राकेश शर्मा की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को अधिक सुरक्षित, आपदा-प्रतिरोधी और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में गोरखपुर से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। स्कूल सेफ्टी एंड रिस्क एसेसमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत चयनित संस्था बेनेट कोलमैन एंड कम्पनी लिमिटेड द्वारा तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें गोरखपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए फायर एक्सपर्ट, डिजास्टर एक्सपर्ट और सिविल इंजीनियर भाग ले रहे हैं।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर उन्हें भविष्य की संभावित आपदाओं के लिए तैयार करना है, ताकि प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
पहले चरण में फायर और डिजास्टर विशेषज्ञों को मिला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में फायर एवं डिजास्टर विशेषज्ञों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया गया। दूसरे चरण में सिविल इंजीनियरों को भवनों की संरचनात्मक मजबूती, जोखिम आकलन, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी योजना, विद्युत सुरक्षा और राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों को यह भी बताया जा रहा है कि किसी विद्यालय में संभावित खतरे की पहचान कैसे की जाए और समय रहते उसके समाधान के लिए कौन-कौन से तकनीकी उपाय अपनाए जाएं।
मोबाइल ऐप के जरिए होगा डिजिटल सुरक्षा ऑडिट
प्रोजेक्ट मैनेजर सौरव सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को परियोजना के उद्देश्य, गुणवत्ता मानकों और मोबाइल ऐप आधारित डिजिटल ऑडिट प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित विशेषज्ञ मोबाइल एप के माध्यम से प्रत्येक विद्यालय का निरीक्षण करेंगे और डिजिटल रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इस रिपोर्ट के आधार पर विद्यालयों में मौजूद सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे सुरक्षा ऑडिट अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनेगा।

विद्यालयों में मजबूत होगी सुरक्षा संस्कृति
सौरव सिंह ने कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश में विद्यालय सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इससे विद्यालयों में संभावित जोखिमों की पहचान होगी, सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाया जाएगा और आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव का उपयोग अपने-अपने जिलों में गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा ऑडिट करने की अपील की।
लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा सुरक्षित शिक्षण वातावरण
विद्यालय सुरक्षा ऑडिट के माध्यम से भवनों की मजबूती, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा, पेयजल व्यवस्था, खेल मैदान, सीढ़ियों की सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा।
इस पहल से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को अधिक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
साथ ही भविष्य में किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
जिला परियोजना प्रबंधक ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश द्विवेदी ने बताया कि गोरखपुर में फायर एवं डिजास्टर
विशेषज्ञों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और वर्तमान में सिविल इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के
अनुरूप प्रदेश के विद्यालयों में सुरक्षा एवं जोखिम आकलन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
इस दौरान जोनल प्रोजेक्ट मैनेजर शिवम शुक्ला एवं केंद्र प्रबंधक पंकज मिश्रा भी उपस्थित रहे।
बच्चों के सुरक्षित भविष्य की मजबूत पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय सुरक्षा ऑडिट केवल भवनों का निरीक्षण नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की
आधारशिला है। यदि विद्यालयों में समय-समय पर सुरक्षा मानकों की जांच होती रहे तो दुर्घटनाओं और
आपदाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश के सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में
सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
निष्कर्ष
गोरखपुर से शुरू हुआ स्कूल सेफ्टी एंड रिस्क एसेसमेंट प्रोजेक्ट प्रदेश के
लाखों विद्यार्थियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और डिजिटल सुरक्षा ऑडिट के
माध्यम से विद्यालयों में सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जाएगा। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक सुरक्षित,
विश्वसनीय और आपदा-प्रतिरोधी बनने की उम्मीद है।
FAQ
Q1. स्कूल सेफ्टी एंड रिस्क एसेसमेंट प्रोजेक्ट क्या है?
उत्तर: यह परियोजना सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों की सुरक्षा का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर
उन्हें अधिक सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी बनाने के लिए शुरू की गई है।
Q2. प्रशिक्षण कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
उत्तर: गोरखपुर में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
Q3. प्रशिक्षण में कौन-कौन भाग ले रहे हैं?
उत्तर: फायर एक्सपर्ट, डिजास्टर एक्सपर्ट और सिविल इंजीनियर प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।
Q4. विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट कैसे होगा?
उत्तर: प्रशिक्षित विशेषज्ञ मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रत्येक विद्यालय का डिजिटल सुरक्षा ऑडिट करेंगे।
Q5. इस परियोजना से विद्यार्थियों को क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: विद्यालयों की सुरक्षा बेहतर होगी, संभावित जोखिम कम होंगे और विद्यार्थियों को सुरक्षित शिक्षण वातावरण मिलेग
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