देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation One Election) को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। इस मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा है कि यदि प्रस्तावित विधायी प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो वर्ष 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी बदलावों पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
लखनऊ दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में पीपी चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं, विकास योजनाओं पर असर पड़ता है और चुनावी खर्च भी काफी बढ़ जाता है। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
क्या है ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा?
‘एक देश, एक चुनाव’ का अर्थ है कि लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक ही समय पर कराए जाएं। इससे देश में अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों की आवश्यकता कम होगी और बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से प्रशासनिक कार्य बाधित नहीं होंगे।
भारत में वर्ष 1952 से 1967 तक कई चुनाव एक साथ कराए गए थे। बाद में विभिन्न विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण चुनावी चक्र अलग-अलग हो गया। अब केंद्र सरकार इस व्यवस्था को फिर से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पीपी चौधरी ने क्या कहा?
जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि समिति देशभर में राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों, चुनाव आयोग, विधि विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों से सुझाव ले रही है। उनके अनुसार अधिकांश नागरिक एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में अपनी राय दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित करना जरूरी है और यदि बार-बार चुनाव नहीं होंगे तो मतदाता भी अधिक सहजता से चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देश के पास पर्याप्त संसाधन, ईवीएम और तकनीकी क्षमता उपलब्ध है, इसलिए संसाधनों की कमी का तर्क अब पहले जैसा मजबूत नहीं रह गया है।
किन कानूनों में हो सकते हैं बदलाव?
यदि ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था लागू करनी है तो केवल चुनाव कार्यक्रम बदलना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए संविधान और चुनाव संबंधी कई कानूनों में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
संयुक्त संसदीय समिति फिलहाल संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 तथा संबंधित विधायी प्रस्तावों की समीक्षा कर रही है। समिति सभी पक्षों से सुझाव प्राप्त करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट संसद को सौंपेगी। इसके बाद संसद में विधेयकों पर चर्चा और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर आगे का रास्ता तय होगा।
विपक्ष और सरकार के अलग-अलग तर्क
इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है। सरकार और समर्थक दलों का कहना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक मशीनरी पर दबाव घटेगा और विकास कार्यों में रुकावट कम आएगी।
दूसरी ओर कुछ विपक्षी दलों का मानना है कि यह व्यवस्था भारत के संघीय ढांचे और राज्यों की स्वायत्तता से जुड़े सवाल खड़े कर सकती है। हालांकि पीपी चौधरी का कहना है कि 1952 से 1967 तक एक साथ चुनाव होने का इतिहास बताता है कि इससे संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं होता।
समिति व्यापक सहमति बनाने में जुटी
जेपीसी का कहना है कि वह केवल किसी एक राजनीतिक दल की राय के आधार पर निर्णय नहीं लेगी।
समिति का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों, चुनाव आयोग, विधि
विशेषज्ञों और नागरिक समाज से मिले सुझावों के आधार पर व्यापक सहमति तैयार करना है।
लखनऊ में भी समिति ने विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की।
इन सुझावों को अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा।
2029 तक क्या संभव है?
फिलहाल 2029 में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव
अभी प्रक्रिया में है। इसे लागू करने के लिए संसद से आवश्यक विधेयकों का पारित होना,
संवैधानिक संशोधन और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना आवश्यक होगा।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2029 में निश्चित रूप से एक साथ चुनाव होंगे।
हालांकि जेपीसी अध्यक्ष का कहना है कि समिति इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है।
अंतिम निर्णय संसद और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
निष्कर्ष
‘एक देश, एक चुनाव’ भारत के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो चुनावी प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कार्यप्रणाली में
व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इसके लिए राजनीतिक सहमति,
संवैधानिक संशोधन और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य है।
आने वाले महीनों में जेपीसी की रिपोर्ट और संसद में होने वाली चर्चा इस प्रस्ताव की दिशा तय करेगी।
FAQ Schema
Q1. One Nation One Election क्या है?
उत्तर: यह एक प्रस्ताव है जिसके तहत लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे।
Q2. क्या 2029 में एक साथ चुनाव होंगे?
उत्तर: जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि लक्ष्य 2029 तक
इस व्यवस्था को लागू करने का है, लेकिन अंतिम निर्णय संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
Q3. इस प्रस्ताव पर कौन काम कर रहा है?
उत्तर: ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े विधेयकों की समीक्षा संयुक्त संसदीय समिति (JPC) कर रही है।
Q4. इससे क्या लाभ बताए जा रहे हैं?
उत्तर: चुनावी खर्च में कमी, प्रशासनिक दक्षता में सुधार, बार-बार लागू होने वाली आचार
संहिता से राहत और विकास कार्यों में निरंतरता इसके प्रमुख संभावित लाभ बताए जा रहे हैं।
Q5. क्या इसके लिए कानून बदलने होंगे?
उत्तर: हां, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान और
चुनाव संबंधी कई कानूनों में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है।
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