद 201 नोटों की कुल अंकित कीमत 1,00,500 रुपये बताई गई है।
सवाल 4: नकली नोट कहां से लाए जाने की बात सामने आई है?
एटीएस की जांच में पश्चिम बंगाल के मालदा से जाली नोट लाए जाने की जानकारी सामने आई है।
सवाल 5: गिरफ्तार आरोपी कहां के रहने वाले हैं?
दोनों आरोपी कासगंज जिले के गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव के निवासी बताए गए हैं।
सवाल 6: क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं?
एटीएस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर जाली नोटों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
इसलिए नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका जांच का विषय है।
सवाल 7: नकली नोट उत्तर प्रदेश के किन जिलों में चलाए जा रहे थे?
फिलहाल एटीएस ने सभी संबंधित जिलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
एजेंसी यह पता लगा रही है कि कथित नेटवर्क किन जिलों तक फैला था।
सवाल 8: मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
एटीएस सप्लाई नेटवर्क, नकली नोटों के स्रोत और अन्य संभावित आरोपियों की
भूमिका की जांच कर रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।