CM की तस्वीर के साथ प्रदर्शन पर कार्रवाई, सपा विधायक सचिन यादव पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर

लखनऊ: विधानसभा में हंगामे के बाद सपा विधायक सचिन यादव पूरे सत्र के लिए निलंबित

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को सदन में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव को मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ प्रदर्शन करने और सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने के आरोप में पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की मर्यादा और नियमों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की। इस निर्णय के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सदन का माहौल काफी गर्म हो गया। लगातार हंगामे के कारण मुख्यमंत्री का निर्धारित संबोधन समय पर नहीं हो सका और विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

CM की तस्वीर के साथ प्रदर्शन बना कार्रवाई का आधार

जानकारी के अनुसार, विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी के विधायक विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इसी दौरान विधायक सचिन यादव मुख्यमंत्री की तस्वीर लेकर सदन में प्रदर्शन करते दिखाई दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे सदन के नियमों और संसदीय परंपराओं के विपरीत माना। अध्यक्ष ने पहले व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा कर दी।

सदन में इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और कुछ समय तक नारेबाजी भी होती रही। सत्ता पक्ष का कहना था कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है, लेकिन इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।

हंगामे से प्रभावित हुई सदन की कार्यवाही

सदन में हुए हंगामे का असर विधानसभा की कार्यवाही पर भी पड़ा। मुख्यमंत्री का प्रस्तावित संबोधन निर्धारित समय पर नहीं हो सका। लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू कराई गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को कई जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है, जबकि सरकार विकास कार्यों और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति लगातार बनी हुई है।

सपा विधायकों की बैठक में बनी आगे की रणनीति

सचिन यादव के निलंबन के बाद विधानसभा परिसर स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पार्टी विधायकों की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव, माता प्रसाद पांडेय सहित कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में निलंबन की कार्रवाई, सदन की स्थिति और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता के मुद्दे उठा रहा है और सरकार चर्चा से बचने की कोशिश कर रही है। नेताओं ने इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की आवाज से भी जोड़कर देखा तथा आगे भी जनहित के मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाने की बात कही।

सचिन यादव ने लगाए गंभीर आरोप

निलंबन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक सचिन यादव ने सरकार और विधानसभा प्रशासन पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन में उठा रहे थे, लेकिन सरकार चर्चा कराने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।

सचिन यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सदन के भीतर उनके साथ मार्शलों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि जिस मुद्दे को वह उठा रहे थे, वह जनता की आस्था और जनहित से जुड़ा हुआ है और उस पर खुली चर्चा होनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि निलंबन से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

सचिन यादव के निलंबन के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

सत्ता पक्ष का कहना है कि विधानसभा की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना

सभी जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है। यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है तो

उसके खिलाफ कार्रवाई करना अध्यक्ष का अधिकार और दायित्व दोनों है।

वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने के बजाय

विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार जनहित के

मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और विरोध करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की जा रही है।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के मानसून सत्र में

सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

विपक्ष जहां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, वहीं सरकार सदन की

कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने और विधायी कार्यों को पूरा करने पर जोर दे रही है।

आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं, जिससे विधानसभा के

मानसून सत्र की कार्यवाही और भी अधिक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सपा विधायक सचिन यादव का

पूरे सत्र के लिए निलंबन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बन गया है। सदन की मर्यादा,

विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर शुरू हुई

बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि

विधानसभा के शेष सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव किस दिशा में

आगे बढ़ता है और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सदन में क्या रुख अपनाया जाता है।

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